
शाहजहांपुर। फिल्मी हस्तियों, खिलाड़ियों की तरह शहीदों के परिवार वालों को राज्यसभा और विधान परिषद में जाने का मौका दिया जाए, ये मांग की है शहीद भगत सिंह जागृति मंच और शहीदों के परिवारीजनों ने। मौका था अमर शहीद आशफाक उल्ला खां की 117वीं वर्षगांठ का। इसी कार्यक्रम में शहीदों के परिवार के लोगों ने भी शिरकत की। बता दें कि शहीद आशफाक उल्ला खां, राम प्रसाद बिस्मिल और ठाकुर रोशन सिंह तीनों ही आजादी के दीवाने शाहजहांपुर में ही पैदा हुए और आजादी के खातिर हंसते हंसते फांसी के फन्दे पर झूल गये।
शहीद भगत सिंह जागृति मंच ने उठाई आवाज
अशफाक उल्ला खां के जन्म दिवस पर शाहजहांपुर पहुंचे शहीदों के परिवार के लोगों ने अशफाक उल्ला खां की मजार पर चादरपोशी की और उन्हें श्रद्धांजली दी। यहां पहुंचे शहीद भगत सिंह के भतीजे किरन जीत सिंह ने देश के लोगों से अपील की है कि वो श्हीदों की प्रतिमाओं और उनके स्मारक को बदहाली का शिकार न होने दें बल्कि उनके स्मारकों को सम्मान दें। वहीं शहीद भगत सिंह जागृति मंच के अध्यक्ष ने मांग की है कि फिल्मी हस्तियों, खिलाड़ियों की तरह शहीदों के परिवार वालों को राज्यसभा और विधान परिषद में जाने का मौका दिया जाये ताकि वो शहीदों के परिवारों का प्रतिनिधित्व सदन में भी कर सकें। साथ ही ये भी मांग की गई कि शहीदों की जीवनी को पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाये ताकि आने वाली पीढ़ी शहीदों से प्रेरणा लें और उन्हें जान सकें कि किस तरह अमर शहीदों ने राष्ट्रहित के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और बच्चों में राष्ट्रहित की भावना पैदा हो।
खस्ताहाल में हैं शहीदों की धरोहर
आपको बता दें कि शाहजहांपुर में पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह से जुडी धरोहर खस्ता हाल में हैं। जहां पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का घर किसी भव्य स्मारक की जगह दबंगों के कब्जे में है, तो वहीं अशफाक उल्ला खां का मकबरा भी दबंगों के कब्जे में है। इसके आलावा ठाकुर रोशन सिंह के गांव को जाने का रास्ता तक नहीं है।
Published on:
23 Oct 2017, 9:44 AM IST
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