
सतना। रामनगर तहसील के कैथहा गांव में जमीन का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां बाणसागर परियोजना के लिए अधिग्रहीत जमीनें जो शासकीय दर्ज थी, साजिश पूर्वक निजी दर्ज कर दी गई हैं। अब इन जमीनों पर जब परियोजना के कार्य होने हैं तो कथित भू-स्वामी न केवल कार्य में बाधा डाल रहे हैं बल्कि कई लोग जमीनें निजी होने के बाद निर्माण कार्य करना शुरू कर दिये हैं। हद तो यह है कि इस मामले में सुधार के लिए तमाम पत्राचार के बाद भी अभी तक कोई सुधार नहीं हुआ है।
भू-अर्जन के बाद दर्ज हुई थीं शासकीय
जानकारी के अनुसार रामनगर तहसील के कैथहा गांव की विभिन्न भूमियां बाणसागर परियोजना द्वारा अधिग्रहीत की गई थीं। इसके बाद तत्कालीन तहसीलदार रामनगर ने 04-05 में इन जमीनों को शासकीय दर्ज किया था। समय समय पर जब भी परियोजना स्तर पर जमीन के जो अभिलेख राजस्व विभाग से प्राप्त किए जाते रहे हैं उसमें ये जमीनें शासकीय दर्ज थी। वर्ष 2009-10 के पंचशाला खसरे में ये सभी जमीनें म.प्र. शासन जल संसाधन विभाग दर्ज रही हैं। लेकिन अब पाया जा रहा है कि कुछ लोगों ने इन सरकारी जमीनों को पुन: निजी दर्ज करा लिया गया है। जिससे राजस्व विभाग के पोर्टल में ये जमीनें निजी भूमि प्रदर्शित हो रही हैं।
अब शुरू हुआ अतिक्रमण
इस फर्जीवाड़े की जानकारी तहसीलदार रामनगर, एसडीएम रामनगर और कलेक्टर को देते हुए कार्यपालन यंत्री बाणसागर पक्का बांध संभाग क्रमांक 3 ने बताया है कि इन जमीनों पर पुराने काश्तकारों ने अतिक्रमण करते हुए निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। जब यहां अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की जाती है तो इनके द्वारा अपनी निजी भूमि होने का अभिलेख प्रस्तुत कर कार्यवाही में व्यवधान डाला जाता है। कार्यपालन यंत्री ने कलेक्टर को लिखे पत्र में यह भी बताया है कि रामनगर तहसीलदार और एसडीएम रामनगर को विभिन्न पत्रों के माध्यम से लगातार लेख किए जाने के बाद भी इन जमीनों को म.प्र. शासन जल संसाधन विभाग के नाम नहीं किया जा रहा है।
1975-76 में हुआ था भू-अर्जन
जानकारी के अनुसार इन जमीनों का भू-अर्जन वर्ष 1975-76 में किया गया था। इस दौरान लगभग 75 एकड़ जमीन का अर्जन किया गया था। बाद में 2004 में इन जमीनों का नामांतरण म.प्र. शासन जल संसाधन विभाग के नाम किया गया था।
इस तरह हुआ खेल
विभागीय जानकारों के अनुसार पहले हस्त लिखित खसरे चला करते थे। वर्ष 2012-13 में निजी एजेंसी के माध्यम से इन खसरों को कम्प्यूटरीकृत किया गया था। उसी दौरान तत्कालीन पटवारी की मिली भगत से इन सरकारी जमीनों को वापस निजी दर्ज कर दिया गया।
'' प्रकरण के संबंध में कलेक्टर को अवगत कराया गया है। एसडीएम को भी पत्र भेजे गए हैं। आश्वस्त किया गया है कि जल्द ही इन जमीनों को शासकीय दर्ज किया जाएगा।'' - पीके त्रिपाठी, ईई बाणसागर पक्का बांध
'' मामला हमारे संज्ञान में नहीं है। अभी संबंधित पत्र वरिष्ठ कार्यालय से मुझे नहीं मिला है। पुराने पत्राचार की अगर बात है तो अगले दिन कार्यालय में चेक करवाएंगे। अगर गलत दर्ज हुई है तो उनमें सुधार किया जाएगा।''- रोशनलाल रावत, नायब तहसीलदार झिन्ना वृत्त
Published on:
28 Jul 2023 10:18 am
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