
सक्रिय हुआ प्री-मानसून, 24 घंटे में हुई 16 मिलीमीटर बारिश
शहडोल. जिले में नौतपा के पांचवे दिन प्री-मानसून सक्रिय हो गया है। जिससे जहां एक ओर भीषण गर्मी के तेवर कुछ कम हुए ैहैं। वहीं दूसरी ओर मानसून के आगमन की तैयारी की ओर प्रशासन का ध्यान नहीं है। बताया गया है कि पिछले 24 घंटे में जिले में प्री-मानसून की तेज हवा के साथ 16 मिलीमीटर बारिश हुई। जिसमें ब्यौहारी तहसील क्षेत्र में 12 मिलीमीटर और जैतपुर तहसील क्षेत्र में चार मिलीमीटर बारिश शामिल है। शेष बुढ़ार, सोहागपुर, जयसिंहनगर और गोहपारू क्षेत्र में बारिश का आंकड़ा शून्य रहा, मगर आसमान पर बादल छाए रहे। जानकारों की माने तो उत्तर भारत की तरफ आ रहे पश्चिमी विक्षोभ और अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र बनने से जिले में प्री-मानसून की गतिविधियां शुरू हो गई है। साथ ही तय समय पर मानसून आने की संभावना बताई गई है। जिले में प्री-मानसून की दस्तक ने तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट भी दर्ज की गई है। फिर भी जिले का पारा अभी 40 डिग्री से उपर ही चल रहा है।
तीन जून को बारिश की संभावना
मौसम विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार अगले पांच दिनों के दौरान जिले में तीन जून को बारिश की संभावना है। अधिकतम तापमान 41 से 42 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। सुबह आद्र्रता 51 प्रतिशत और दोपहर में 20 प्रतिशत रहने की संभावना है। हवा की गति 13 से 14 किलोमीटर रहने का अनुमान है।
मानसून की तैयारियों से बेसुध है प्रशासन
गौरतलब है कि अगले महीने जिले में मानसून आमद देगा। जिसके मद्देनजर नगर पालिका, बिजली कंपनी व स्वास्थ्य विभाग हर साल मानसून से पहले तैयारियां करते हैं। ताकि बारिश के समय समस्याएं कम हों, लेकिन इस बार कोरोना महामारी में विभागीय अमला ऐसे उलझा हुआ है कि उसे मानसून आगमन के पूर्व की तैयारी की सुध नहीं है और अभी तक कोई ठोस काम नहीं हुए। जबकि मानसून में वायरल, डायरिया व मलेरिया के केस भी सामने आते हैं। ऐसे में विभाग के लिए इन बीमारियों पर रोकथाम करना भी चुनौती साबित होगा। शहर में न ठीक से नालों की सफाई हो पाई और न ही बिजली कंपनी ठीक से लाइनों का मेंटेनेंस कर पा रही है। जिसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ सकता है। सफाई व्यवस्था पहले की तरह बरकरार है।
अन्नदाताओं को समसामयिक सलाह
-घास या फसल के अवशेषों को खेतों में जलाकर आसमान पर उड़ते टिड्डों के झुण्ड को नियंत्रित करें।
-वर्षा के जल संरक्षण के लिए डबरी का निर्माण और मेढ़ की मरम्मत करें।
-सिंचित दशा में अरहर की बुवाई जून के प्रथम सप्ताह में अन्यथा सिंचाई के अभाव में वर्षा शुरू होने पर करें।
-यदि मई के अंतिम सप्ताह में धान की नर्सरी नहीं डाले हो तो जून के प्रथम पखवाड़े तक पूरा कर लें।
-जिनके पास सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो वह इस सप्ताह खरीफ प्याज की बुवाई के लिए नर्सरी तैयार करें।
ऐसे रहा नौतपा में तापमान
दिनांक अधि. न्यून.
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Published on:
30 May 2020, 9:28 PM IST
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