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नोटबंदी के दो साल: रियल एस्टेट की रीढ़ पर रेरा का झटका, ऑटो सेक्टर से जगी आस

रियल एस्टेट कारोबार में 40% तक की कमी, डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़ा

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Rare shock at the back of real estate, awakening from the auto sector

Rare shock at the back of real estate, awakening from the auto sector

सतना. नोटबंदी के दो साल बाद भी बाजार पूरी तरह से नहीं उबरा है। सबसे ज्यादा असर रियल एस्टेट कारोबार पर पड़ा। कारोबार में अब भी 40 फीसदी तक की कमी है। इस क्षेत्र में इन्वेस्ट करने वाले लोगों की संख्या में गिरावट है। कारोबारियों की मानें तो नोटबंदी के बाद पचास से साठ फ्लैट कम बुक हो रहे हैं। औसतन एक फ्लैट की कीमत 30 लाख रुपए मान ली जाए तो हर माह 20 से 25 करोड़ रुपए का स्लो डाउन सामने आ रहा है। वहीं रियल एस्टेट पर रेरा की मार भी असर डाल रही है। वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में दो साल बाद नवरात्र और दिवाली के सीजन में ग्रोथ देखी गई। एक्सपट्र्स का मानना है कि इस सेक्टर से बाजार उबर गया है। दूसरे में भी जल्द असर दिखेगा।

सीमेंट कारोबार पर असर
वर्ष 2016 के पहले सतना में सीमेंट कारोबार 3500 करोड़ रुपए से भी अधिक का था। सीमेंट कारोबारियों की मानें तो नोटबंदी का प्रतिकूल असर सीमेंट उद्योग पर भी पड़ा। इसके बाद आए जीएसटी ने सीमेंट व्यापार को और अधिक प्रभावित किया। जानकारों की मानें तो लोग जीएसटी चुकाकर सीमेंट लेने की बात समझ नहीं पा रहे हैं। उन्हें जीएसटी भार लगता है। इसके चलते पंजीकृत व्यापारी के पास जाने से बचते हैं।

पीओएस मशीन बढ़ी
नोटबंदी के पहले शहर में गिनी चुनी दुकान, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी में पीओएस मशीन का उपयोग हो रहा था। नोटबंदी के बाद इनकी संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। शहर के सभी पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी सहित अधिकांश दुकानों में चार सैकड़ा से अधिक पीओएस मशीन व्यापार की सुविधा के लिए लगायी गई हैं। इनमें दिनोंदिन इजाफा भी हो रहा है।

60 त्न डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़ा
नोटबंदी का रियल एस्टेट की तुलना में डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में सकारात्मक असर पड़ा है। नोटबंदी के बाद डिजिटल ट्रांजेक्शन में 50 से साठ 60 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नेट बैंकिंग के प्रति भी लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है। ग्रामीण की बजाय शहरी अंचल में इसका असर अधिक देखने को मिल रहा है।