
Reservation given more than fixed on advertised posts in PSC
सतना. मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने अलग-अलग विभागों के लिए पदों में भर्ती के 533 पद विज्ञापित किए हैं। इन पदों के विज्ञापन में ओबीसी आरक्षण को लेकर बवाल खड़ा हो गया है। पीएससी की तैयारी कर रहे युवाओं ने बताया कि ओबीसी के लिए तय 27 फीसदी आरक्षण से कहीं ज्यादा 37 फीसदी तक दे दिया गया है। कई पद ऐसे हैं जिसमें अनारक्षित सामान्य के लिए एक भी पद नहीं। आरक्षण की इस प्रक्रिया का व्यापक विरोध शुरू हो गया है। तैयारी कर रहे युवाओं ने इसके विरुद्ध न्यायालय जाने की बात कही है।
आरक्षण की गलत गणना
तैयारी कर रहे मनीष त्रिपाठी, विक्रम सिंह, प्रशांत सिंह व रवि द्विवेदी ने बताया कि एमपी-पीएससी ने इस बार जो 533 पद विज्ञापित किए हैं उनमें आरक्षण के तय मापदण्डों की अनदेखी की गई है। न केवल टोटल पदों में आरक्षण की गलत गणना करते हुए ओबीसी को ज्यादा पद दे दिए गए हैं बल्कि विभागवार भी देखा जाए तो गलत वितरण किया गया है। नतीजा, कुछ विभागों में अनारक्षित के लिए अवसर ही नहीं हैं। मसलन, कोषालय अधिकारी के लिए 24 पद विज्ञापित किए गए हैं। इसमें से 14 पद ओबीसी को दिए गए हैं, सामान्य के लिए एक भी पद नहीं है। यहां ओबीसी को आरक्षण देखा जाए तो 58 फीसदी से ज्यादा निर्धारित कर दिया गया है। युवाओं ने कहा कि सामान्य वर्ग के साथ अन्याय है। यह सीधी भर्ती की परीक्षा है न कि बैकलाग पदों की भर्ती। लिहाजा तय नियमों के तहत ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण ही देना चाहिए। अब पीएससी के अफसर इस मामले में अपना पल्ला झाड़ते हुए बता रहे कि उन्हें विभाग ने जो पद दिए उसी के अनुरूप पद विज्ञापित किए। लिहाजा वे विभाग पर दोष मढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे अब न्यायालय की शरण में जाएंगे।
कुल में ओबीसी को 37 फीसदी आरक्षण
युवाओं ने बताया कि एमपी पीएससी ने इस बार कुल 533 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया है। इसमें अनारक्षित के लिए 131 पद, एससी के लिए 71 पद, एसटी के लिए 100 पद, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 195 पद तथा आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्लूएस) के लिए 36 पद निर्धारित किए गए हैं। इस तरह से ओबीसी के लिए आरक्षित पदों को देखा जाए तो यह 36.58 फीसदी है, जो तय 27 फीसदी से काफी ज्यादा है। ईडब्लूएस के लिए तय 10 फीसदी आरक्षण से कम 6.75 फीसदी पद ही विज्ञापित किए गए हैं।
विभागवार भी आरक्षण मापदण्डों की अनदेखी
अगर यह माना जाए कि पीएससी विभागों से प्राप्त पदों के आधार पर ही पद विज्ञापित करता है तो भी यहां आरक्षण मापदण्डों की अनदेखी की गई है। मसलन श्रम अधिकारी के कुल 5 पद विज्ञापित किए गए हैं। इसमें 3 ओबीसी को दिए गए हैं जो 60 फीसदी होता है। एमपी अधीनस्थ लेख सेवा के कुल 88 पदों में 33 पद ओबीसी को दिए गए हैं जो 37 फीसदी होता है। कोषालय अधिकारी में 24 पदों में 14 पद ओबीसी को दिए गए हैं अर्थात ओबीसी को 58 फीसदी आरक्षण दिया गया है। सहायक संचालक स्थानीय निधि में कुल 6 पदों में से ओबीसी को 3 पद अर्थात 50 फीसदी पद ओबीसी को दे दिए गए हैं। उद्योग में 53 में 22 पद अर्थात ओबीसी को 42 फीसदी आरक्षण दिया गया है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्रेणी ग में तो चौंकाने वाली स्थितियां हैं। इसमें विज्ञापित कुल 19 पदों में 18 पद ओबीसी को दिए गए हैं। सामान्य को 0 पद हैं। यहां ओबीसी को 95 फीसदी आरक्षण दे दिया गया है। उपपंजीयक में 6 में से 5 पद ओबीसी को दिए गए हैं, यहां भी ओबीसी को 83 फीसदी आरक्षण का लाभ दिया गया है। सीएमओ ख श्रेणी में 10 में 6 पद अर्थात 60 फीसदी पद आरक्षित किए गए हैं।
Updated on:
09 Dec 2019 12:45 am
Published on:
09 Dec 2019 12:39 am
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