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गमछा तलाशने शहडोल में खाक छानती रही पुलिस

शहडोल में नहीं मिले सबूत तो पुलिस रीवा रवाना हुई, आजाक जिला संयोजक की हत्या का मामला

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Police firing a hole in Shahdol

Police firing a hole in Shahdol

सतना. आजाक जिला संयोजक अभिषेक सिंह की हत्या के मुख्य आरोपी निलंबति पीडब्ल्यूडी अफसर प्रदीप सिंह की निशादेही पर सबूत तलाशने के लिए पुलिस शहडोल पहुंची। यहां कई घंटों तक पुलिस स्थानीय लोगों से पूछताछ करते हुए प्रदीप के उस गमछे को तलाशती रही जो वारदात के वक्त उसने इस्तेमाल किया था। गमछे का उपयोग प्रदीप ने कब और किसलिए किया इसका जबाव पुलिस नहीं दे सकी। शहडोल में अहम साक्ष्य नहीं मिलने पर पुलिस मुख्य आरोपी को लेकर रीवा रवाना हो गई। यहां उसे घर और करीबियों के यहां पूछताछ की गई है। इस सनसनीखेज मामले में अब भी पुलिस मीडिया से सच्चाई छिपाने का प्रयास कर रही है। पुलिस का कहना है कि हत्या की वारदात के बाद प्रदीप कहां कहां गया, किस जगह रुका और उसने घटना के वक्त पहने हुए कपड़े और वारदात में प्रयुक्त सामान को कहां छोड़ा है? उन सभी जगहों की जांच की जा रही है। हालांकि पुलिस अब अदालत में केस डायरी पेश करने के लिए खानापूर्ति में जुटी है। आरोपी को शहडोल और रीवा लेकर जाने वाली पुलिस टीम में टीआइ थाना सिविल लाइन अर्चना द्विवेदी, उप निरीक्षक डीडी खान समेत अन्य मौजूद रहे। शुक्रवार को रिमांड पूरा होते ही आरोपी को अदालत में पेश कर दिया जाएगा।
संरक्षण देने वाले हों बेनकाब
मृतक अभिषेक सिंह के पिता बृहस्पति सिंह का कहना है कि पुलिस शुरूआती दौर से मामले की बारीकी से जांच नहीं कर रही। अपराधी हर जगह अपना दखल बनाए हुए था। उनका कहना है कि घटना के बाद आरोपी प्रदीप सिंह बघेल सतना में ही अपने साले फूड इंस्पेक्टर नागेन्द्र सिंह के यहां रुका था। जब प्रदीप पकड़ा गया तो उसका दूसरा ***** वीरेन्द्र सिंह भी थाने आया। अपराधी को शरण देना कानूनन अपराध होता है। एेसे में पुलिस को उन व्यक्तियों के चेहरे बेनकाब करना चाहिए जिन्होंने हत्या के मुख्य आरोपी प्रदीप को संरक्षण दिया।
इस अपराध का खुलासा क्यों नहीं?
चोरी, लूट, गांजा के मामलों में पकड़े जाने वाले अपराधियों का खुलासा करने के लिए पुलिस एक रोज पहले ही सूचना दे देती है। लेकिन सतना से राजधानी तक गूंज चुके अभिषेक सिंह हत्याकांड का मुख्य आरोपी पकड़ में आने के बाद खुलासा करने और आरोपी को मीडिया के सामने पेश करने से पुलिस अब भी कतरा रही है। इसी मामले में पूर्व में पकड़े गए आरोपी को भी सबके सामने पेश नहीं किया गया था। वारदात में अहम भूमिका निभाने वाले आरोपी शेरू खान को भी गुपचुप तरीके से पकडऩे के बाद पुलिस ने अदालत में पेश कर दिया था ताकि सवाल जवाब से बचा जा सका। सरकारी आवास में हुए इस हत्याकांड के बाद पुलिस जांच पर कई दफा उंगलियां उठ चुकी हैं। पुलिस की भूमिका पर भी सवाल हुए लेकिन जिम्मेदार अफसर चुप्पी साधे रहे। अब जब मुख्य आरोपी गिरफ्त में आया तब भी पुलिस कुछ कहने से बच रही है।