
बाइक से फर्राटा भरते स्कूल पहुंचे नाबालिग छात्र, पुलिस ने समझाइश दी तो पड़ गई भारी
शहडोल. बीते दो वर्षों के बाद स्कूलों का संचालन 1 जुलाई से पूरी तरह शुरू कर दिया गया है। स्कूल में अध्यनरत बच्चों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार यातायात विभाग ने कम उम्र के विद्यार्थियों को वाहन न चलाने के लिए जागरूकता अभियान चला रही है। नगर में संचालित निजी शैक्षिण संस्थाओं में बड़ी संख्या में नाबालिग छात्र-छात्राएं मोटर साइकल लेकर स्कूल जाते है, जिनके सुरक्षा की दृष्टि से यातायात विभाग विद्यालय प्रबंधन और अध्यनरत विद्यार्थी के अभिवाक के साथ नियमों से अवगत कराते हुए कम उम्र में वाहन चलाने के दुष्परिणाम के बारे में बताया।
सोमवार को पांडव नगर में संचालित एक निजी विद्यालय में यातायात विभाग ने सुबह से चैकिंग लगाकर बाइक से आने वाले विद्यार्थियों के वाहनों को अपने कब्जे में लिया, जिसमें विभाग को करीब 50 से अधिक नाबालिग छात्र-छात्राएं वाहन से स्कूल आते मिले। ट्रेफिक पुलिस ने परिजन को सूचित करते हुए स्कूल समय के बाद आने को कहा। जहां यातायात पुलिस ने स्कूल प्रबंधन, विद्यार्थी और अभिवावक को समझाइश देते हुए यातायात की गाइडलाइन से अवगत कराया और परिजन को वाहन सुपुर्द करते हुए समाझाइश दी गई, कि 18 वर्ष के पहले वाहन चलाना कानून अपराध है।
वाहनों के संबध में यह दी जानकारी
यातायात डीएसपी अखिलेश तिवारी ने निजी विद्यालय परिषर में स्कूल प्रबंधन और अभिवावकों को सुप्रीम कोर्ट के जारी निर्धारित मापदंडों के अनुरूप वाहनों में जीपीएस, स्पीड गर्वनर, प्रेशर हॉर्न, आपातकालीन खिड़की, स्कूल का नाम, टेलीफोन नंबर, चालक का मोबाइल नंबर, फस्ट एड बॉक्स, अग्नि शमन यंत्र, स्कूल बस के आगे पीछे स्कूल बस लिखा है की नहीं, ये सारी चीजें चेक करने के बाद ही बच्चों को स्कूल वाहनों में भेजने के लिए बताया गया। साथ ही, स्कूल प्रबंधन को भी ये सभी सुविधाओं के साथ स्कूल वाहन संचालन करने को कहा। साथ ही, अभिवावकों को यह भी हिदायत दी गई कि, 18 वर्ष के पहले बच्चों को मोटर साइकल चलाने की छूट न दें।
समझाइश के दौरान हुई बहस
बच्चों के सुरक्षा को लेकर यातायात विभाग की पुलिस टीम निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों को समझाइश देने के लिए कार्रवाई शुरू की तो एक अभिवावक को ये बात नागवार गुजरी और वो पुलिस टीम से बहस करते हुए पुलिस को नियम बताना शुरू कर दिया। लाख समझाइश के बाद भी वो पुलिस को बार-बार नियम कानून बताते नजर आया। अभिवाकों के लाख समझाने के बाद जब नहीं माना तो डीएसपी ने कड़े शब्दों से अपने नियम बताना शुरू किए, तब कहीं जाकर माहौल शांत हुआ।
इनका कहना है
डीएसपी यातायात अखिलेश तिवारी का कहना है कि, सुप्रिम कोर्ट के आदेशानुसार कम उम्र के बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति नहीं दी गई है। स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए विद्यालय प्रबंधन और अभिवावकों को समझाइश दी गई है कि, 18 वर्ष के पहले बच्चों को किसी भी प्रकार के वाहन चलाने की छूट न दें।
Published on:
18 Jul 2022 07:53 pm
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