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रेत का अवैध परिवहनः जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने वाली पुलिस इंट्री लेने में आगे

खनिज महकमे को रेत का अवैध कारोबार रोकने नहीं कोई रुचिपरिवहन विभाग को न ओवर लोडिंग की चिंता, न बिना नंबर वाले रेत वाहनों पर कार्रवाई बरही तहसीलदार की तरफदारी से सवालों के घेरे में कटनी कलेक्टर

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सतना. जिले में रेत के अवैध कारोबार पर किसी तरीके से लगाम लगती नजर नहीं आ रही। स्थिति यह है कि सरकारी खजाने को हर माह लाखों का चूना लगाने वाले इस अवैध धंधे को सरकारी मशीनरी ने अपनी कमाई का जरूर धंधा बना लिया है और सरकारी हित ताक पर रख दिए गए हैं। अभी हाल ही में पुलिस और परिवहन महकमे के आला अधिकारियों से जब इस संबंध में कुछ लोगों ने लिखित शिकायत की तो दोनों विभागों का कहना था कि रेत का मामला खनिज विभाग का है। लिहाजा उन्हें ही यह शिकायत दीजिये। पुलिस अधिकारी से ऐसा जवाब मिलने के बाद अब शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब जिम्मेदारी नहीं है तो फिर थानों में किस बात की इंट्री ली जा रही है।
जानकारी के अनुसार रेत के अवैध परिवहन को लेकर विगत दिवस कुछ लोगों ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की। इन्होंने अपनी शिकायत में रेत के अवैध परिवहन पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की। इस पर उन्हें कहा गया कि यह खनिज विभाग का मामला है। हालांकि शिकायतकर्ताओं ने कहा कि अगर थाना पुलिस रेत के अवैध परिवहन पर कार्रवाई कर खनिज को सौंप देती है तो भी रोक लग जाएगी। बहरहाल शिकायतकर्ताओं को कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। अब ये शिकायतकर्ता कह रहे हैं कि जब पुलिस कार्यवाही के नाम पर अपना पल्ला झाड़ रही है तो फिर थानों में किस बात की इंट्री ली जा रही है। उधर इनके द्वारा बताया गया कि खनिज महकमा तो पूरी तरह से अवैध कारोबार को संरक्षण दिए हुए है। हालात यह है कि जब कभी दबाव बनता है तो थोड़ी बहुती खानापूर्ति कर दी जाती है। जिस तरीके से गत दिवस पांच वाहन पकड़ कर अपनी सक्रियता दिखा दी गई।

यह थी शिकायत

पुलिस अधीक्षक को की गई शिकायत में कहा गया है कि सतना जिले में बरही कटनी जिले से व्यापक पैमाने पर रेत का अवैध परिवहन हो रहा है। एनजीटी के द्वारा 30 जून से 30 सितंबर तक रेत का उत्खनन कार्य रोक दिया गया है। इसके बाद भी रेत का अवैध खनन किया जा रहा है और सतना जिले में व्यापक पैमाने पर रेत का अवैध परिवहन हो रहा है। इससे रेत का वैध कारोबार करने वालों का व्यापार प्रभावित हो रहा है। इस अवैध कारोबार पर रोक लगाने की मांग की गई। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि एसपी का कहना था कि पुलिस क्या क्या देखेगी। यह खनिज विभाग का काम है। इस दौरान यहां मौजूद सीएसपी ने कहा कि इसकी शिकायत खनिज विभाग से क्यों नहीं करते। हालांकि शिकायतकर्ताओं ने सफाई दी कि पुलिस अगर चाह ले तो पूरा अवैध कारोबार रुक जाए। वे अवैध परिवहन के वाहन पकड़ कर खनिज को दे दें। लेकिन कोई प्रभावी आश्वासन अधिकारियों की ओर से नहीं मिला।
इस समय 90 फीसदी अवैध कारोबार
बताया गया है कि इस समय रेत का जो भी परिवहन हो रहा है उसमें ९० फीसदी अवैध है, क्योंकि सतना जिले में आने वाली ज्यादातर रेत उमरिया और कटनी से आती है और यहां के पिटपास बंद है। बरही में अभी एक ही भण्डारण लाइसेंस है लेकिन यहां से रेत कम पिटपास ज्यादा बिकते हैं। 100 रुपये घन मीटर का पिटपास 300 रुपए में बिक रहा है। जो 10 फीसदी एक नंबर की रेत आ रही है वह शहडोल जिले से आ रही है।

यह है रेत के अवैध कारोबार का सिस्टम

रेत कारोबार से जुड़े लोगों की मानें तो रेत का अवैध कारोबार खनिज और पुलिस के संरक्षण में चल रहा है। खनिज विभाग का अपना सिस्टम तय है। इनके द्वारा प्रति ट्रक 5000 रुपये न्युनतम लिये जाते हैं। इसका बकायदे खाता बही मेंटेन किया जाता है। अगर कभी कोई वाहन अगर पकड़ लिया जाता है तो उसे यह बस बताया पड़ता है कि ये वाहन सिस्टम में है। फिर पकडऩे वाला संबंधित से क्लियर कर लेता है और मामला निपट जाता है। दूसरी ओर पुलिस का भी यही सिस्टम है। लेकिन यहां दो तरीके की इंट्री ली जाती है। एक पिट पास तो है लेकिन ओवर लोड वाहन, जिसका एक हजार रुपये प्रतिमाह प्रतिवाहन लगता है। दूसरा बिना पिट पास वाला वाहन जिसका 10 हजार रुपये प्रतिमाह प्रति वाहन लगता है। यह रेट बदेरा, मैहर, उचेहरा और कोलगवां थाने के हैं। हालांकि अभी उचेहरा और कोलगवां की इंट्री कम होना बताई गई है। कोलगवां से बेगारी का काम लिया जाता है। सबसे ज्यादा रेट बरही के हैं। यहां थाना पुलिस और तहसीलदार प्रतिदिन एक हजार रुपये लेते हैं।
तो क्या कलेक्टर छिपा रहे
बरही के बारे में सभी रेत कारोबारी खुलेआम बताते हैं कि यहां तहसीलदार की 1000 रुपए की इंट्री प्रतिदिन प्रतिवाहन है। जब कटनी कलेक्टर एसबी सिंह से बात की गई तो उन्होंने तहसीलदार को पूरी तरह से पाक साफ बताते हुए कहा कि यहां नियमित कार्रवाई हो रही है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां विशेष दस्ता बना हुआ है जो नियमित कार्रवाई कर रहा है। जबकि रेत कारोबारियों ने बताया कि थाने से 200 फीट की दूरी पर पेट्रोल पंप के पास रेत का डंप लगता है और यहीं से रेत सतना के ज्यादातर ट्रकों में भरी जाती है। ऐसे में अब कटनी कलेक्टर भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।