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ये कहानी हार नहीं मानने देगी: कभी मजदूरी कर काटती थी चारा, 60 वर्ष की उम्र में सीखी अनूठी कला, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

सम्मान: राष्ट्रपति भवन में गूंजा उमरिया का नाम, कभी चारा काट और मजदूरी कर परिवार का करती थीं गुजर-बसर

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india's President ramnath honored tribal artist woman jodhaiya bai

india's President ramnath honored tribal artist woman jodhaiya bai

उमरिया. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (international women's day) पर जिले के ग्राम लोढ़ा निवासी बुजुर्ग चित्रकार जोधईया बाई बैगा (Tribal Artist woman jodhaiya bai baiga) ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Pm narendra modi), केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (smriti irani) से मुलाकात हुई। राष्ट्रीय नारी शक्ति सम्मान (nari shakti samman) के लिए उमरिया की बैगा चित्रकार जोधईया बाई का चयन हुआ है। जहां राष्ट्रपति भवन (President house) में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Rastrapati ramnath kovind) ने जोधईया बाई का सम्मान किया। जो जिले के लिए ही नहीं पूरे प्रदेश के लिए गौरवान्वित कर देने वाला पल रहा।


प्रधानमंत्री आवास नई दिल्ली में जोधईया बाई सहित महिलाओं के क्षेत्र में विशेष कार्य करने वाली और राष्ट्रीय नारी शक्ति सम्मान के लिए चयनित महिलाओं के साथ प्रधानमंत्री ने मुलाकात की। जोधाईया बाई की इस उपलब्धि से उमरिया जिले के कलाप्रेमियों में उत्साह बना हुआ है। बताया गया कि वर्ष 2008 में देश के मशहूर चित्रकार स्व. आशीष स्वामी ने ग्राम लोढ़ा में जनगण तस्वीर खाना की स्थापना कर जोधाईया बाई सहित दर्जनों महिलाओं को चित्रकला से जोडऩे का प्रयास शुरू किया और वर्तमान में देश में बैगा चित्रकला को नई पहचान दी है।

संघर्ष पूर्ण रहा जीवन
बैगा कला को जन्म देने वाली 82 वर्षीय जोधईया बाई ने 60 वर्ष की उम्र में पेंटिंग करना सीखा था और महज 10 सालों में दुनिया भर में अपनी कला के दम पर शोहरत अर्जित कर ली। जोधईया बाई के चित्रों की प्रादर्शनी, लंदन, अमेरिका, फ्रांस, इटली सहित कई देशों में लग चुकी है। बीते वर्ष जोधईया बाई को पद्मश्री पुरुष्कार के लिए नामांकित भी किया गया था। जोधईया बाई बैगा के जीवन का सफर बड़ा संघर्ष पूर्ण रहा है। जोधाईया बाई ने बताया कि केवल 30 साल की उम्र में पति का साया सिर से उठ गया और बच्चों को पालने के लिए मजदूरी ही एक रास्ता बचा था। पति की मौत के बाद जोधइया ने मजदूरी का काम किया। जंगल में हिंसक जानवरों के बीच चारा काटा। बड़े लोगों के खेतों में मजदूरी की। जोधइया बैगा ने कभी स्कूल का मुंह भी नहीं देखा था इसलिए उनके लिए मजदूरी करना ही एक रास्ता था।