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बताओ सरकार… अमरपाटन नगर परिषद का असली सीएमओ कौन?

शासन प्रशासन की अक्षमता के कारण कई महीने से बनी हुई है विवाद की स्थिति

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बताओ सरकार... अमरपाटन नगर परिषद का असली सीएमओ कौन?

Who is the real CMO of Amarpatan Municipal Council?

सतना। नगर परिषद अमरपाटन में भाजपा नीत पार्षदों द्वारा अध्यक्ष को पद से हटाए जाने की कोशिश के खुलासे के बाद अब एक नया मामला सामने आ गया है। नगर परिषद में अब सीएमओ पद को लेकर विवाद अपने चरम पर है और मामला थाने तक पहुंच गया है। एक ओर लालजी ताम्रकार खुद को यहां का सीएमओ बता रहे हैं तो दूसरी ओर तारेश शुक्ला खुद को सीएमओ बताते हुए शासकीय पत्राचार कर रहे हैं। इतना ही नहीं तारेश शुक्ला ने एक आधिकारिक पत्र लालजी ताम्रकार के खिलाफ थाना अमरपाटन भी भेज दिया है। वहीं लालजी ताम्रकार कह रहे हैं कि वे असली सीएमओ है। इसकी शिकायत उच्च स्तर पर की गई है। बहरहाल महीनों से बनी हुई यह स्थिति शासन और प्रशासन की अक्षमता उजागर कर रही है कि इतने महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद का विवाद नहीं सुलझा पा रहे हैं। अब तो पार्षद भी स्पष्ट नहीं है कि वे किसे सीएमओ मानें।

इस तरह थाने पहुंचा मामला

कार्यालय नगर परिषद अमरपाटन के लेटर हेड पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर परिषद अमरपाटन द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र थाना प्रभारी अमरपाटन को भेजा गया है। जिसमें कहा गया है कि पार्षदों ने यह शिकायत की थी कि 28 मार्च को अध्यक्ष ने पीआईसी की कई बैठक कार्यवाहियां पिछली तारीखों में लेख की हैं एवं पिछली तारीखों में कुछ पत्र जावक पंजी में इंद्राज किए हैं। इस पर समक्ष में पंजी मंगा कर अवलोकन किया गया। जावक पंजी में कई जगह क्रमांक खाली पाए गए। दिनांक 2 दिसंबर 2022 व 23 दिसंबर 2022 को दर्ज जावकों में से एक-एक जावक क्रमांक संदेहास्पद पाए गए हैं। इसमें यह भी लिखा गया है कि आवक जावक लिपिक प्रभारी के मौखिक कथन के अनुसार जावक पंजी अनाधिकृत प्रभारी सीएमओ अपने साथ न्यू रामनगर ले गए हैं। जिससे कार्यालयीन पत्रों का रिफरेंस क्रमांक के साथ जावक बाधित है। इस पत्र को थाने के अलावा प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन और आयुक्त नगरीय प्रशासन को भेजा गया है। इस पत्र पर तारेश शुक्ला के हस्ताक्षर हैं।

हमने की है शिकायत

उधर खुद को असली सीएमओ बताने वाले लालजी ताम्रकार ने कहा कि यह सब उपयंत्री तारेश शुक्ला कर रहे हैं। अनावश्यक का विवाद पैदा किए हुए हैं। इस संबंध में हमने आयुक्त और प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। कई पत्र लिख चुके हैं। लेकिन इन पत्रों पर कार्रवाई के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कुछ स्पष्ट जवाब नहीं दिया। हालांकि लालजी ने कहा कि जावक पंजी में सब कुछ सही है और मैं रामनगर सीएमओ भी हूं। लिहाजा पत्र भेजने के लिये जावक पंजी ले जाई जाती है।

मैं हूं असली सीएमओ

इधर तारेश शुक्ला ने कहा कि जिस ज्वाइंट डायरेक्टर के हस्ताक्षर से लालजी को प्रभारी सीएमओ बनाया गया है उन्हें कोई अधिकार ही नहीं है। इस अनाधिकृत प्रभार पर वे प्रमुख सचिव सहित अन्य अधिकारियों को लिख चुके हैं। पूर्व सीएमओ यहां से भारमुक्त होने के बाद वैधानिक तौर पर चालू प्रभार मुझे दे गए हैं। लिहाजा असली सीएमओ मैं ही हूं।

तो क्या कर रहे प्रमुख सचिव और अन्य अधिकारी

महीनों से लगातार दोनों अधिकारी प्रमुख सचिव से लेकर कलेक्टर को अपना-अपना पक्ष बताते हुए पत्र लिख रहे हैं। एक नगर परिषद का पूरा काम काज उलझा हुआ है। लेकिन अधिकारियों को इसकी सुध नहीं आ रही है कि मामला स्पष्ट कर सकें। यह अपनी तरह का प्रशानिक निष्क्रियता और अक्षमता का उदाहरण है। साबित हो रहा है कि प्रशासन लाचार है और शासन में निर्णय लेने की क्षमता नहीं है। यह सब वहां हो रहा है जो राज्यमंत्री रामखेलावन पटेल की विधानसभा और निज निवास है।