20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सतनाः सरकारी अतिथियों पर सालाना 1 करोड़ का खर्च

प्रोटोकॉल प्राप्त नेता-अधिकारियों पर पानी की तरह बहाया जा रहा पैसा

3 min read
Google source verification
circuit.jpg

सतना। प्रोटोकॉल प्राप्त जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और न्यायिक सेवा से जुड़े लोगों के सत्कार में शासन पानी की तरह पैसे बहाता है। सतना में यह आतिथ्य सत्कार सालाना एक करोड़ रुपए के लगभग होता है। अगर वीवीआइपी प्रोटोकॉल वाले जनप्रतिनिधि का दौरा हो जाता है तो यह व्यय और बढ़ जाता है। हालांकि इसमें इन प्रोटोकॉलधारी वीआइपी के सर्किट हाउस में रुकने के दौरान उनके खाने-पीने में होने वाला व्यय शामिल नहीं है। यह खर्चा जिला मुख्यालय और इससे लगे हल्कों के पटवारी उठाते हैं। सतना में पिछले तीन माह में ही 58.56 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। इसमें सबसे ज्यादा खर्च वाहन व्यय में लगता है। अधिकारी बताते हैं कि ऐसा व्यय हर साल नहीं होता है। यह चुनावी साल था, लिहाजा वीवीआइपी दौरे ज्यादा होने से इस बार खर्च बढ़ा है।

कलेक्टर ने मांगी राशि

सतना जिले से वित्तीय वर्ष 2023-24 में आतिथ्य व्यय में जो खर्च हुआ है वह राशि शासन से मांगी गई है। प्रमुख राजस्व आयुक्त से कलेक्टर कार्यालय ने 1 जून से 30 सितंबर तक हुए व्यय के लंबित भुगतान के लिए राशि की मांग की है। यह व्यय 58.56 लाख रुपए है। इन तीन महीनों के व्यय के आधार पर यह माना जा सकता है कि इस वित्तीय वर्ष में आतिथ्य व्यय एक करोड़ के आंकड़े को छू गया है।

अधिकारी यह गिनाते हैं कारण

नाम न छापने की शर्त पर सत्कार से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि मैहर, चित्रकूट, वाइट टाइगर सफारी होने के कारण यहां प्रदेश सहित अन्य प्रदेश के प्रोटोकॉलधारी वीआइपी का आना जाना लगा रहता है। इसके अलावा राजनीतिक दृष्टि से भी यह जिला संवेदनशील होने से प्रोटोकॉल धारी जनप्रतिनिधियों का आना लगा रहता है। पन्ना जाने वाले जनप्रतिनिधि और प्रोटोकॉल धारी अधिकारी भी यहीं रुक कर आगे का सफर करते हैं। मुंबई हावड़ा मेन लाइन का मुख्य स्टेशन होने के कारण यहां ज्यादातर वीआइपी आते और रुकते हैं। लिहाजा व्यय अन्य जिलों की तुलना में ज्यादा होता है।

चुनावी साल की वजह से खर्च ज्यादा

यह चुनावी वर्ष रहा है। लिहाजा राजनीतिक गतिविधियां और उससे जुड़े कार्यक्रम काफी संख्या में हुए। वीवीआइपी मूवमेंट भी ज्यादा हुए, लिहाजा इस वर्ष अन्य वर्ष की तुलना में खर्च ज्यादा हुआ है। वाहन व्यवस्था से जुड़े अधिकारी और वाहन उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों के संचालकों के अनुसार इस बार जिस तरीके से पीएम और केन्द्रीय गृह मंत्री के दौरे सतना जिले में हुए हैं उसमें काफी व्यय हुआ है। फिर प्रदेश के मंत्री और सीएम के दौरे के दौरान भी व्यय बढ़ता है।

रीवा हवाई पट्टी भी कारण

रीवा जिले में हवाई पट्टी निर्माणाधीन है। लिहाजा ज्यादातर प्रोटोकॉलधारी जनप्रतिनिधि सतना हवाई अड्डे का उपयोग कर यहां से वाहन द्वारा रीवा जाते हैं। ऐसे में उन पर भी अतिरिक्त खर्च होता है।

सर्किट हाउस का व्यय पटवारियों पर

वाहन व्यय को छोड़ दिया जाए तो जो भी प्रोटोकॉलधारी वीआइपी सर्किट हाउस में रुकता है उसके भोजन, पानी का खर्चा जिला मुख्यालय और इससे लगे पटवारी उठाते हैं। इसके लिए बकायदे उनके दिन तय किए गए हैं। एक साल में मोटे तौर पर एक पटवारी 50 हजार से एक लाख रुपए तक सत्कार में अपनी ओर से खर्च करता है। इन पटवारियों के सर्किट हाउस के सत्कार की व्यवस्था देखने के लिए बकायदे दिन निर्धारित हैं। सोमवार को डिलौरा हल्का, मंगलवार को घूरडांग हल्का, बुधवार को कृपालपुर हल्का, गुरुवार को कोलगवां और बरदाडीह हल्का, शुक्रवार को अमौंधा हल्का, शनिवार को सतना और धवारी हल्का तथा रविवार को बगहा और महदेवा हल्के के पटवारी सत्कार की व्यवस्था देखते हैं।

होटल का व्यय अधिकारी

इससे इतर अगर कोई प्रोटोकॉल धारी किसी होटल में रुकता है तो उस पर होने वाले खर्च की जिम्मेदारी संबंधित विभागीय अधिकारी की होती है।