
शहडोल - अगर सच्चे मन से श्रृद्धा भाव से कोई माता की भक्ति करे तो वो खुश कैसे नहीं होंगी, कंकाली माता अपने भक्तों पर हमेशा आशीर्वाद रखती हैं, नए-नए चमत्कार करते रहती हैं। समीपी ग्राम अंतरा में विराजी माता कंकाली के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने एक आदिवासी की सेवा से खुश होकर ग्राम अंतरा में अपना धाम बनाया और भक्तों को अपने दरबार में बुलाकर उन्हे सुख समृद्धि का आशीर्वाद दिया।
जब मूर्ति को हिला भी नहीं पाए ग्रामीण
कंकाली माता मंंदिर, और माता के चमत्कार, दूर-दूर तक प्रचलित हैं, लेकिन कंकाली माता की मूर्ति कैसे मंदिर में स्थापित हुई, इसको लेकर भी अद्भुत चमत्कार की कहानी है। बताया गया है कि कई साल पहले यहां घनघोर जंगल के बीच एक आम के पेड़ के नीचे माँ कंकाली की मूर्ति विराजमान थी। और इस मूर्ति की सुरक्षा के लिए, मूर्ति को मंदिर में विराजमान करने के लिए आसपास के ग्रामीणजन एकत्र हुए और मूर्ति को उठाने की कोशिश किए, लेकिन कोई भी वहां से मूर्ति को हिला भी नहीं सका, आखिर में हिम्मत हारकर सभी ग्रामीण वापस घर चले गए।
जब बाबा की भक्ति से खुश हुईं माता
इसी दौरान डोंगरगढ़ से गोंड आदिवासी काली चरण दास अंतरा आए और पूरी तन्मयता से माँ की सेवा में जुट गए। उनकी सेवा को देख आसपास के ग्रामीण उन्हे फट्टी बाबा कहकर पुकारने लगे। फट्टी बाबा ने एक बेटे की तरह माँ कंकाली की सेवा की। जिससे खुश होकर माता कंकाली ने फट्टी बाबा को अपनी सेवा करने का आशीर्वाद दिया और बाबा के दिशा-निर्देश पर माँ कंकाली की मूर्ति को मंदिर के कक्ष में स्थापित कर दिया गया।
तब से लेकर अब तक मां कंकाली, मंदिर के उसी स्थान पर विराजी हैं और हर भक्त पर उनकी कृपा बरस रही है। बताया गया है कि फट्टी बाबा गत सन् 1958 में अंतरा आए और सन् 1992 में मौनी अमावस्या के दिन मंदिर के समीप समाधि ले ली। उक्त स्थल पर वर्तमान में फट्टी बाबा का एक मंदिर भी बनवा दिया गया है। फट्टी बाबा ने देवी कंकाली की बेटे की तरह सेवा की और उनकी सेवा शीतला बाबा ने की। समाधि लेने के पूर्व फट्टी बाबा ने माता कंकाली की सेवा करने का जिम्मा शीतला बाबा को सौंपा था।
Published on:
02 May 2018 03:40 pm

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