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सवाईमाधोपुर रणथम्भोर में सबसे बड़ी खबर, आम लोगो को लग सकता हे बड़ा झटका

सवाईमाधोपुर रणथम्भोर में सबसे बड़ी खबर, आम लोगो को लग सकता हे बड़ा झटका  

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सवाईमाधोपुर. आप बाघों व अन्य वन्यजीवों की अठखेलियां देखने के लिए रणथम्भौर घूमने की योजना बना रहे हैं तो यह अब आपके लिए इतना आसान नहीं होगा। वन विभाग की मंशा अब रणथम्भौर को प्रिमियम ट्यूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की है। इसके तहत यहां अब केवल वीआईपी व विदेशी पर्यटकों को ही भ्रमण कराने और विदेशी पर्यटकों पर ही ध्यान केन्द्रित करने की योजना बनाई जा रही है।

गत दिनों हुई थी बैठक
रणथम्भौर रोड स्थित एक होटल में गत दिनों वन अधिकारियों व वन्यजीव विशेषज्ञों की बैठक हुई थी। इसमें रणथम्भौर से गांवों के विस्थापन करने, वन्यजीवों के संरक्षण व पर्यटन आदि मुद्दों पर चर्चा की गई थी। इसमें रणथम्भौर में बढ़ रहे पर्यटकों के दबाव को देखते हुए इसे प्रिमियम ट्यूरिस्ट डेस्टिनेशन व ईको ट्यूरिज्म डेस्टिेनेशन के रूप में विकसित करने पर चर्चा की गई थी।

वाहनों की संख्या की निर्धारित
विभाग की ओर से मौजूदा पर्यटन सत्र की शुरुआत में ही रणथम्भौर में वाहनों की संख्या निर्धारित कर दी थी। इसके लिए रणथम्भौर में एक पारी में एक दिन में अधिकतम 140 वाहन ही भेजे जा सकते हैं। वर्तमान में विभाग की ओर से एक पारी में प्रति जोन आठ वाहनों को ही प्रवेश दिया जा रहा है।

जिले की 13 प्रतिशत आय पर्यटन से
आईटीडब्ल्यू को फाउण्डर बालेन्दु सिंह की माने तो सवाईमाधोपुर की कुल आय का 13 प्रतिशत हिस्सा पर्यटन से ही आता है और पर्यटन से यहां 20 हजार लोग रोजगार पा रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी रणथम्भौर में अधिक पर्यटकों की आवक से वन्यजीवों पर दबाव बढ़ रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में वार्षिक 217 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हो रही है।

20 प्रतिशत विदेशी ही कर रहे पूर्ति
हाल ही में टॉफ की ओर से जारी की गई, एक रिपोर्ट में बताया गया है कि रणथम्भौर में हर साल निर्धारित आय के लक्ष्य की पूर्ति तो यहां हर साल आने वाले महज 20 प्रतिशत विदेशी पर्यटकों से मिलने वाले राजस्व से ही हो जाती है। ऐसे में अब विभाग की मंशा विदेशी व वीआईपी पर्यटकों पर ही ध्यान केन्द्रित करने की है।

प्रवेश शुल्क के रूप में कमाए 20 करोड़
प्रसिद्ध टाइगर इकोलॉजिस्ट रघु चुंडावत की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि रणथम्भौर में गत पर्यटन सीजन में पार्क भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों से पार्क में प्रवेश शुल्क के नाम पर ही वन विभाग को 20 करोड़ की आय हुई है। रणथम्भौर पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है। यहां हर साल 20 प्रतिशत तक पर्यटन में वृद्धि हो रही है।

70 फीसदी लोगों को मिलता है रोजगार
पर्यटन में वृद्धि होने के साथ रणथम्भौर में रोजगार के साधन व संभावनाओं में भी इजाफा हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार रणथम्भौर में 2 हजार से अधिक लोगों को पर्यटन से रोजगार मिला है। यहां सभी प्रकार की सेवाओं में 70 फीसदी स्थानीय लोग रोजगार कर रहे हैं। अगर प्रदेश भर की बात की जाए तो यह आंकड़ा बढ़कर 90 प्रतिशत हो जाता है।

यह होगा लाभ
वन्यजीव विशेषज्ञों व वनाधिकारियों की माने तो रणथम्भौर को प्रिमियम ट्यूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने से रणथम्भौर में जहां अनावश्सक बढ़ रहे पर्यटकों का दबाव कम होगा वहीं विभाग की आय में वृद्धि होगी।

यूं बढ़ा रणथम्भौर में आय का ग्राफ
वर्ष आय...

2015 14 करोड़
2016 16 करोड़

2017 20 करोड़
2018 34 करोड़

यह है अन्य पार्कों की गत वर्ष की आय
पार्क आय

बांधवगढ़ 3.8 करोड़
तोबाड़ा 5.0 करोड़

पेंच 4.0 करोड़

इनका कहना है...
रणथम्भौर में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इसे प्रिमियम ट्यूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने की योजना है। इसके तहत नियमानुसार वाहनों की संख्या निर्धारित की गई है। इसके लिए पार्क के आस-पास के गांवों को विस्थापित करने का काम भी किया जा रहा है।
- वाईके साहू, सीसीएफ, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।