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सतना. ट्रैकमैन अपने सहायक के साथ शुक्रवार-शनिवार की रात चितहरा-मझगवां रेललाइन के बीच पेट्रोलिंग कर रहा था। रिपीटर पोस्ट 160 के पास दोनों पहुंचे ही थे कि पुल के पास से बाघिन के गुर्राने की आवाज आई। टॉर्च की रोशनी से देखा तो दोनों के होश उड़ गए। बाघिन अपने दो शावकों के साथ रेल ट्रैक पर मौजूद थी। दोनों किसी तरह मौके से जान बचाकर चितहरा स्टेशन की आेर भागे। दोनों उस वक्त घबरा गए जब बाघिन अपने शावकों के साथ उनका पीछा करने लगी। किसी तरह दोनों दौड़ते-भागते चितहरा स्टेशन पहुंचे। घबराए कर्मचारियों ने मामले की सूचना स्टेशन मास्टर, मेट सहित एसएसई को दी। इधर, दोनों कर्मचारी स्टेशन मास्टर को मामले की जानकारी दे ही रहे थे कि सतना की ओर आ रही कामाख्या एक्सप्रेस के चालक ने भी बाघिन और दो शावकों के मूवमेंट की सूचना चितहरा स्टेशन मास्टर को वॉकी टॉकी पर दी।
टै्रकमैन रजनीश कुमार अपने सहायक नारायण गौतम (ठेका कर्मी) के साथ रोजाना की तरह चितहरा से मझगवां के बीच रिपीटर पोस्ट 160 से 90 पर पेट्रोलिंग कर रहे थे। दोनों पेट्रोलिंग करते हुए किमी 1215/9 पर पहुंचे ही थे कि बाघिन के गुर्राने की आवाज आई। टॉर्च की रोशनी से पुल की ओर देखा तो दोनों के होश उड़ गए। सामने टै्रक पर बाघिन अपने दो शावकों के साथ मौजूद थी। दोनों किसी तरह जान बचाकर चितहरा स्टेशन की ओर भागे। बाघिन ने दोनों कर्मचारियों का यार्ड तक पीछा किया। कर्मचारियों की मानें तो शावकों की वजह से बाघिन तेज नहीं दौड़ पा रही थी। शावक नहीं होते तो बाघिन ने हमला कर दिया होता।
कामाख्या एक्सप्रेस के चालक ने भी की पुष्टि
कामाख्या से लोकमान्य तिलक टर्मिनस की ओर जाने वाली 12520 मुंबई-एलटीटी के चालक भोलेनाथ ने भी चितहरा रेलवे ट्रैक के पास रात 1:10 बजे बाघिन सहित दो शावकों के मौजूद होने की सूचना स्टेशन मास्टर और इंजीनियरिंग कंट्रोल सेक्शन को वॉकी-टॉकी पर दी।
वन विभाग ने 8 को दी थी मूवमेंट की सूचना
वन परिक्षेत्र अधिकारी वन परिक्षेत्र मझगवां ने 8 जनवरी को स्टेशन मास्टर चितहरा और मझगवां को बाघ सहित अन्य वन्य प्राणियों के मूवमेंट की सूचना दी थी। इसमें रात के समय गुजरने वाली ट्रेनों की गति कम करने और हॉर्न का उपयोग करने कहा गया था।
गुस्साए ट्रैकमैनों ने रोका काम
वन विभाग बाघ-बाघिन की चितहरा रेलवे ट्रैक के आसपास मूवमेंट होने की सूचना रेलवे को बार-बार दे रहा है। ट्रैकमैनों ने 8 जनवरी को एसएसई सतना उत्तर को भी मोबाइल पर 1215/7 पर बाघ के मूवमेंट की सूचना दी। ट्रैकमैनों ने आरोप लगाया कि एसएसई ने बिना सुरक्षा इंतजाम के ही ड्यूटी पर जाने दबाव बनाया। बाघिन के साथ शावक नहीं होते तो जान को खतरा हो सकता था। गुस्साए ट्रैकमैनों ने रात में ही अपना कामकाज रोक दिया है। सभी ट्रैकमैन टूल-डाउन कर दिया है। कर्मचारियों ने प्रबंधन से सुरक्षा बंदोस्तब करने की मांग की है।
सुरक्षा के हों पुख्ता इंतजाम
वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के शाखा सचिव मुकेश मिश्रा ने कहा कि सबसे पहले सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। इसके बाद संवेदनशील क्षेत्रों में कर्मचारियों से काम लिया जाए। कर्मचारियों की जान को जोखिम में नहीं डाला जाना चाहिए। सचिव ने चेतावनी दी कि बिना सुरक्षा प्रबंध किए कर्मचारियों की जान को जोखिम में डाली गई तो आंदोलन किया जाएगा।
पेट्रोलिंग रोकने से यात्रियों की जान को जोखिम
जानकारों की मानें तो ठंड के मौसम में तापमान कम होने पर रेल फ्रैक्चर की आशंका अधिक रहती है। पेट्रोलिंग सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। एेसे में पेट्रोलिंग रोकना रेल यात्रियों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। रेलवे और वन विभाग के उच्च अधिकारियों समन्वय बनाकर सुरक्षा के बंदोस्त किए जाने चाहिए। एसएसई पेट्रोलिंग बंद करने या इस संबंध में कोई भी निर्णय के लिये अधिकृत नही है।

Updated on:
12 Jan 2020 02:53 am
Published on:
12 Jan 2020 02:28 am
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