
सतना। नगर निगम द्वारा हाल ही में बढ़ाए गए विकास शुल्क को लेकर खूब हो हल्ला हो रहा है लेकिन हकीकत यह है कि अब इसे कम से कम सतना जिले से तो नहीं घटाया जा सकेगा। इसकी वजह यह है कि इस बढ़ोत्तरी पर प्रशासक (परिषद) के हस्ताक्षर हो चुके हैं। ऐसे में अब प्रशासक खुद अपने निर्णय को नहीं बदल सकेंगे। नियमानुसार अब विकास शुल्क कम हो या नहीं यह शासन के हाथ में है। इसके लिये जरूरी है कि प्रस्ताव शासन को भेजा जाए। हालांकि नगरीय निकाय के जानकारों का कहना है कि शासन भी जब इसका विश्लेषण करेगा कि यह शुल्क कब से नहीं बढ़ा है और उस आधार पर निर्णय लेगा तो इसमें कमी के लिये सहमत होना मुश्किल है।
निगम में फंड की कमी
स्मार्ट सिटी घोषित हो चुके सतना नगर निगम में अब जिस तरीके से विकास की दिशा में कार्य हो रहे हैं या होने प्रस्तावित है, साथ ही विभिन्न आधारभूत सुविधाओं में बढ़ोत्तरी की जानी है उसको लेकर पाया गया है कि फण्ड की काफी कमी है। ऐसे में नगर निगम की आय के साधनों की जब समीक्षा की गई तो पाया गया कि निगम के कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोत्तरी होती रही, निगम द्वारा शहर की सुविधाओं में इजाफा किया जाता रहा है। लेकिन इसके लिये उपलब्ध होने वाले आय के साधनों पर कभी गौर नहीं किया गया। हालात यह पाए गए कि 20 साल से सतना नगर निगम का विकास शुल्क बढ़ाया ही नहीं गया।
वर्ष 2000 से विचार ही नहीं हुआ
मोटे तौर पर देखा जाए तो वर्ष 2000 के बाद से नगर निगम के रहनुमाओं ने इस दिशा में कोई विचार ही नहीं किया। इस स्थिति को देखते हुए वर्ष 2000 से 2020 के बीच तुलनात्मक आंकलन करने के बाद विकास शुल्क में बढ़ोत्तरी का निर्णय लिया गया। साथ ही वर्तमान हालातों में क्षेत्रों के विभाजन को भी पुन: परिभाषित कर दिया गया।
बढ़ोत्तरी को किया गया कम
नगर निगम ने जब विकास शुल्क के हिस्से का आंकलन करना शुरू किया तो पाया गया कि 20 साल पहले वर्ष 2000 में पूर्ण विकसित क्षेत्र का विकास शुल्क 2 रुपये लगता था। उसे अब 20 साल बाद 2020 के हिसाब से आंकलित किया गया तो यह राशि 10 रुपये से ज्यादा आ रही थी। लेकिन निगम के अधिकारियों ने इस बढ़ोत्तरी को ज्यादा मानते हुए इसे और कम करके 8 रुपये तय किया गया। हालांकि पहले की तुलना में इस राशि को अगर देखा जाए तो बढ़ोत्तरी 4 गुना समझ में आती है लेकिन 20 साल बाद की यह बढ़ोत्तरी अनुक्रम में है। यही स्थिति अविकसित क्षेत्र में है जहां 5 रुपये को बढ़ा कर 20 रुपये कर दिया गया।
अर्द्ध विकसित क्षेत्र का शुल्क कर दिया खत्म
नगर निगम में कमाई का खेल बनने वाले अर्द्ध विकसित क्षेत्र को खत्म कर दिया। दरअसल इस श्रेणी के नाम पर काफी खेल हो जाते थे और ज्यादातर अविकसित क्षेत्र को ही अर्द्ध विकसित दिखा कर राशि में बचत कर ली जाती थी। जिसका ज्यादातर टैक्स चोरी में उपयोग होता था। लिहाजा निगम ने इसे पूरी तरह से खत्म कर दिया है।
शासन के पास कम करने की शक्ति
इस मामले में जब निगमायुक्त अमनवीर सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि चूंकि सतना से निर्णय हो चुका है। लिहाजा इसमें संशोधन का कोई भी निर्णय होगा तो वह शासन स्तर से ही होगा। अब प्रशासक चाहें तो वे इस पर प्रस्ताव भेजने के आदेश दे सकते हैं।
प्रभाविता तिथि आगे बढ़ाना उचित
इस मामले में आर्कीटेक्ट छवि त्रिपाठी से बात की गई तो उनका मानना है कि 20 साद आज के परिदृश्य में यह बढ़ोत्तरी कोई ज्यादा नहीं है। लेकिन वर्तमान कारोना काल में जबकि आर्थिक स्थितियां लोगों की बदतर हैं तो इसके प्रभावी होने की तिथियों को आगे टाला जा सकता है।
Updated on:
22 May 2020 12:28 am
Published on:
22 May 2020 12:26 am
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