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SATNA: जिला बोर्ड का पांचवी का कथित अंग्रेजी का पेपर बाजार पहुंचा, जिम्मेदारों ने मामले में साधी चुप्पी

4 मार्च को नागौद उत्कृष्ट विद्यालय में बंट गया था गलत पेपरहिन्दी की जगह बच्चों को बांट दिया गया था अंग्रेजी का पेपर बाहर आए अंग्रेजी पेपर के प्रश्न, विद्यालयों में बच्चों को बताए जा रहे प्रश्न

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The fifth board's alleged English paper reached the market

The fifth board's alleged English paper reached the market

सतना. जिले में पांचवीं बोर्ड का अंग्रेजी का प्रश्न पत्र आउट हो चुका है। पांच मार्च को नागौद उत्कृष्ट विद्यालय में हिन्दी के प्रश्न पत्र की जगह अंग्रेजी का प्रश्न पत्र निकलने और बच्चों को बांटे जाने के बाद ज्यादातर प्रश्न सामने आ चुके हैं। लेकिन विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते इसे आधिकारिक रूप से आउट घोषित नहीं किया जा रहा है। जबकि ये प्रश्न जिले भर के विद्यालयों में पहुंच चुके हैं और यहां के शिक्षक अपने बच्चों को इन्हें बता चुके हैं। हालांकि जिला शिक्षाधिकारी प्रश्न पत्र आउट होने की बात से इंकार करते हुए यह कह रहे हैं कि प्रश्न पत्र बच्चों तक नहीं पहुंचे थे।

मिली जानकारी के अनुसार 4 मार्च को उत्कृष्ट विद्यालय नागौद में कक्षा पांचवी की हिन्दी विषय की परीक्षा थी। यह विद्यालय प्राथमिक शाला बराज, प्रा.शा. बारापत्थर, प्रा.शा. पिपरी और प्राथमिक शाला बालक नागौद का परीक्षा केन्द्र है। 4 मार्च को जब यहां हिन्दी प्रश्न पत्र का पैकेट खोल कर बच्चों को बांट दिया गया तो बाद में बच्चों ने बताया कि यह तो हिन्दी का पेपर नहीं है बल्कि अंग्रेजी का पेपर है। लिहाजा आनन फानन में अंग्रेजी का पेपर वापस लेकर फिर उन्हें हिन्दी के पेपर दिये गए। पैकेट में गलत प्रश्न पत्र होने के मामले में केन्द्राध्यक्ष स्तर पर लापरवाही होने और स्थिति बिगडऩे को लेकर मामले को पूरी तरह दबा दिया गया। जबकि इस दौरान लगभग 10 मिनट तक बच्चों के हाथ में पेपर रहा। अब इस अंग्रेजी के प्रश्नपत्र के ज्यादातर प्रश्न बाहर तक आ चुके हैं और जिले के ज्यादातर विद्यालयों में पहुंच चुके हैं। ऐसे में परीक्षा की गोपनीयता पूरी तरह से भंग होने की बात सामने आ रही है। हालांकि इस मामले में डीईओ का दावा है कि कोई भी प्रश्न आउट नहीं हुआ है लिहाजा पेपर आउट होने जैसी बात नहीं है।

ये प्रश्न बाहर तक पहुंचे

बताया गया है कि नागौद विद्यालय में अंग्रेजी का जो प्रश्न-पत्र बंटने की बात सामने आ रही है, उसके कथित प्रश्न अब खुले बाजार में पहुंच गए हैं और लोगों को बेचे भी जा रहे हैं। कई विद्यालयों में भी ये प्रश्न विद्यालय के शैक्षणिक अमले द्वारा अपने यहां के बच्चों को अभ्यास कराए जा रहे हैं। इसमें ललिता का पैसेज देते हुए उसके प्रश्न का उत्तर लिखने का सवाल शामिल हैं। बीमारी पर आवेदन और स्कूल पर निबंध का प्रश्न भी शामिल है। अन्य प्रश्न में व्हाट इज द सिम्पलेस्ट वे टू पे थैंक्स टू गॉड, हू वाज वॉकिंग अलांग घाट्स, हू आस्क्ड नरेन्द्र टू फेस द मंकी, वाट इज मल्टीमीडिया लेसन, वाट वाज द नेम ऑफ लीलाज ब्रदर, वाट इज ए नेस्ट मेड ऑफ, हू वोक अप द सीड, वेन डिड लाल बहादुर शास्त्री बिकम द प्राईमिनिस्टर ऑफ इंडिया, वाट वाज महेश्वर नॉन ऐज इन एन्सियेन्ट हिस्ट्री, व्हेन डू वी सेलीब्रेट दीवाली आदि शामिल है। पत्रिका अभी इनके वास्तविक होने की पुष्टि नहीं कर रहा है। लेकिन इसकी सत्यता अंग्रेजी के प्रश्र पत्र खुलने पर सामने आ जाएगी।

यह हुआ था उस दिन घटनाक्रम
विभागीय जानकारों का कहना है कि 4 मार्च को केन्द्राध्यक्ष ने निर्देशों के विपरीत पैकेट सीधे पर्यवेक्षकों को दे दिए थे और पर्यवेक्षकों ने पैकेट खोल कर सीधे बच्चों को बांट दिये। जबकि नियमानुसार केन्द्राध्यक्ष को पहले पैकेट से प्रश्रपत्र निकालकर आधा निकाल कर देखना चाहिए था। अगर गलत प्रश्न पत्र निकलता है तो उसे वापस अंदर रख कर पैकेट बंद करना चाहिए। यहां केन्द्राध्यक्ष उत्कृष्ट विद्यालय नागौद में वर्ग 1 के उच्च श्रेणी शिक्षक हैं और पर्यवेक्षक के रूप में माध्यमिक चंदकुइया के राम प्रताप गुप्ता और नवीन हाईस्कूल नागौद की गायत्री सिंह की ड्यूटी थी। जब प्रश्न पत्र बच्चों तक पहुंचे तो उन्होंने खोल कर देखना शुरू किया जब बच्चों को समझ में आया तो उन्होंने पर्यवेक्षक को बताया। तब जाकर मामला केन्द्राध्यक्ष तक पहुंचा और आनन फानन में प्रश्न-पत्र वापस लिये गए और उन्हें अंदर किया गया।