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संस्कृत भाषा को बचाना अत्यंत आवश्यकः दोहरे

- संस्कृत सप्ताह कार्यक्रम व श्रीमदभागवत गीता की श्लोकों का परायण

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संस्कृत भाषा को बचाना अत्यंत आवश्यकः दोहरे

संस्कृत भाषा को बचाना अत्यंत आवश्यकः दोहरे

श्योपुर
संस्कृत भारती के तत्वावधान में शासकीय आदर्श आवासीय विद्यालय ढेंगदा संस्कृत सप्ताह कार्यक्रम व श्रीमदभागवत गीता के श्लोकों का परायण किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य पीआर दोहरे ने की। उपाध्यक्ष के रूप में संस्था के राजकुमार कंसल उच्च माध्यमिक शिक्षक मंचासीन थे। कार्यक्रम में संस्कृत ध्येय मंत्र, संस्कृत गीत संस्कृत कथा एवं संस्कृत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संस्कृत भारती का परिचय बताते हुए भुवनेश लक्षकार द्वारा रोचकता बनाई गई।
इस अवसर प्राचार्य दोहरे से कहा कि आज हमारी संस्कृत भाषा विलुप्ती के कगार पर है। इसे बचाना अत्यंत आवश्यक है और संस्कृत भारती संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संपूर्ण विश्व में निरंतर प्रयत्नशील हैं। श्लोंको का गायन करते हुए संस्कृत के ग्रन्थों का अध्ययन एवं अध्यापन को संस्कारों के समागम के लिए निंतात आवश्यक बताया। साथ ही संस्कृत के कार्य के लिए हमेशा सहयोग करने का संकल्प लिया। कंसल ने कहा कि संस्कृत भाषा को विश्व की सबसे प्राचीन भाषा बताते हुए कहा कि कम्प्यूटर सचालन में सर्वाधिक रूप से उपयुक्त संस्कृत भाषा ही है। कार्यक्रम के अंत में परायण करने के लिए संस्कृत भारती द्वारा श्रीमदभागवत गीता की पुस्तक का वितरण किया गया।