
रणथम्भौर में सांप का रेस्क्यू करते आवीश शर्मा। Photo- Patrika
World Snake Day: रणथम्भौर में वन विभाग की ओर से बाघों, पैंथर, भालू आदि का रेस्क्यू तो किया जाता ही है। इसके अलावा बारिश के मौसम में गली मोहल्लों में सांपों के आने के मामलों में भी वृद्धि हो जाती है।
इसके लिए भी वन विभाग की ओर से रेस्क्यू टीम भेजी जाती है, लेकिन पिछले कुछ सालों से कार्मिकों की कमी के कारण सांपों के रेस्क्यू का कार्य निजी विशेषज्ञों की ओर से ही किया जा रहा है।
रणथम्भौर में भी सीकर के रहने वाले आवीश शर्मा चार साल से सांपों का सफलता पूर्वक रेस्क्यू कर रहे हैं। इस दौरान तीन बार उन्हें सांप ने काट भी लिया, लेकिन भगवान की कृपा से सकुशल हैं।
आवीश ने बताया कि उन्हें बचपन से ही वाइल्ड लाइफ में रुचि थी। उम्र बढ़ने के साथ साथ यह शौक और बढ़ गया। ऐसे में उन्होंने डिस्कवरी व अन्य वाइल्ड लाइफ चैनल देखना शुरू कर दिया। इन चैनलों पर सांपों को रेस्क्यू के तरीके के बारे में भी जानकारी दी जाती थी। ऐसे में उन्होंने वाइल्ड लाइफ चैनल के माध्यम से सांपों को रेस्क्यू करने की बारीकियां सीखीं।
पिछले तीन साल से अधिक समय से रणथम्भौर में सांपों को रेस्क्यू करने का कार्य कर रहे आवीश ने अब तक यहां पर 800 से अधिक सांपों का सफलता पूर्वक रेस्क्यू किया है। इससे पहले उन्होंने सीकर में भी सांपों के रेस्क्यू का कार्य किया है।
उन्होंने बताया कि रणथम्भौर में 14 प्रकार के सांप पाए जाते हैं। इनमें कोबरा, कॉमन कररेप, रसल वाइपर, सो स्केल वाइपर आदि कई अधिक जहरीले सांप हैं। वहीं पाथन, रेड स्नैक, कॉनमन ट्रिकेउ आदि कई बिना जहरीले सांप भी शामिल है।
Published on:
16 Jul 2025 03:54 pm
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