
World Environment Day: Fact about magnetic energy without pollution
नई दिल्ली। आज विश्व पर्यावरण दिवस(World Environment Day) है। ये हर साल दुनिया भर में 5 जून को मनाया जाता है। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को प्रदूषण (air pollution) की समस्या से अवगत कराना और उसका निवारण करना है। दुनियाभर के साइंटिस्ट हवा में जहर घोल प्रदूषण को खत्म करने में लगे हुए हैं।
इनका मानना है कि दुनिया को नए दिशा में मोड़ कर ही पर्यावरण को सुरक्षित किया जा सकता है। इसके लिए प्राकृतिक संसाधन को को छोड़ चुंबकीय ऊर्जा (Magnetic energy) को ईधन का मुख्य स्त्रोत बनाना पड़ेगा। कई देशों में तो इसके ऊपर ढेरों रिसर्च भी कि जा रही है।
साइंटिस्ट इसके लिए सुपर कंडक्टर पर काम कर रहे हैं। जिसमें वाहनों को चलाने के लिए पेट्रोल और डीजल की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। वो चुंबकीय ऊर्जा से से चलेगी।
वैज्ञानिक मिशियो काकू (Michio Kaku) ने अपनी किताब फिजिक्स ऑफ द फ्यूचर-द इनवेंसंस दैट विल ट्रांसफॉर्म अवर लाइव्स (Physics of the Future: The Inventions that Will Transform Our Lives)
में भी बताया है कि आने वाले 30 सालों में ये सब संभव हो जाएगा । करीब 10 साल पहले प्रकाशित हुए इस किताब में वो सब बताया गया है जो आज के दौर में घटित हो रहा है।
ये किताब हमारे बदलते जीवन को बताने के बारे में खरी उतरी है। इसमें भविष्य की ऊर्जा के बारे में बहुत विस्तार से बात की है। मिशियो काकू ने अपनी किताब के जरिए बताया है कि आने वाले कुछ दशकों में दुनिया प्रदूषण मुक्त ईधन का उपयोग कर पाएगी। इसमें चुंबकीय ऊर्जा (Magnetic energy) खास भूमिका अदा करेगी। सुपर कंडक्टर (Super conductor) ही इस चुंबकीय ऊर्जा को पैदा करेंगे।
काकू के मुताबिक साल 2050 तक इलैक्ट्रान आधारित कई नई तकनीक सामने आएगी। जब लोग बिना किसी ईंधन के हजारों मील की यात्रा कर सकेगें। सुपर कंडक्टर (Super conductor) टैक्नॉलाजी प्रमुख ऊर्जा तकनीक होगी।
सुपर कंडक्टिंग तारों से कोई एनर्जी खत्म नहीं होगी। इलैक्ट्रान बगैर तारों के गति करेंगे और ट्रेनें, कार और वाहन चुंबकीय तरंगों में तैरेंगे। ये उर्जा हमें एक दुनिया दिखाएगी।
हालांकि सुपर कंडक्टर्रस के लिए इसका तापमान हमेशा जीरो डिग्री रखना होगा। जिसके लिए ये काम द्रवित हाइड्रोजन के जरिए होगा, जो काफी महंगा हो सकती है।
हाल ही में हुए एक रिसर्च में पता चला है कि सेरेमिक को भविष्य में सुपर कंडक्टर्स के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से कोई प्रदूषण नहीं होगा। न ही ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या और आगे बढ़ेगी।
चीन, जर्मनी और जापान ने तो सुपर कंडक्टर्स पर काम करना भी शुरू कर दिया है। इस तकनीक की मदद से मैंगलेव ट्रेनें बनी हैं। जो चुबंकीय तरंगों पर तैरते हुए तेज रफ्तार में दूरी तय करती हैं। इनकी अधिकतम गति 400 मील प्रति घंटा तक पहुंच चुकी है। इनसे ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन भी कम होता है।
मिशिने अपनी किताब में ये भी बताया है आने वाले कुछ दशकों में कृत्रिम उपग्रह बिजली घर भी बन जाएंगे। जो सूर्य के विकिरण को सोखकर उन्हें बिजली में बदल सकेगें। बता दें अमेरिका तो इस योजना पर काम कर भी रहा है। जापान भी स्पेस में पावर सेटेलाइट स्टेशन की संभावना देख रहा है।
Published on:
05 Jun 2020 04:36 pm
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