
SATNA: District level 'Jan Adhikar' starts
सतना. कलेक्टर अजय कटेसरिया ने अपनी प्राथमिकता में जनता की समस्याओं का निराकरण बताया था। साथ ही उन्होंने सीएम हेल्पलाइन के निराकरण की समीक्षा की तो पाया कि जिला पंचायत को छोड़ दिया जाए तो विभिन्न विभागों में शिकायतों के निराकरण की प्रगति काफी कमजोर है। हालात यह हैं कि कई विभागों में एल-1 स्तर पर शिकायतों को देखा ही नहीं जा रहा। इससे वे ऊपर तक जा रही हैं। इस पर उन्होंने एक नवाचार की शुरुआत की है। जिस तरह से शासन स्तर पर सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा करते हुए चिह्नित लंबित शिकायतों को जनाधिकार कार्यक्रम में लाया जाता है और उसकी सीधी समीक्षा मुख्यमंत्री करते हैं, उसी तरह जिले में भी कलेक्टर जिला स्तरीय जनाधिकार कार्यक्रम की शुरुआत कर रहे हैं। इसमें जिला स्तर पर लंबित सीएम हेल्पलाइन में कुछ प्रकरणों को चिह्नित कर उनकी समीक्षा स्वयं कलेक्टर करेंगे।
ऐसा होगा कार्यक्रम
जिले के विभिन्न विभागों में लंबित सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों में से अलग-अलग विभागों की समस्याओं में से रेंडम तरीके से 20 शिकायतों का चिह्नांकन किया जाएगा। शिकायतों को टीएल बैठक के पहले संबंधित विभाग प्रमुख को निराकरण के लिए दिया जाएगा। इसका तय समय अवधि में निराकरण कर विभाग प्रमुख अपना जवाब प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद निराकृत शिकायतों की समीक्षा प्रत्येक सोमवार को टीएल बैठक के बाद जिला स्तरीय जनाधिकार कार्यक्रम में कलेक्टर स्वयं करेंगे। इसमें लापरवाही अथवा गलत निराकरण पाने पर संबंधितों पर कार्रवाई की जाएगी।
यह जारी किए निर्देश
कलेक्टर ने जिलास्तरीय जनाधिकार कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए कि चयनित शिकायतों का निराकरण सभी जिलाधिकारी शुक्रवार 12 बजे तक उपलब्ध कराएंगे। मामले में लापरवाह शासकीय सेवक के विरुद्ध कार्रवाई प्रस्तुत करेंगे। सोमवार को टीएल के बाद इनमें से सुनवाई के लिए चयनित शिकायतों पर वीसी से तहसील स्तर पर सुनवाई की जाएगी। मामले मे फील्ड स्टाफ को गंभीरता से काम करने कहा गया है। निर्देशित किया गया कि सीएम हेल्पलाइन में फील्ड स्टाफ गंभीर नहीं रहता है। ऐसे में अगर वह दोषी पाया जाता है तो संबंधित पर कार्रवाई तय है।
पहली बार ये मामले चयनित
पहले जिला स्तरीय जनाधिकार कार्यक्रम में सामाजिक न्याय विभाग की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का लाभ न मिलना, स्वास्थ्य विभाग की प्रसूति सहायता से वंचित रखना, जननी सुरक्षा योजना का लाभ न मिलना, पीएचई का हैंडपंप में सुधार न होना, लीड बैंक संस्थागत वित्त के तहत हितग्राही को लोन न मिलना, राजस्व विभाग में खसरा खौतानी न मिलना, नामांतरण नहीं होना, गलत नामांतरण करना, प्राकृतिक आपदा की राहत राशि न देना, पीएचई की नल जल योजना का प्रारंभ न होना, खाद्य आपूर्ति विभाग की उपार्जन के बाद भुगतान नहीं होना तथा कृषि विभाग की फसल बीमा का लाभ न मिलने की शिकायतें शामिल की गई हैं।
आईटी सेल गठन के निर्देश, उत्तरा का प्रशिक्षण
लोगों की जनसुनवाई सहित अन्य शिकायतों के निराकरण के लिए भी कलेक्टर ने नवाचार करते हुए एनआईसी को आईटी सेल गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही शिकायतों के निराकरण की आनलाइन प्रणाली उत्तरा की भी शुरुआत करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। सभी विभाग प्रमुखों और उनके एक आपरेटर को उत्तरा साफ्टवेयर का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए हैं। इस व्यवस्था में अब हर शिकायत का निराकरण निगरानी में रहेगा और कलेक्टर स्वयं उसकी मॉनीटरिंग कर सकेंगे। कलेक्टर की इस पहल से लापरवाह अधिकारियों कर्मचारियों में हड़कम्प मच गया है।
Published on:
27 Feb 2020 01:56 am
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