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सावधान! बच्चों की फेवरेट कॉटन कैंडी में होते हैं कैसर कारक तत्व, 3 राज्यों में बैन के बाद भी राजस्थान में खुलेआम हो रही बिक्री

Cotton Candy Ban: फरवरी में ही तमिलनाडू सरकार ने भी कॉटन कैण्डी में कैंसर कारक तत्व पाए जाने के कारण इस पर रोक लगाई थी। वहीं पोण्डुचेरी में तो इस पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है।

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Cotton Candy Contains Cancer Causing Elements: बचपन के दिनों में हर किसी ने गुडिया के बाल यानी कॉटन कैण्डी खाने का लुत्फ उठाया है। लेकिन आज के दौर में बिक रही कॉटन कैण्डी बच्चों के स्वास्थ्य से सीधा खिलवाड़ कर रही है। कॉटन कैण्डी का सेवन बच्चों को कैंसर की ओर धकेल सकता है। इसका खुलासा पूर्व में देश के कुछ राज्यों में की गई जांच में हुआ है और वहां राज्यों में सरकार की ओर से कॉटन कैण्डी के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगा दी गई है। लेकिन इतना सब होने के बाद भी जिले सहित पूरे प्रदेश में कॉटन कैंडी का उत्पादन और बिक्री बेरोकटोक हो रही है।

इन राज्यों में बैन है कॉटन कैंडी

वर्तमान में देश के तीन राज्य पोण्डुचेरी, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडू में गुडिया के बाल यानी कॉटन कैण्डी का उत्पादन और बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। सोलन, शिमला, बिलासपुर और अन्य शहरों में इनके सैंपल भरे गए थे। इसमें हानिकारक केमिकल पाया गया है। हिमाचल प्रदेश के सोलन में 20 फरवरी 2024 को शहर से सात सैंपल भरे थे, जिन्हें जांच के लिए सीटीएल कंडाघाट भेजा था। कैंडी में कैंसर कारक तत्व पाए गए थे। इसके बाद इसके उत्पादन और बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। इसी प्रकार फरवरी में ही तमिलनाडू सरकार ने भी कॉटन कैण्डी में कैंसर कारक तत्व पाए जाने के कारण इस पर रोक लगाई थी। वहीं पोण्डुचेरी में तो इस पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है।

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रोडमाइन बी कैमिकल का होता है उपयोग : तीनों राज्यों में जब कॉटन कैण्डी के सैंपल की जांच की गई थी तो उसमें रोडमाइन बी नाम का एक कैमिकल पाया गया था। चिकित्सक विशेषज्ञों की माने तो इस कैमिकल से कैंसर हो सकता है। ऐसे में तीनों राज्यों में इस पर प्रतिबंध लगाया गया था।

जिले में अब तक नहीं लिए सैंपल

देश के तीन राज्यों में जहां कॉटन कैंण्डी के उत्पादन और बिक्री को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया हैं वहीं प्रदेश में यह अब भी बेरोकटोक बिक रही है। जिले में तो आलम यह है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से कॉटन कैण्डी के सैंपल लेने तक जहमत नहीं उठाई गई है।

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जल्द ही कॉटन कैण्डी के सैंपल लिए जाएंगे। सैंपल की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • डॉ. धर्मसिंह मीणा, सीएमएचओ, सवाईमाधोपुर।

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