
शाहजहांपुर। निकाय चुनाव से ठीक पहले उत्तर प्रदेश के बड़े सियासी घराने में भारतीय जनता पार्टी ने सेंध मारी है। कभी जो प्रसाद भवन पर सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस को समर्पित था आज राजनीति ने इस प्रसाद भवन को कांग्रेस और भाजपा के दो हिस्सोंं में बाट दिया है। हमेशा ही इस पर सिर्फ कांग्रेस के हाथ के पंजे के निशान लगा झण्डा लहराता था लेकिन अब इसके एक कौने पर कांग्रेस तो दूसरे कौने पर भाजपा के कमल के फूल का झण्डा लहराएगा।
प्रसाद भवन रहा है हमेशा से जनपद में राजनीति का केंद्र
जी हां हम बात कर रहे हैं शहजहांपुर के प्रसाद भवन की। इस प्रसाद भवन की पहचान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय कुंवर जितेंद्र प्रसाद उर्फ़ बड़े बाबा साहब और स्वर्गीय कुंवर जयेंद्र प्रसाद उर्फ़ छोटे बाबा साहब के नाम से थी। ख़ास बात ये है कि इन दोनों नेताओं ने लखनऊ की राजनीति से दिल्ली की राजनीति तक अपनी अलग पहचान बनाई थी। शायद यही वजह है कि गांधी परिवार के खिलाफ कांग्रेस नेता कुंवर जितेन्द्र प्रसाद ने आगे आकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा। आज यह प्रसाद भवन पर कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा की भी राजनीति का केंद्र बन गया है, जहां कुंवर जितेंद्र प्रसाद की मौत के बाद कुंवर जितिन प्रसाद और कुंवर जयेंद्र प्रासाद की मौत के बाद कुंवर जयेश प्रसाद उनकी राजनीति के वारिश बने।
राहुल के करीबी हैं जितिन प्रसाद
कुंवर जितिन प्रसाद कांग्रेस नेता होने के साथ-साथ राहुल गांधी के भी बेहद करीबी माने जाते हैं तो वंही जितिन प्रसाद के बड़े भाई जयेश प्रसाद ने कांग्रेस के दुश्मन भाजपा से हाथ मिलाकर एक साथ सबको चौंका दिया है। इतना ही नहीं जयेश प्रसाद के साथ उनकी पत्नी नीलिमा प्रसाद भी भाजपा में शामिल हो गई हैं। यह बात भी जग जाहिर है कि जुंवर जयेश प्रसाद कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के बेहद करीबी हैं। जिस प्रसाद भवन पर हमेशा कांग्रेस के नाम की माला का जप होता था अब वहां भाजपा के नाम का कीर्तन शुरू हो गया है।
नीलिमा की जॉइनिंग के मायने
खास बात यह है कि जयेश प्रसाद की पत्नी नीलिमा प्रसाद की निकाय चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर हैं। ऐसे में नीलिमा की जॉइनिंग निकाय चुनाव से जोड़ कर देखी जा रही है।
Published on:
03 Nov 2017 03:34 pm
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