
संूंडी, सांड और कूनो नदी पर 24 घंटे रहेगी रेस्क्यू टीम
श्योपुर,
भले ही अभी मानसून की शुरूआत नहीं हुई है, लेकिन जिले में गत वर्ष आई विकराल बाढ़ के मद्देनजर आपदा प्रबंधन ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है। इसी के तहत जिला होमगार्ड दल ने बाढ़ प्रबंधन और रेस्क्यू के लिए अपना एक्शन प्लान बनाया है, जिसमें जिले सबसे क्रिटिकल सांड, सूंडी और कूनो नदी के पुल निकट डिजास्टर रेस्क्यू सेंटर बनाए जाएंगे, जहां 2-2 होमगार्ड के जवान 24 घंटे तैनात रहेंगे। इसके साथ ही जिलास्तर पर भी दो रेस्क्यू टीम 24 घंटे अलर्ट रहेगी। इसके लिए होमगार्ड के अफसरों ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है।
जिले के ग्राम अडवाड़ के निकट पार्वती नदी के टापू पर बसे सूंडी गांव और ग्राम ढोढर के निकट चंबल के टापू पर बसे सांड गांव में बाढ़ की स्थिति हर साल बनती है। हांलाकि इन गांवों को टापू से बाहर शिफ्ंिटग के प्रयास भी हुए, लेकिन ग्रामीण वहां से आने को तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि हर साल बारिश में बाढ़ के दौरान इन ग्रामीणों की जान पर बन आती है। पिछले वर्षों में दोनों ही गांवों में बाढ़ से काफी परेशानियां आती है। यही वजह है कि दोनों गांवों में राहत दल पूरे वर्षाकाल में मौके पर ही तैनात किए जाएंगे। इसके साथ ही श्योपुर-शिवपुरी हाइवे पर स्थिति कूनो नदी भी उफान पर आने से हाइवे बंद हो जाता है, जिसके चलते यहां भी रेस्क्यू टीम तैनात की जाएगी। यहां 2-2 जवान तैनात रहेंगे, जिनकी ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है। इन जवानों के पास लाइफ जैकेट, लाइफबाय, टॉर्च, नाव आदि संसाधन भी रहेंगे।
जिला मुख्यालय पर रहेगी 8-8 सदस्यीय टीम
बाढ़ प्रबंधन के लिए जिला होमगार्ड ने अपने जवानों को टे्रनिंग भी दे दी है, वहीं 22 जवानों को लिस्टेड कर लिया गया है। इसमें छह जवान तो जहां तीनों पाइंटों पर तैनात रहेंगे, वहीं 8-8 सदस्यों की दो टीमें जिला मुख्यालय पर 12-12 घंटे की अवधि के लिए तैनात रहेंगी और जहां से भी बाढ़ आपदा की सूचना मिलेगी, वहां ये टीम मूव कर जाएगी। इसके साथ ही होमगार्ड के पास वर्तमान में दो मोटर बोट, 23 लाइफ जैकेट, 39 लाइफबॉय सहित रस्सी, आस्का लाइट, एलईडी टॉर्च, इंफ्लेटिव टॉवर लाइट आदि संसाधन मौजूद हैं। जबकि कुछ और लाइफ जैकेट और एक बोट सहित कुछ संसाधन जिला प्रशासन से मांगे गए हैं।
जिले में बाढ़ के लिहाज से 34 गांव चिन्हित
चंबल, पार्वती, कूनो और सीप नदियों के किनारे बसे जिन 34 गांव में बाढ़ की संभावना है, उनमें चंबल के टापू पर बसा सांड(सुखवास) और पार्वती के टापू पर बसा सूंडी(अडवाड़) गांव तो अतिसंवेदनशील हैं। जबकि शेष 32 गांवों में खिरखिरी, बिलौनी, छोलघटा, खेरघटा, जैनी, , कीरों की सांड(बगदिया), सिरसौद, सेवापुर, आवनी, टोंगनी, जवासा, तलावदा, ऊंचाखेड़ा, धीरोली, माकड़ौद, साडा का पाड़ा, दांतरदाकला, सामरसा, बिचपुरी, मानपुर, बहरावदा, ज्वालापुर, नंदापुर, जलालपुरा, झोंपड़ी, ईचनाखेड़ली, माखनाखेड़ली, छीताखेड़ली, कुहांजापुर, बड़ौदिया बिंदी, राधापुरा और रेशम कॉलोनी(सेसईपुरा) शामिल हैं।
Published on:
09 Jun 2020 01:42 pm
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