शहडोल. परम्परागत शिक्षा पद्धति कभी-कभी छात्रों में अरुचि पैदा कर देती है। जिससे छात्रों को किताबी ज्ञान अरुचिकर लगने लगता है। ऐसे में गणित व विज्ञान जैसे विषय उन्हे नीरस लगने लगते हैं। छात्रों को इससे उबारने के लिये शासकीय हाई स्कूल पुलिस लाईन शहडोल के शिक्षक संतोष कुमार मिश्रा ने अध्यापन कार्य में एक नवाचार किया है।
जिसमें विज्ञान वर्ग पहेली के माध्यम से छात्रों को विद्यान की गतिविधि आधारित शिक्षा प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका यह नवाचार छात्रों में नई जिज्ञासाएं उत्पन्न कर रहा है साथ ही शिक्षा के प्रति छात्रों का रुझान भी बढ़ा है। उनके द्वारा यह नवाचार विज्ञान विषय के परीक्षा परिणाम में सुधार के लिए किया है।
विज्ञान वर्ग पहेली में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान द्वारा प्रदाय रेमेडियल टीचिंग सामग्री के लगभग समस्त वस्तुनिष्ठ प्रश्नों, पिछले ५ वर्षों के वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं अन्य संभावित महत्वपूर्ण कुल 120 प्रश्नों को शामिल किया गया है।
यह विज्ञान वर्ग पहेली न केवल वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की बल्कि अति लघुउत्तरीय प्रश्नों की तैयारी में भी मददगार साबित होगा।
खेल-खेल में हो रही पढ़ाई
खेल सभी बच्चों को बहुत प्रिय होता है। अलग-अलग आयु वर्ग के बच्चे विभिन्न प्रकार के खेल खेलते हैं। बच्चों की इस रुचि को आधार बनाकर शिक्षक संतोष मिश्रा ने इसे शिक्षा के क्षेत्र से जोडऩे का प्रयास किया जो कि छात्रों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने में कारगर साबित हो रहा है। उल्लेखनीय है कि छात्रों को खेल-खेल में गतिविधि आधारित शिक्षा दी जाए तो छात्र स्वयं इन गतिविधियों में भाग लेते हैं एवं जल्दी सीखते हैं।
क्या होंगे नवाचार से फायदे
1. इस गतिविधि में जिन बच्चों को प्रश्नों का उत्तर नही मालूम होता है वे खेल-खेल में उत्तरों को जान जाते हैं।
2. खेल-खेल में उन्हे जो ज्ञान मिलता है वह उन्हे हमेशा याद रहता है।
3. इस तरह की गतिविधियां शिक्षण को आनंददायक बनाती है।
4. गतिविधि आधारित खेल-खेल में दी जाने वाली शिक्षा बच्चों को पढ़ाई कम खेल ज्यादा लगती है।
5. बच्चे वर्ग पहेली को पूरा करने में या सही उत्तर ढूढऩे में पूरा जी जान लगा देते हैं जो ज्ञान प्राप्त करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।