
School ready to grab retarded children's scholarship
सतना. महिलाओं एवं बालकों के कल्याण संबंधी समिति ने जिले की निजी संस्था द्वारा संचालित किये जाने दिव्यांग बच्चों के स्पेशल विद्यालय के लिये जिस तरीके की सिफारिश कर दी है उसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है। समिति ने अपने प्रतिवेदन में यह लिखा है कि विद्यालय के बच्चों को जो छात्रवृत्ति शासन द्वारा दी जा रही है उसे बच्चों को न दिया जाकर विद्यालय प्रबंधन को दिया जाए। हद तो यह है कि यह रिपोर्ट समिति ने 26 जून 2018 को भाजपा सरकार के समय विधानसभा के पटल पर प्रस्तुत की है। इसके बाद इस रिपोर्ट के अनुसार जिला प्रशासन ने जानकारी तलब की गई है।
मिली जानकारी के अनुसार महिलाओ एवं बालकों के कल्याण संबंधी समिति ने महिलाओं एवं बालकों के कल्याण संबंधी योजनाओं की हकीकत जानने के लिये रीवा एवं शहडोल संभाग का अध्ययन दौरा किया। इसके बाद समिति ने महिला बाल विकास विभाग एवं सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग के साथ संयुक्त चर्चा की। इसके बाद अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
स्नेह सदन पतेरी का लिया जायजा
बताया गया है कि समिति ने 7 सितंबर 2017 को शहर के पतेरी स्थित स्नेह सदन स्पेशल स्कूल का जायजा लिया। इस दौरान स्नेह सदन प्रबंधन द्वारा बताया गया कि सामाजिक न्याय एवं नि:शक्त कल्याण विभाग की ओर से मानसिक रूप से अविकसित एवं बहुविकलांग बच्चों को 500 रुपये, मूकबधिर बच्चों को 300 रुपये प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 50 रुपये प्रतिमाह की दर से 10 माह के लिये 500 रुपये एकमुश्त नि:शक्त छात्रवृत्ति एवं 180 रुपये परिवहन व्यय प्रतिमाह छात्र को दिया जाता है।
प्रतिमाह विद्यालय लेता है शुल्क
समिति को स्नेह सदन प्रबंधन ने यह भी बताया कि स्नेह सदन स्पेशल स्कूल को समरिटन एजुकेशन सोसायटी द्वारा संचालित किया जाता है। संस्था की स्थापना 1999 में की गई थी। 2008 से संचालन प्रारंभ किया गया है। इस संस्था में कक्षा एक से 10 तक विशेष शिक्षा प्रदान की जाती है। स्कूल की क्षमता है। छात्रों के अभिभावकों ने 350 रुपये का शुल्क बसों के लिए लिया जाता है। साथ ही निराश्रित निधि से भी संस्था को सहायता मिल रही है। समाज सेवा के नाम पर चल रहे इस स्कूल के प्रबंधन ने समिति के सामने एक चौंकाने वाला प्रस्ताव रखा कि छात्रों को आने वाली छात्रवृत्ति सीधे बच्चों के खाते में न जाकर यदि संस्था के खाते में जमा होगी तो उस राशि का सदुयपयोग होगा।
और समिति ने कर दी अनुशंसा
समिति की तत्कालीन सभापति ऊषा ठाकुर और समिति सदस्य शीला त्यागी ने स्कूल प्रबंधन की मांग का न केवल पक्ष लिया बल्कि यह अनुशंसा कर दी कि शासन से प्राप्त होने वाली छात्रवृत्ति छात्रों के खाते में जमा न की जाकर स्कूल के खाते में जमा की जाए।
अब उप संचालक ने जानकारी तलब की
समिति द्वारा की गई अनुशंसाओ के बाद अब शासन ने उप संचालक सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण से इस परिप्रेक्ष्य में जानकारी तलब की है। उधर छात्रों की छात्रवृत्ति संस्था को दिलाने की अनुशंसा को लेकर विरोध की भी स्थितियां बनने लगी है। जनसामान्य का कहना है कि यह छात्रवृत्ति छात्र हितों के लिये दी जाती है न की संस्था के सुचारू संचालन के लिये। संस्था सेवा भाव से जब चलाई जा रही है तो उसे कोई हक नहीं है कि वह बच्चों की छात्रवृत्ति को अपने संचालन के लिये मांग करे। अगर ऐसा किया जाता है तो यह सीधे व्यावसायिक गतिविधियों में माना जाएगा और छात्रों के हितों पर कुठाराघात होगा। बताया जा रहा है कि संस्था को विदेशों से भी समाजसेवा के नाम पर राशि प्राप्त होती है।
Published on:
29 May 2019 12:46 am
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