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दस्यु प्रभावित क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हैं ये महिला आईएएस अफसर

जिला पंचायत सीईओ ऋजु बाफना ने पत्रिका से साझा कीं अपनी प्राथमिकताएं बोलीं-चित्रकूट क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं, जरूरत है तो सिर्फ ब्रांडिंग की

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ZP CEO Riju Bafna working on big project for women self-reliance

ZP CEO Riju Bafna working on big project for women self-reliance

सतना. जिले के ग्रामीण क्षेत्र विशेषकर मझगवां और मैहर में आत्मनिर्भरता के मामले में महिलाओं की स्थिति आज भी बेहतर नहीं है। ऐसे में उन्हें स्वरोजगार के अवसर दिए जाएं तो वे अपने पैरों पर खड़े होकर विकास की नई दिशा और दशा तय कर सकती हैं। हमारा प्रयास है कि इन क्षेत्र की महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराएं जाएं। इस दिशा में हम तेजी से काम कर रहे हैं। जल्द ही यहां स्वसहायता समूह की महिलाओं को सांची दुग्ध उद्योग से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि की जाएगी। इसका ब्लू प्रिंट तैयार हो चुका है। यह बात सोमवार को पत्रिका कार्यालय में बतौर गेस्ट पहुंचीं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी ऋजु बाफना ने पत्रिका से साझा कीं। उन्होंने माना कि चित्रकूट में विकास और विस्तार की काफी संभावनाएं हैं। बस जरूरत है तो ब्रांडिंग और सुनियोजित विकास की। इस दिशा में पहल शुरू भी हो चुकी है। पुण्य सलिला मंदाकिनी को बारहमासी बनाने के लिए वाटर शेड प्रोग्राम शुरू किया है। नदी पुनर्जीवन योजना में इसे शामिल कराने के भी प्रयास शुरू किए जा चुके हैं।

प्रश्न: जिले को किस नजरिए से देखतीं हैं?
उत्तर: सतना अपने आप में चैलेंजिंग जिला है। काम करने के काफी अवसर हैं। यहां के नागरिकों को जागरूक और मोटीवेट करने की जरूरत है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास में नगरीय निकाय या राजस्व की अपेक्षा कुछ अलग चुनौतियां होती हैं। इसमें एंड टू एंड और सतत मॉनीटरिंग की आवश्यकता होती है। लोगों से सीधा संवाद विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए आवश्यक होता है। जहां तक यहां के वर्क कल्चर की बात की जाए तो अभी सुधार की जरूरत है। अन्य जिलों की अपेक्षा यहां पीछे लगना पड़ता है। हालांकि ऐसा सभी के साथ नहीं है। कई लोग काफी बढिय़ा और परिणाममूलक काम करते हैं। अगर यहां स्थिरता रहे तो निश्चित ही अधिकारी बेहतर परिणाम दे सकते हैं।

प्रश्न: कोई दो कार्य जिन पर आपका फोकस है?

उत्तर: जल संरक्षण और शिक्षा सुधार की दिशा में कार्य किए जा रहे। हालांकि इसमें तत्काल परिणाम नहीं दिखते पर सही तरीके से अगर काम किया जाए तो अच्छे रिजल्ट सामने आते हैं। इस दिशा में हम काम भी कर रहे हैं। जल संरक्षण के लिए सभी ब्लॉकों में काम लिए जा रहे तो शिक्षा की दिशा में बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम बेहतर लाने सहित लंबे समय बाद पांचवीं और आठवीं बोर्ड को देखते हुए उसकी भी विशेष तैयारी कराई जा रही। औचक टेस्ट का नवाचार किया है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

प्रश्न: अधिकारियों पर पॉलिटिकल प्रेशर को किस नजरिए से देखती हैं?
उत्तर - यह कोई गंभीर मसला नहीं। जनप्रतिनिधियों का काम होता कि वे अपनी बात रखें। इसमें अधिकारियों को चाहिए कि जितना काम नियमत: किया जा सके, करें। वो जनता से जुड़े लोग होते हैं और जैसा उन्हें बताया जाता है वैसा ही वे अधिकारियों के पास रखते हैं। ऐसे में जरूरत होती कि उन्हें सही तरीके से स्थिति स्पष्ट कर दी जाए। जहां तक मेरी बात है तो मुझे अभी पॉलिटिकल प्रेशर जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। अगर आप स्पष्ट होते हैं तो पॉलिटिकल प्रेशर की स्थिति भी नहीं बनती।

प्रश्न: जिले में अंतर विभागीय समन्वयन का अभाव है?

उत्तर- ऐसा नहीं है। विशेष कर पंचायत एवं ग्रामीण विकास के कामों में अन्य विभागों से अगर समन्वय की बात की जाए तो ऐसा नहीं है। सभी विभाग सहयोग करते हैं। कुछ समस्याएं वन विभाग के साथ जरूर होती हैं, लेकिन वह नीतिगत होने के कारण है। आधिकारिक स्तर पर कहीं भी ऐसा नहीं है।

प्रश्न: राजस्व विभाग और पंचायतीराज की कार्यशैली में क्या अंतर है?
उत्तर: राजस्व में मजिस्ट्रियल पावर होते हैं। वहां डिफाइन काम होते हैं लेकिन कोर वर्क होता है। साथ ही काम करने की तमाम संभावनाएं होती हैं। पंचायतीराज में स्पेसिफिक काम होते हैं। टारगेट के आधार पर काम करना पड़ता है। नवाचार के अवसर ज्यादा होते हैं। जनता से सीधा संवाद होने से विकास कार्यों के अवसर ज्यादा होते हैं।फंड होने से कई काम कराए जा सकते हैं।

प्रश्न: बड़े प्रोजेक्ट जिस पर काम कर रहीं हैं?

उत्तर: एनआरएलएम के तहत मझगवां क्षेत्र में महिला स्व-सहायता समूह को दुग्ध उत्पादन के लाभदायी प्रोजेक्ट से जोड़ रहे हैं। सांची से समन्वय के साथ मझगवां में चिलर प्लांट लगाया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र में नाममात्र की दर पर बिकने वाले दूध की कीमत में इजाफा होगा। ग्रामीणों का जीवन स्तर सुधरेगा। अगला प्रोजेक्ट मैहर क्षेत्र के बेरमा सहित अन्य सब्जी उत्पादक क्षेत्र में एनआरएलएम से काम किया जाना है। नकदी आय में बढ़ोतरी के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। सबसे अलग काम यह है कि नगर निगम सतना के सहयोग से स्वसहायता समूहों के उत्पादों की ब्रांडिंग और बिक्री के लिए कम्यूनिटी हॉल में दुकान ली जा रही है। वहां ये अपने उत्पाद बेच सकेंगे और बाजार से सीधे जुड़ सकेंगे। जल संरक्षण के लिए सभी शासकीय इमारतों पर वॉटर हॉर्वेस्टिंग अनिवार्य किया है। कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र तभी जारी किया जा रहा जब वॉटर हार्वेस्टिंग का काम हो जाए।

प्रश्न: प्रशासनिक सेवा का क्षेत्र क्यों चुना?
उत्तर- स्कूल-कॉलेज के वक्त से ही लगता था कि धरातल पर बदलाव लाना है। इसके लिए एक जुनून भी था। लिहाजा इस क्षेत्र को चुना। कलेक्टर के रुतबे को देखकर इस क्षेत्र का चयन नहीं किया, क्योंकि दिल्ली से पढ़ाई होने के कारण कलेक्टर जैसे पद से सामना नहीं हुआ। आईएएस में चयन होने के बाद ही कलेक्टर पद से मुखातिब हुए थे।

प्रश्न- आपके शौक क्या हैं?

उत्तर- किताबें पढ़ने का शौक है। जिम के लिए भी वक्त निकालते हैं।