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Ranthambore : बाघ-बाघिनों की मौत से वन्यजीव विशेषज्ञ चिंतित, किया बड़ा खुलासा

Ranthambore : वन्यजीव विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जेनेटिक विविधता नहीं बढ़ाई गई तो भविष्य में बाघों में गंभीर बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। रणथम्भौर में बाघों की मौतें न केवल जैव विविधता के लिए चिंता का विषय हैं, बल्कि संरक्षण प्रयासों पर भी सवाल खड़े करती हैं।

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Ranthambore tigers and tigresses death Wildlife experts worried made a big revelation

फाइल फोटो पत्रिका

Ranthambore : रणथम्भौर बाघ परियोजना में हाल के वर्षों में बीमारी और अन्य कारणों से कई बाघ-बाघिनों की मौत दर्ज की गई है। जून 2025 में मशहूर बाघिन एरोहेड (टी-84) बोन ट्यूमर से और बाघ टी-57 कैंसर से काल के ग्रास में समा गए। बाघ टी-57 लंबे समय तक बीमार रहा, लेकिन वन विभाग की ओर से केवल एक बार ही उसका उपचार किया गया। बाद में विभाग की टीम केवल मॉनिटरिंग करती रही।

2023 में 8 से अधिक बाघ-बाघिन और शावक मृत

2023 में भी बाघिन टी-114, बाघिन टी-19 कृष्णा और कई शावकों सहित 8 से अधिक बाघ-बाघिनों की मौत हुई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि एक ही जीन पूल होने के कारण बाघों में बोन ट्यूमर जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। 2023 से 2024 के बीच 10-12 से अधिक बाघों की मौत विभिन्न कारणों से हुई, जिनमें से कई मौतें बीमारी से जुड़ी थीं।

जेनेटिक विविधता बढ़ाना जरूरी, वन्यजीव विशेषज्ञों ने चेताया

वन्यजीव विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जेनेटिक विविधता नहीं बढ़ाई गई तो भविष्य में बाघों में गंभीर बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। रणथम्भौर में बाघों की मौतें न केवल जैव विविधता के लिए चिंता का विषय हैं, बल्कि संरक्षण प्रयासों पर भी सवाल खड़े करती हैं।

विशेषज्ञों का सुझाव, बाघों का जीन पूल मजबूत बनाएं

ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बाघों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए वन विभाग को अधिक सक्रिय कदम उठाने होंगे। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि बाघों के जीन पूल को मजबूत करने के लिए अन्य अभयारण्यों से बाघों का आदान-प्रदान किया जाए।