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satna: 68 की उम्र में प्यार हुआ और 58 साल की ‘लड़की’ से रचा ली शादी

सतना जिले में इस उम्र में विवाह का पहला मामला राज्य मंत्री ने नव दांपत्य प्रवेश पर दी शुभकामनाएं

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satna: 68 की उम्र में प्यार हुआ और 58 साल की 'लड़की' से रचा ली शादी

satna: fell in love at the age of 68 and married a 58 year old girl

सतना। रामनगर में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह सम्मेलन दो बुजुर्गों के विवाह के बाद चर्चा में है। इस सम्मेलन में 68 वर्षीय भगवानदीन गोड़ और 58 वर्षीय मोहनिया ने सात फेरे लेकर दांपत्य जीवन में बंध गए। इस विवाह के साक्षी बने राज्य मंत्री रामखेलावन पटेल ने कहा कि हम लोग पढ़ते थे कि नेल्सन मंडेला ने जेल से छूट कर 78 वर्ष की उम्र में शादी की थी। अब यहां हमने इन बुजुर्गवारों को दांपत्य जीवन में बंधते देखा है। यह सुखद अनुभव है और सरकार की मदद से यह सब संभव हो सका है।

एक ही गांव में अलग-अलग घरों पर था निवास

जनपद पंचायत रामनगर की ग्राम पंचायत देवरी निवासी भगवानदीन गोड़ पिता लहरी अपनी पत्नी की मौत के बाद लगभग 30 सालों से अकेले जीवन गुजर बसर कर रहे थे। 68 वर्ष की उम्र हो चुकी है और घर में उनके कोई नहीं है ऊपर से वे 85 फीसदी अस्थि बाधित विकलांग भी हैं। इसी गांव में इनके घर से कूछ दूर 58 वर्षीय मोहनिया गोड़ पिता रामजियावन भी अपने घर में अकेले रहती थीं। वे अब तक अविवाहित ही रही हैं। उम्र के इस पड़ाव में अकेले गृहस्थी चलाना न केवल मुश्किलों भरा था बल्कि एक साथी की जरूरत महसूस हो रही थी। ऐसे में दोनों ने विवाह करने का निर्णय लिया।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह सम्मेलन से की शादी

इसी दौरान रामनगर जनपद मुख्यालय में मुख्यमंत्री विवाह सम्मेलन का आयोजन तय हुआ। इन दोनों ने सम्मेलन के जरिये विवाह का आवेदन किया। इस उम्र के वर वधु के आवेदन देख कर पहले तो सरकारी अफसरों के कान खड़े हुए। फिर नियम खंगाले गए कि इनका विवाह कराया जा सकता है या नहीं। इसके बाद पाया गया कि विवाह में कोई अड़चन नहीं है। लिहाजा सम्मेलन में इनके विवाह का निर्णय लिया गया। इस अनोखे विवाह की जानकारी मिलने पर गांव वालों ने भी आगे बढ़ कर सहयोग किया। दोनों ने विवाह के बाद कहा कि हम लोग एक दूसरे को काफी पहले से जानते थे। अब एक दूसरे का सहारा बनेंगे।

गोद में आए गाड़ी में गए

भगवानदीन 85 फीसदी अस्थि बाधित विकलांग हैं। लिहाजा आसानी से चल फिर नहीं सकते। लिहाजा विवाह के लिए तैयार किए गए सरकारी मंडप तक उन्हें गोद में उठा कर लाया गया। विवाह के बाद वर-वधु को वाहन से उनके घर तक छोड़ा गया। इस दौरान उन्हें प्रशासन की ओर से तमाम उपहार और गृहस्थी का सामान भी दिया गया है।