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इस शख्य की एक मांग पर मिल गई थी शाजापुर को रेलवे की सौगात

पं. बालकृष्ण शर्मा 'नवीनÓ की जयंती पर विशेष : प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू से कहकर शहर को दिलवाई थी सुविधा

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शाजापुर. आजाद भारत में जहां सभी ओर रेलवे का जाल बिछ रहा था, लेकिन शाजापुर एक मात्र ऐसा जिला था जो कि रेलवे से अछूता था। ऐसे में शाजापुर को रेलवे की सौगात पं. बालकृष्ण शर्मा 'नवीनÓ की बदौलत मिली थी। शाजापुर को रेल दिलवाने के लिए नवीनजी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू से महज एक लाइन में आग्रह किया था। जिसे पं. नेहरू ने मानते हुए शाजापुर को रेलवे की सौगात दे दी।
शाजापुर जिले की शुजालपुर तहसील के ग्राम भ्याना में 8 दिसंबर 1897 को पं. बालकृष्ण शर्मा 'नवीनÓ का जन्म हुआ था। नवीनजी के माता-पिता शाजापुर में स्थित द्वारिकाधीश मंदिर में पुजारी के रूप में सेवाएं देते थे। ऐसे में नवीनजी की प्रारंभिक शिक्षा शाजापुर में ही हुई। इसके बाद नवीनजी ने आजादी की लड़ाईमें भाग लिया और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पं. जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री जैसी शख्सियतों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की आजादी की लड़ाई लड़ी। इसके बाद नवीनजी महाकौशल चले गए यहां से वे कानपुर में गणेशशंकर विद्यार्थी के सानिध्य में रहकर अपनी साहित्यीक और संपादकीय प्रतिभा को निखारा और राष्ट्र स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई। आजाद भारत में संवैधानिक संसद के शुरू होने के बाद 1952 में नवीन जी को राज्यसभा सांसद बनाया गया। इसके बाद से जीवन के अंतिम समय तक राज्यसभा के सदस्य रहे।29 अप्रैल 196 0 को नवीनजी का निधन हो गया।
शहर को रेल दिलवाने के लिए प्रयास किए
शाजापुर के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. बसंत कुमार भट्ट ने बताया कि जब आजाद भारत में रेलवे का जाल बिछाया जा रहा था उस समय शाजापुर में रेल लॉ की समिति बनाईगई। इस समिति ने शाजापुर में रेल लाने के हर संभव प्रयास किए, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। ऐसे में यहां के तत्कालीन सांसद नंदकिशोर भट्ट, प्रतातभाई आर्य, प्रभागचंद्र शर्मा, हिम्मतमल सेठ, रघुनंदन शर्माआदि ने दिल्ली जाकर नवीनजी से मुलाकात की और शाजापुर को रेलवे की सौगात दिलवाने के लिए गुहार लगाई। शाजापुर से पहुंचे लोगों की बात सुनकर नवीनजी ने इस मामले में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू से मिलकर चर्चाकरने की बात कही।
एक लाइन का आग्रह और मिल गई सौगात
शाजापुर से दिल्ली पहुंचे लोगों को साथ लेकर नवीनजी तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. नेहरू से मिले। पश्चिम रेलवे सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य रमणलाल सोनी (76) ने बताया कि नवीनजी के पं. नेहरू से मित्रवत संबंध थे। इसके चलते उन्होंने पं. नेहरू से मुलाकात करके एक लाइन का आग्रह किया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'मैंने आज तक तुमसे कुछ नहीं मांगा, लेकिन ये लोग मेरे शाजापुर से आए हैं इन्हें रेल दे दीजिएÓ। नवीनजी के इस आग्रह पर पं. नेहरू ने तत्कालीन रेल मंत्री लालबहादुर शास्त्री को बुलवाया और शाजापुर को रेलवे की सौगात देने की बात कही। रेल मंत्री शास्त्री ने टेक्निकल स्टॉफ से शाजापुर की स्थिति की जानकारी ली।
उज्जैन-गुना लाइन को शाजापुर से निकाला
सन 1957-1960 के बीच उज्जैन से गुना तक की रेलवे लाइन के कार्य स्वीकृति हो गईथी। इसमें उज्जैन से निकलकर घट्टिया, घोंसला, तनोडिय़ा, आगर, सुसनेर, जीरापुर, राजगढ़, ब्यावरा, चाचौड़ा-बीनागंज, विजयपुरा-राघौगढ़ होते हुए गुना तक पहुंचने के लिए रेलवे रूट स्वीकृत किया गया। इसके सर्वे हुआ और ये यहां पर कार्यशुरू होना था। उज्जैन से गुना तक के इस रूट की लंबाई 282.9 किमी की थी। इसी बीच जब नवीन जी के आग्रह पर पं. नेहरू ने शाजापुर को रेलवे देने की बात कही तो टेक्निकल टीम ने उज्जैन से शाजापुर होते हुए गुना तक की रेलवे लाइन का सर्वे किया। इसमें उज्जैन से मक्सी, शाजापुर, सारंगपुर, पचौर से ब्यावरा, चांचौड़ा बीनागंज, विजयपुरा-राघौगढ़ होते हुए गुना तक का सर्वे किया गया। इसमें पता लगा कि इस रूट से उज्जैन से गुना का मार्ग 255 किमी का है। ऐसे में रेलवे को 27.9 किमी कम ट्रैक बिछाना पड़ेगा। इससे रेलवे को लाभ भी होगा।