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पन्ना जिले के सलेहा में स्थित है भोलेनाथ की दुर्लभ चतुर्भुज प्रतिमा, 5वीं सदी का बताया जा रहा मंदिर

एक ही मूर्ति में दूल्हा, अर्धनारीश्वर और समाधि में लीन शिव के होते हैं दर्शन

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Saleha Chaumukh Nath Shiva Temple Story : Panna madhya pradesh

Saleha Chaumukh Nath Shiva Temple Story : Panna madhya pradesh

पन्ना। सावन मास (sawan mass) की शुरूआत होते ही भोलेनाथ (Bholanath) के मंदिर जयकारों से गूंजने लगे है। वैसे तो अपनी-अपनी जगह सभी शिव मंदिरों का महत्व है लेकिन सलेहा क्षेत्र के नचने का (Chaumukh Nath Mandir) चौमुख नाथ महादेव मंदिर (Chaumukh Nath Shiva Temple) का इतिहास ही अनोखा है। कहते है अति प्राचीन इस मंदिर में भगवान शिव के चार मुख वाली प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा का हर मुख अलग-अलग रूप वाला है।

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चतुर्मुखी प्रतिमा में एक मुख भगवान के दूल्हे के वेष का है। इसको गौर से देखने पर भगवान के दूल्हे के रूप के दर्शन होते हैं। दूसरे मुख में भगवान अर्धनारीश्वर रूप में हैं। तीसरा मुख भगवान का समाधि में लीन स्थिति का है और चौथा उनके विषपान करने का है। प्रतिमा का सूक्ष्मता के साथ दर्शन करने पर सभी रूप उभरकर आते हैं। यह प्रतिमा अपने आप में अद्भुद है और दुर्लभ है।

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इनके पूजा और दर्शन करने से पुण्य लाभ की प्राप्ति होती है। यहां हर समय स्थानीय श्रद्धालु आते हैं लेकिन सावन के महीने में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। यहां भगवान के दर्शन करने के लिए प्रत्येक सावन के सोमवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालुजन पहुंचते हैं।

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इसी मंदिर परिसर में पार्वती मंदिर है जो दुनिया के सबसे प्राचीनतम मंदिरों में से है। यह मंदिर गुप्त कालीन करीब पांचवीं सदी का माना जाता है। माना जाता है जब इंसान मंदिरों के निर्माण की कला सीख रहा था तब इस मंदिर का निर्माण कराया गया। यह केंद्र संरक्षित स्मारक है। यहा सावन सोमवार में पूजा अर्चना करने वालों की भारी भीड़ पहुचती है।

पार्किंग में होती समस्या
मंदिर परिसर में वाहनों के पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इससे वाहनों को पार्क करने में लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़त है। हालात यह है कि सावन सोमवार में लोगों को वाहन निकालने में एक-एक घंटे तक मसक्कत करनी पड़ती है। यहां यातायात पुलिस की भी कोई व्यवस्था नहीं होती है जो यहां आने वाले श्रद्धालुओं की इस समस्या का समाधान कर सके। इस साल सावन के पहले सोमवार को अभी कई दिन शेष हैं। जिला प्रशासन को चाहिए कि यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यहां पार्किंग की समुचित व्यवस्था की जाए।