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सतना : 10 हजार आवारा मवेशियों का सड़कों पर कब्जा

उप संचालक वेटनरी के अनुसार सतना जिले की सड़कों पर 10 हजार निराश्रित मवेशी घूम रहे हैं। इन मवेशियों की वजह से सुगम यातायात बाधित हो रहा है। कई बार इनकी वजह से हादसे भी हो रहे हैं। अब जरूरत है इन्हें सड़को से निकाल कर गौशालाओं और गोठानों में पहुंचाने की। हालांकि इस दिशा में अभी प्रभावी कार्यवाही का अभाव नजर आ रहा है।

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सतना। जिले के राजमार्गों सहित शहर और गांवों की सड़कों पर इन दिनों निराश्रित मवेशियों ने बड़े पैमाने पर कब्जा जमा रखा है। बारिश के मौसम की वजह से सड़कों में मवेशियों की आमद और भी ज्यादा हो गई है। इस वजह से न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है बल्कि सड़क हादसे भी हो रहे हैं। इसमें पशु एवं जन हानि दोनों हो रही है। इसको देखते हुए प्रदेश के गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड के अध्यक्ष अखिलेश्वरानंद गिरि ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिख कर ग्राम स्तरीय गोठान और जिला स्तरीय गोठान की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। इसके पहले भी प्रमुख सचिव गुलशन बामरा इसकी व्यवस्था के निर्देश जारी कर चुके हैं।

वाहन चालकों के लिए मुसीबत

बारिश में शहर की सड़कों पर बेखौफ घूम रहे मवेशी लोगों के लिए मुसीबत बन रहे है। शहर की सड़कों पर घूम रहे और जहां तहां बैठे मवेशी आए दिन हादसों का भी कारण बन रहे हैं। शहर से बाहरी क्षेत्रों सहित पेप्टेक सिटी से माधवगढ़ के बीच और बगहा से कोठी तिराहे के बीच बड़ी संख्या में मवेशियों का झुण्ड बैठा मिलता है। रात को स्थिति और खराब हो जाती है। पूरे कुनबे के साथ सड़क पर बैठे मवेशियों की वजह से वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ रही है। कई बार तो इनकी आपसी लड़ाई से राहगीर घायल भी हो जाते हैं। शाम के वक्त ट्रैफिक ज्यादा होता है, इस हालत में सड़क के बीच मवेशियों का कब्जा दुर्घटना का कारण बन जाता है। कई बार तो वाहन चालकों को उतर कर मवेशियों को हटाना पड़ता है फिर भी आसानी से वे टस से मस नहीं होते हैं।

अभी 16 हजार मवेशी गौशालाओं में

सतना जिले में वर्तमान में 52 शासकीय और 16 निजी गौशालाएं हैं। इन गौशालाओं में लगभग 16 हजार मवेशी रखे गए हैं। पशु चिकित्सा विभाग के उप संचालक डॉ प्रमोद शर्मा के अनुसार शासकीय गौशालाओं में लगभग 5500 मवेशी मौजूद हैं। शेष मवेशी निजी संस्थाओँ की गौशालाओं में हैं। उन्होंने बताया कि उनके एक आकलन के मुताबिक सतना जिले की सड़कों पर निराश्रित मवेशियों की संख्या लगभग 10 हजार है। इन मवेशियों का विशेष तौर पर शहरी क्षेत्र के मवेशियों को गौशालाओं में रखने की पर्याप्त जगह है। इस संबंध में उन्होंने संबंधित गौशाला संचालकों से चर्चा भी कर ली है। नगरीय निकाय इन गौशालाओं में शहर की सड़कों पर घूमने वाले पशुओं को गौशालाओं में भिजवा सकते हैं।

निगम ने शुरू की कवायद

इधर निगमायुक्त ने बताया कि उन्होंने सतना शहर के निराश्रित गौवंश को गौशालाओं में भेजने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। उप संचालक पशु चिकित्सा से इस संबंध में जानकारी चाही गई है कि कितनी गौशालाओं में सतना से मवेशियों को भेजा जा सकता है। अगले दिन तक उनके यहां से जानकारी आ जाएगी। इसके बाद इन गौशालाओं में शहर से मवेशियों को भेजने का काम प्रारंभ कर दिया जाएगा।

गौठान बनाने स्थल चयन प्रारंभ

प्रमुख सचिव गुलशन बामरा के पत्र के बाद अध्यक्ष गौपालन संवर्धन बोर्ड अखिलेश्वरानंद गिरी ने भी निराश्रित गौवंश के लिए गौठान स्थापना के लिये कलेक्टर को पत्र लिखा है। कलेक्टर ने इस संबंध में अग्रिम कार्रवाई के लिये जिपं सीईओ को जिम्मेदारी दी है। जिपं सीईओ डॉ परीक्षित झाड़े ने बताया कि राजमार्गों के निकट और शहरों से जुड़े क्षेत्रों में गौठान स्थापना के लिये स्थल चयन के निर्देश मैदानी अमले को दे दिए गए हैं। स्थल चयन होने के बाद आगे की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।

इसलिये हालात और बिगड़े

बारिश के मौसम में खेतों में पानी तो भर ही जाता है साथ ही मिट्टी गीली होने से वह मवेशियों के खुरों में भरती है जिससे उन्हें परेशानी होती है। इस वजह से पशु सूखे की तलाश में सड़कों पर आते हैं। इसके अलावा खेती का सीजन चालू हो जाने से किसान भी पशुओं से अपनी फसल बचाने के लिए उन्हें खेती वाले हिस्से से भगाते हैं। कई स्थानों पर झुण्ड के झुण्ड पशुओं से हांक कर खेतों से दूर सडकों पर छोड़ दिये जाते हैं। इस वजह से निराश्रित पशुओं का बारिश के मौसम में रोडों पर जमावड़ा काफी संख्या में हो जाता है।