
Satna: caste change by fake order
सतना. राजस्व विभाग जिस आदेश को निरस्त कर चुका है, चार साल पुराने उस निरस्त किये जा चुके आदेश का हवाला देकर अब भू-अभिलेख विभाग से जाति बदलने की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है। इस संबंध में सभी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और तहसीलदारों को पत्र लिख कर निर्देशित किया गया है कि राजस्व रिकार्ड में कोटवार की जगह संशोधन कर दाहिया या दहायत दर्ज कर जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाएं। यह पूरी कवायद राज्यमंत्री रामखेलावन पटेल के एक पत्र के बाद की गई है।
सभी एसडीएम को भेजे गए आदेश
मिली जानकारी के अनुसार अपर कलेक्टर के हस्ताक्षर से जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) व सभी तहसीलदारों को एक पत्र जारी किया गया है। जिसमें राज्य मंत्री रामखेलावन पटेल के 24 अगस्त 2021 के पत्र का हवाला देते हुए राजस्व रिकार्ड में कोटवार की जगह संशोधन कर दाहिया या दहायत दर्ज करने एवं जाति प्रमाण पत्र जारी करने कहा गया है। इसके लिये म.प्र. शासन राजस्व विभाग मंत्रालय से 1 जून 2016 को जारी पत्र क्रमांक 643 का उल्लेख करते हुए एक सप्ताह में कार्यवाही कर कार्यालय को अवगत कराने कहा गया है। इसके साथ ही इन सभी पत्रों की प्रतिलिपियां भी लगाई गई हैं।
निरस्त किया जा चुका है पत्र
उधर राजस्व विभाग के जानकारों का कहना है कि जिस तरीके से राजस्व अभिलेखों में कोटवार जाति को संशोधित कर दाहिया या दहायत दर्ज करने कहा गया है वह पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। क्योंकि 2016 के जिस पत्र का हवाला दिया गया है उस पत्र को राज्य शासन ने गलत मानते हुए निरस्त कर दिया था। राजस्व विभाग मंत्रालय ने 27 जून 2017 को पत्र क्रमांक 717 के जरिये 1 जून 2016 को जारी पत्र क्रमांक 643 को नियम प्रावधानों के विपरीत बताते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया था।
यह था नियम विरुद्ध पत्र
राजस्व विभाग मंत्रालय के तत्कालीन उप सचिव एसके रजक ने 1 जून 2016 को पत्र क्रमांक 643 जारी करते हुए रीवा संभाग में निवासरत दाहिया व दहायत जाति की समस्याओं का हवाला देते हुए लिखा था कि राजस्व रिकार्ड में कोटवार जाति का उल्लेख होने के कारण उनके जाति प्रमाण पत्र नहीं बनाए जा रहे हैं। जबकि कोटवार पद है न कि जाति। इसके साथ ही इनकी जाति में सुधार करने के निर्देश दिये गये थे। इतना गंभीर पत्र रजक ने रीवा संभाग के सभी जिलों के कलेक्टरों को संबोधित किया था लेकिन इसकी प्रतिलिपि शासन के किसी अधिकारी को नहीं दी गई थी। बाद में मामला तूल पकड़ने पर न केवल इस पत्र को निरस्त कर दिया गया बल्कि इस मामले में रजक की जांच भी संस्थित की गई थी।
नये आदेश को छिपाया
विगत वर्ष सतना जिले में कोटवार सहित दाहिया दहायत जाति को लेकर किये गये आंदोलन प्रदर्शन के बाद तत्कालीन कलेक्टर ने शासन से मार्गदर्शन मांगा था। जिस पर सामान्य प्रशासन विभाग ने 18 अक्टूबर 2021 को पत्र क्रमांक एफ 7-29 में स्पष्ट किया था कि राज्य पिछड़ा वर्ग की सूची के सरल क्रमांक 57 पर अंकित कोटवार जाति को पिछड़ा वर्ग की सूची से विलोपित किया गया है। वहीं भारत सरकार द्वारा म.प्र. के लिए अधिकृत अनुसूचित जाति की सूची में कोटवार जाति अंकित नहीं है। इसलिये कोटवार जाति को अन्य पिछड़ा वर्ग अथवा अनुसूचित जाति के जाति प्रमाण पत्र की पात्रता नहीं है। इसलिये इन्हें इन जातियों के प्रमाण पत्र न जारी किए जाएं। लेकिन हाल में अपर कलेक्टर ने चार साल पुराने निरस्त आदेश का हवाला तो दे दिया लेकिन 4 माह पुराने पत्र को छिपा ले गए। ऐसे में अगर अब अपर कलेक्टर के इस पत्र के आधार पर राजस्व अभिलेखों में कोटवार की जगह दाहिया या दहायत लिखा जाता है तो यह बड़ी अनियमितता होगी।
इसलिये किया खेल
चूंकि कोटवार जाति को ओबीसी और अनुसूचित जाति दोनों में से किसी का लाभ नहीं मिल रहा है तो साजिश पूर्वक जाति ही बदलने का खेल किया गया है। इसके लिये मंत्री से पत्र लिखवा कर यह पूरी ब्यूह रचना रची गई।
Published on:
12 Feb 2022 04:49 pm
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