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त्रिनेत्र गणेश मार्ग पर ‘मलंग’ का जलवा, दो घंटे तक सड़क पर बैठा रहा बाघ, पर्यटकों को मिला रोमांचक दीदार

त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग अब पूरी तरह बाघों की टेरेटरी बन चुका है। यहां पिछले एक साल से लगातार बाघ-बाघिनों का मूवमेंट बना हुआ है। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे एक बार फिर बाघ आरबीटी-2511 ‘मलंग’ मंदिर मार्ग पर दिखाई दिया।

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बाघ आरबीटी-2511 ‘मलंग’: फोटो पत्रिका नेटवर्क

सवाईमाधोपुर। त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग अब पूरी तरह बाघों की टेरेटरी बन चुका है। यहां पिछले एक साल से लगातार बाघ-बाघिनों का मूवमेंट बना हुआ है। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे एक बार फिर बाघ आरबीटी-2511 ‘मलंग’ मंदिर मार्ग पर दिखाई दिया।

दो घंटे तक सड़क पर बैठा रहा बाघ

जानकारी के अनुसार सुबह की पारी से सफारी कर लौट रहे पर्यटकों को मिश्र दर्रा गेट के पास बाघ का दीदार हुआ। मलंग करीब दस मिनट तक सड़क पर चहल-कदमी करता रहा। इसके बाद वह सड़क पर ही बैठ गया और लगभग दो घंटे तक वहीं मौजूद रहा। इस दौरान मंदिर मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और जाम जैसी स्थिति बन गई।

पर्यटकों को मिला रोमांचक दीदार

पर्यटकों के लिए यह दृश्य बेहद रोमांचक रहा। कई लोग वाहन रोककर बाघ को नजदीक से निहारते रहे। हालांकि यातायात प्रभावित होने से लोगों को असुविधा भी हुई। अंततः दो घंटे बाद बाघ जंगल की ओर लौट गया, जिसके बाद मार्ग पर यातायात सुचारू हो सका। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग बाघों की स्थायी गतिविधि क्षेत्र बन चुका है और यहां आने वाले पर्यटक अक्सर बाघों के दीदार का रोमांचक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं।

टाइगर ‘मलंग’ सड़क पर टहलता हुआ आया था नजर

बता दें कि 4 मार्च को त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर मिश्र दर्रा गेट की ओर टाइगर आरबीटी-2511 ‘मलंग’ सड़क पर टहलता हुआ नजर आया था। टाइगर कुछ देर तक सड़क पर आराम से टहलता रहा। इस दौरान उसने एक कार की ओर भी कदम बढ़ाए, जिससे वाहन में बैठे पर्यटक घबरा गए थे।

मंदिर मार्ग पर आ गया था बाघ टी-2511

गौरतलब है कि 18 मार्च को भी बाघ टी-2511 त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर आ गया था। अचानक बाघ को देखकर श्रद्धालुओं और वाहन चालकों में अफरा-तफरी मच गई। मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। बाघ करीब एक घंटे तक मंदिर मार्ग पर टहलता रहा था। इस दौरान एहतियातन वन विभाग ने गणेश धाम से श्रद्धालुओं का प्रवेश रोक दिया। श्रद्धालुओं को सुरक्षा कारणों से मंदिर की ओर जाने से रोक दिया गया। बाद में बाघ जंगल की ओर लौट गया, जिसके बाद विभाग ने पुनः श्रद्धालुओं को प्रवेश की अनुमति दी थी।