7 जून 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कूनो नेशनल पार्क से आई दुखद खबर, घायल हालत में मिली मादा चीता KGP-11 की मौत

Kuno National Park : श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क से वाइल्ड लाइफ लवर्स के लिए दुखद खबर सामने आई है। मुरैना के पहाड़गढ़ में घायल हालत में मिली मादा चीता केजीपी-11 की मौत, 6 दिन से उपचार चल रहा था।

2 min read
Google source verification
Kuno National Park

मुरैना में घायल हालत में मिली मादा चीता KGP-11 की मौत (Photo Source- Patrika)

Cheetah KGP-11 Died :मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को एक बार फिर यहां से दुखद खबर सामने आई है। बता दें कि, यहां 27 महीने की भारतीय मूल की मादा चीता KGP-11 की उपचार के दौरान मौत हो गई है। इस घटना के बाद एक बार फिर चीता प्रोजेक्ट की निगरानी व्यवस्था और मॉनिटरिंग सिस्टम पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

पहाड़गढ़ के पास घायल मिली थी मादा चीता

जानकारी के अनुसार, 1 जून को मुरैना जिले के पहाड़गढ़ क्षेत्र के पास मादा चीता घायल अवस्था में मिली थी। उसे रेस्क्यू कर पालपुर स्थित पशु चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां करीब चार से पांच दिन तक उपचार चला, लेकिन शनिवार शाम उसने दम तोड़ दिया। जिसकी जानकारी कूनो नेशनल पार्क के प्रबंधक ने प्रेस नोट जारी कर मीडिया से साझा की है।

कई चीतों और शावकों की हो चुकी मौत

गौरतलब है कि, कूनो में पिछले कुछ समय में कई चीतों और शावकों की मौत हो चुकी है। हर बार मौत के बाद जांच और मॉनिटरिंग को और मजबूत करने के दावे किए गए, लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों ने वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर चीतों की लगातार और प्रभावी निगरानी हो तो कई मामलों में समय रहते उपचार और बचाव संभव हो सकता है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगा खुलासा

हालांकि, वन विभाग का कहना है कि चीते की मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। चीता परियोजना के ताजा आंकड़ों के अनुसार, KGP-11 की मौत के बाद कूनो में अब 49 चीते शेष हैं। इनमें 32 भारतीय मूल के चीते हैं, जबकि भारत में कुल चीता आबादी 52 रह गई है।

फिर उठे सवाल

ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि, क्या लगातार हो रही मौतों के बावजूद चीता प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था में अभी भी सुधार की जरूरत है? KGP-11 की मौत के बाद ये सवाल फिर चर्चा के केंद्र में है।

लगातार सामने आ रही मौत की खबरें

कूनो में पिछले कुछ दिनों से लगातार चीतों और शावकों की मौत हो चुकी है। हर बार मौत के बाद जांच और मॉनिटरिंग को और मजबूत करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों ने वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो का कहना है कि अगर चीतों की लगातार और प्रभावी निगरानी हो तो कई मामलों में समय रहते उपचार और बचाव संभव हो सकता है।