केन्द्र, राज्य शासन, जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों को स्वच्छ भारत मुहिम से जोड़कर सफाई, शौचालय और अन्य अनिवार्य सुविधाओं से पूर्ण करने का दावा कर रहे हैं। जबकि वर्षों से शौचालय विहीन शाला का मुद्दा उठा रही प्रधानपाठक, शिक्षिका, अभिभावकों की बात को किसी ने गंभीरता से सुना ही नहीं।