
भले ही उम्मीदवार पसंद नहीं होने पर चुनाव आयोग ने मतदाताओं को नोटा का विकल्प दिया है, लेकिन जिले में इसका ज्यादा असर नहीं रहा है। यही वजह है कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जिले में मतदाताओं ने नोटा का उपयोग कम ही किया है। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में जिले की दोनों सीटों पर नोटा को मिले वोटों की संख्या 2 हजार से नीचे ही रही है।
स्थिति ये है कि जिले में वर्ष 2018 के विधानसभा में श्योपुर विधानसभा में 1794 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया, जबकि विजयपुर विधानसभा में 1793 मतदाताओं ने नोटा को वोट किया। ये दोनों ही आंकड़े कुल मतदान का 1 फीसदी से भी कम है। वहीं लोकसभा चुनाव 2019 की बात करें तो श्योपुर-मुरैना लोकसभा क्षेत्र में 2098 मतदाताओं ने नोटा को वोट दिया। इससे जाहिर है कि जिले में नोटा ज्यादा असरकारक नहीं रहा।
क्या है नोटा What is NOTA
चुनाव के दौर में वोट डालते समय अगर आपको लगता है कि कोई भी उम्मीदवार सही नहीं है तो नोटा (नन ऑफ द एबव) का बटन दबाकर आप अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं। वर्ष 2009 में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को नोटा का विकल्प उपलब्ध कराने संबंधी मंशा से अवगत कराया था। जिसके बाद साल 2013 में न्यायालय ने मतदाताओं को नोटा का विकल्प देने का निर्णय किया था।
वर्ष 2018 विधानसभा चुनाव में नोटा
विधानसभा नोटा - वोट प्रतिशत
- श्योपुर - 1794 - 0.79
- विजयपुर - 1793 - 0.81
Published on:
22 Oct 2023 08:00 am
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