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Tiger Mating Time: मेटिंग के लिए बस्ती में पहुंचे बाघ-बाघिन, डर से लोगों की सांसें अटकीं

Tiger Mating Time: मेटिंग के लिए पन्ना की बाघिन और एक बाघ सोमवार को मझगवां रेंज के पिपरीटोला बीट के जंगल के समीप एक बस्ती में पहुंच गए, तो डर के मारे लोगों की सांसें हलक में अटक गईं। होश उड़ गए और वे इतनी दहशत में आ गए कि रात भर घरों से बाहर ही नहीं निकले।

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सतना

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Sanjana Kumar

Dec 20, 2023

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Tiger Mating Time: मेटिंग के लिए (Tiger Mating Time) पन्ना की बाघिन और एक बाघ सोमवार को मझगवां रेंज के पिपरीटोला बीट के जंगल के समीप एक बस्ती में पहुंच गए, तो डर के मारे लोगों की सांसें हलक में अटक गईं। होश उड़ गए और वे इतनी दहशत में आ गए कि रात भर घरों से बाहर ही नहीं निकले। घबराहट इतनी थी कि इस जोड़े को बस्ती से बाहर खदेड़ने के लिए आए वनकर्मी भी बाघ (Tiger Mating Time) की दहाड़ सुनते ही तुरंत भागकर अपने वाहन में जा दुबके रहे।

पिपरीटोला बीट के जंगल से लगी अमिरती कालोनी बस्ती में इस जोड़े की दस्तक रात करीब साढ़े नौ बजे हुई। जमाहिर कोल के घर के पीछे वाले आलू के खेत में बाघ-बाघिन (Tiger Mating Time) को देखकर ग्रामीणों के होश उड़ गए। जमाहिर की पत्नी लकड़ी लेने के लिए घर से बाहर निकली, तो बाघ की घुर्राहट ने उसे पसीने-पसीने कर दिया और वह उलटे पांव घर की ओर भाग निकली। बाद में पटाखा फोड़ कर बाघ-बाघिन को भगाया गया। पर रात बारह बजे फिर ग्रामीणों ने पाया कि बाघ-बाघिन बस्ती में ही हैं। सूचना पर वन टीम मौके पर पहुंची, लेकिन उसके लिए बाघ-बाघिन को भगाना संभव नहीं था। मेटिंग (Tiger Mating Time) के कारण बाधा पहुंचने पर बाघों के खतरनाक हो जाने और हमले की आशंका बढ़ जाने के कारण टीम के लिए उस समय पटाखा फोड़ना भी खतरे से खाली नहीं था। इसलिए टीम ने भी कुछ नहीं किया। रात करीब साढ़े तीन घटे बाद 3.30 बजे बाघ-बाघिन कालोनी बस्ती से निकलकर 100 मीटर दूरी पर लोहासिन स्थल पर पहुंच गए। इसके बाद यही इनका ठिकाना बना रहा। इस दौरान बस्तीवासी पूरी रात दहशत में घरों में ही दुबके रहे।

वर्जन
बाघ-बाघिन मेटिंग (Tiger Mating Time) कर रहे हैं। इसमें वे दो-तीन दिन साथ रहेंगे। दिसंबर से मार्च तक की अवधि बाघों के प्रजनन के लिए बहुत अनुकूल होती है। बाघ इस समय मिलन करते हैं। इस दौरान दखलअंदाजी पर यह जीव बहुत ही संवेदनशील हो जाता है, एकांत पसंद करता है। इससे दूर ही रहना हितकर होता है।
- पंकज दुबे, रेंजर, मझगवां