
जंगली बबूल के उन्मूलन, संरक्षण के नाम पर धन की बर्बादी (फोटो- पत्रिका)
सवाईमाधोपुर: जूली फ्लोरा के नाम पर वन विभाग के आला अफसर सरकारों को गुमराह करते रहे। इसके संरक्षण और उन्मूलन को लेकर अलग-अलग योजनाएं बनाई, लेकिन हकीकत धरातल पर नहीं दिखी।
साल 2017 में पूर्व भाजपा सरकार के समय वन विभाग के अफसरों ने जूली फ्लोरा के संरक्षण को लेकर एक मॉडल प्रस्ताव बनाया। जूली फ्लोरा को पेड़ के रूप में विकसित करना उद्देश्य था। साल 2017 में जूली फ्लोरा के संरक्षण को लेकर बनाए गए मॉडल प्रस्ताव को मुख्य वन संरक्षक की ओर से प्रदेश के सभी सीसीएफ को भेजा गया। इसमें जूली फ्लोरा की झाड़ियों की टहनियों की छंगाई की जानी थी।
पूरे देश में जूली फ्लोरा समस्या बन चुका है। इस बार पूरे प्रदेश से जूली फ्लोरा हटाने के लिए पांच करोड़ के बजट का प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, यह बजट नाकाफी है। वन अधिकारियों के अनुसार, इस बजट से मात्र 500 हेक्टेयर क्षेत्र से ही जूली फ्लोरा को हटाया जा सकता है।
मॉडल प्रस्ताव के तहत एक झाड़ी को काटने के लिए 4.63 रुपए का अनुमानित प्रस्ताव बनाया गया। इसके अनुसार 700 झाड़ियों पर करीब 3241 रुपए खर्च आता। इसके अलावा टहनियों को काटने के लिए 12.23 रुपए प्रति यूनिट, टहनियों के ट्रीटमेंट के नाम पर 2 रुपए प्रति यूनिट, 2 से 4 मीटर ऊंचे प्लांट्स को काटने के लिए 2.4 रुपए प्रति यूनिट सहित कई अन्य प्रस्ताव थे। इसके साथ ही इसकी झाड़ियों की छंगाई के लिए भी अलग से बजट का प्रावधान किया, ताकि जूली फ्लोरा सीधा बढ़ सके और पेड़ की तरह विकसित हो। इसका संरक्षण किया जा सके।
बढ़ते जूली फ्लोरा को लेकर वन विभाग चिंतित है। इसके उन्मूलन को लेकर प्रयास भी किए जा रहे हैं। फिलहाल, वन विभाग की ओर से पांच करोड़ के बजट का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है।
-एसआर वेंकटेश्वर मुर्थि, सीसीएफ, प्लान, अरण्य भवन, जयपुर
Published on:
25 Jul 2025 08:35 am
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