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satna: फैक्ट्रियों को जमीन दिलाने कानून विरुद्ध भू-अर्जन कर छीन रहे किसानों की जमीन

मैहर में बिना धारा 4 व 6 का प्रकाशन किये धारा 11 में फैक्ट्री को आरक्षित कर दी जमीन सामाजिक समाघात व 80 फीसदी भू स्वामियों से राय की अनदेखी कर किसानों का हक छीना

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satna: फैक्ट्रियों को जमीन दिलाने कानून विरुद्ध भू-अर्जन कर छीन रहे किसानों की जमीन

Satna: Illegal land acquisition for factories

सतना। जिले में फैक्ट्रियों को लाभ पहुंचाने के लिए कानून के खिलाफ भू-अर्जन कर किसानों की जमीन छीनी जा रही है। किसानों और आमजनों की जमीनों का शासकीय और निजी प्रयोजन के लिए भू-अर्जन करने के लिये वर्तमान मे 'भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013' लागू है। इस अधिनियम के तहत निजी कंपनियों के लिए अर्जन की दशा में प्रभावित परिवारों के कम से कम अस्सी प्रतिशत परिवारों की पूर्व सहमति अनिवार्य है। इसके लिए धारा 4 व धारा 6 का प्रकाशन किया जाता है। लेकिन सतना जिले में निजी कंपनियों के हित में प्रशासन द्वारा ऐसा न करते हुए सीधे धारा 11 का प्रकाशन कर किसानों की जमीन ली जा रही है। मामला सामने आने के बाद जिम्मेदार इस पर चुप्पी साध लिए हैं।

मैहर के सढ़ेरा में हुआ खेल

हालिया मामला मैहर तहसील के ग्राम सढ़ेरा का है। यहां पर निजी कंपनी आरसीसीपीएल प्राइवेट लि. के चूना पत्थर खनन के लिये निजी लोगों की जमीन की आवश्यकता है। अधिनियम के तहत नियमानुसार सामाजिक समाघात का निर्धारण करने के लिए धारा 4 का प्रकाशन किया जाना था। इसके तहत पंचायत स्तर पर संबंधितों से परामर्श करना शामिल होगा। यह प्रक्रिया 6 माह में पूरी करनी थी। इसके बाद धारा 6 का प्रकाशन किया जाना था। जिसमें सामाजिक समाघात निर्धारण अध्ययन का प्रकाशन किया जाना था। जिसमें सामाजिक समाघात प्रबंध की योजना तैयार कर इसे पंचायत, एसडीएम कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय. तहसील कार्यालय में उपलब्ध कराने के साथ ही इसे वेबसाइट में भी प्रदर्शित किया जाना था। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।

धारा 11 के तहत सीधे लगा दिए किसानों पर प्रतिबंध

सढ़ेरा में निजी कंपनी को चूना पत्थर खनन के लिए आवश्यक 4.686 हैक्टेयर जमीन देने के लिए अधिनियम की धारा 11 का सीधे प्रकाशन कर दिया गया। जिसमें किसी भी व्यक्ति के लिए इन जमीनों पर किसी भी प्रकार के संव्यवहार (लेनदेन) पर प्रतिबंध लगा दिया गया। अर्थात अब इन जमीनों के भूमि स्वामी अपनी ही जमीन किसी को क्रय विक्रय नहीं कर सकेंगे।

किसानों के छूटे पसीने

धारा 11 के प्रकाशन की जानकारी जब सढ़ेरा की संबंधित जमीनों के भू-स्वामी किसानों को पता चली तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन फानन में इनके द्वारा आपत्ति लगाई गई है। ऐसे ही प्रभावित किसान सलिल तिवारी ने बताया कि यहां प्रशासन फैक्ट्री को लाभ दिलाने के लिये नियम विरुद्ध तरीके से हमारी जमीनों का भू-अर्जन कर रहा है। जो भू-अर्जन कानून के विपरीत है।

भू-अर्जन कार्यालय से हुआ खेल

उधर मैहर तहसील कार्यालय की माने तो उनके यहां से कुछ नहीं हुआ है। जो भी हुआ है जिला भू-अर्जन कार्यालय से हुआ है। वहां का लिपिकीय स्टाफ या तो गलत किया है और अधिकारियों को गुमराह कर गलत प्रक्रिया करवा रहा है या फिर जिले के अधिकारी ही गलत कर रहे हैं। लेकिन मामले को गंभीर बताया है। फैक्ट्री के लिए किसान हितों की अनदेखी करने वाली इस अनियमितता का दोषी कौन है यह तो जांच के बाद ही साफ होगा लेकिन यह तो सामने आ गया है कि खेल बड़ा चल रहा था।

'' हमारे द्वारा भू-अर्जन नहीं किया गया है। जिला भू-अर्जन कार्यालय से प्रक्रिया की कई है। हमसे रिपोर्ट मांगी गई है। इससे ज्यादा हमें जानकारी नहीं है।'' - धर्मेन्द्र मिश्रा, एसडीएम मैहर

'' मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। प्रथम दृष्टया ऐसा होना नहीं चाहिए। इसकी जांच कराई जाएगी। अगर नियम विरुद्ध प्रक्रिया हुई होगी तो उसे निरस्त किया जाएगा। ''- अनुराग वर्मा, कलेक्टर