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शाजापुर के गुलाना में सेवानिवृत्त सैनिक ने किए फर्जी हस्ताक्षर कर लिया भूखंड का पट्टा!

सेवानिवृत्त सैनिक ने तहसीलदार के नकली हस्ताक्षर से ग्राम पंचायत गुलाना की आवासीय भूमि पर फर्जी तरीके से पट्टा हासिल करने का मामला सामने आया है। तलसीलदार के पत्र के बाद कलेक्टर दिनेश जैन ने जांच कराई और दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का आदेश दिया।

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शाजापुर के गुलाना में सेवानिवृत्त सैनिक ने किए फर्जी हस्ताक्षर कर लिया भूखंड का पट्टा!

सेवानिवृत्त सैनिक ने तहसीलदार के नकली हस्ताक्षर से ग्राम पंचायत गुलाना की आवासीय भूमि पर फर्जी तरीके से पट्टा हासिल करने का मामला सामने आया है। तलसीलदार के पत्र के बाद कलेक्टर दिनेश जैन ने जांच कराई और दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का आदेश दिया।

गुलाना/शाजापुर. सेवानिवृत्त सैनिक ने तहसीलदार के नकली हस्ताक्षर से ग्राम पंचायत गुलाना की आवासीय भूमि पर फर्जी तरीके से पट्टा हासिल करने का मामला सामने आया है। तलसीलदार के पत्र के बाद कलेक्टर दिनेश जैन ने जांच कराई और दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का आदेश दिया।
गुलाना तहसील के एडवोकेट हरीश परमार के छोटे भाई भूतपूर्व सैनिक सुनील पिता भागीरथ परमार ने 23 मार्च 2016 को आवासीय भूखंड के लिए तहसील कार्यालय में पहली बार आवेदन दिया। लंबे समय तक भूखंड का पट्टा न मिलने पर 1 जनवरी 2021 को दोबारा आवेदन दिया। इसके 56 दिन बाद 26 फरवरी 2021 को आवेदक के नाम आवासीय भूखंड का आदेश पारित होने की जानकारी दी गई, जबकि इस दिन तहसीलदार राजाराम करजरे ने गुलाना से रीलिव होकर शाजापुर तहसील कार्यालय में जॉइनिंग दी। प्रकरण के खसरा भूअभिलेख में अमल के दौरान दस्तावेज जांचे तो करजरे के फर्जी हस्ताक्षर का मामला सामने आया। इसकी करजरे ने एसडीएम शाजापुर को शिकायत की है। हालांकि पूर्व सैनिक और उसके भाई का कहना है कि हस्ताक्षर तहसीलदार के ही हैं।


आवासहीन बता पूर्व सैनिक ने मांगा था पट्टा
सुनील ने आवेदन के माध्यम से गुलाना तहसील से मांग की कि वह भूतपूर्व सैनिक है, जो सेवानिवृत्ति के बाद गांव लौट चुका है। आवासीय भूमि या मकान नहीं है। गुलाना के भूमि सर्वे क्रमांक 1944 रकबा 0.30 आरे की भूमि कलेक्टर ने आबादी क्षेत्र के लिए आरक्षित की। तत्कालीन पटवारी ने भी मौका मुआयना कर तहसील कार्यालय में रिपोर्ट सौंप दी। यहां पट्टा देने की मांग की थी।


तहसीलदार का एसडीएम को पत्र
गुलाना के तहसीलदार राजाराम करजरे ने बताया, 28 सितंबर 2022 को एसडीएम शाजापुर को पत्र लिखा। इसमें स्पष्ट किया कि भूखंड आदेश पर मेरे हस्ताक्षर नहीं हैं। अवैधानिक लाभ प्राप्त करने की नियत से बनावटी हस्ताक्षर कर भूतपूर्व सैनिक सुनील एवं उसके भाई हरीश परमार ने तत्कालीन प्रवाचक (बाबू) रामेश्वर चौहान ने प्रकरण संलग्न कर आदेश तैयार किया है। चौहान की 27 अप्रेल 2021 को मृत्यु हो चुकी है। तहसीलदार ने बताया कि कलेक्टर के आदेश पर 24 फरवरी 2021 को मुझे तहसीलदार गुलाना से तहसीलदार शाजापुर पदस्थ किया गया। 26 फरवरी 2021 को मैंने शाजापुर में उपस्थिति दी और उक्त आदेश भी इसी दिनांक का है। तहसीलदार करजरे ने इस आपराधिक कृत्य के चलते संबंधित लोगों पर केस दर्ज करने की मांग की।


कलेक्टर ने दिए दोषियों पर कार्रवाई के आदेश
तहसीलदार ने एसडीएम से फर्जी हस्ताक्षर से पट्टे का आदेश बनाने की शिकायत की। 17 अक्टूबर 2022 को मामले का पुनर्निरीक्षण किया। 5 दिसंबर 2022 को कलेक्टर दिनेश जैन ने एसडीएम शाजापुर को तहसीलदार गुलाना के 26 फरवरी 2021 के आदेश के साथ पट्टा देने की प्रक्रिया निरस्त कर दी। साथ ही फर्जी आदेश पारित करने वाले दोषियों पर आपराधिक केस दर्ज करने के आदेश दिए।


जल्द होगी कार्रवाई
कलेक्टर का आदेश प्राप्त हो चुका है। जल्द ही दोषियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
राजाराम करजरे, तहसीलदार, गुलाना


फोन पर बात नहीं होगी
आवेदक पूर्व सैनिक सुनील परमार से चर्चा करना चाही तो उन्होंने कहा कि फोन पर बात नहीं होगी। वहीं एड्वोकेट हरीश परमार का कहना है, आदेश करवाने में कई प्रोसेस से गुजरना पडता है। इतनी प्रोसेस आवेदक स्वयं नहीं कर सकता। आदेश पर हस्ताक्षर तहसीलदार के ही हैं।