
Sting Operation : यहां एग्जाम के बीच खुलेआम होती है चीटिंग, नहीं किसी का खौफ, देखें वीडियो
संजीव जाट की रिपोर्ट
एक तरफ जहां प्रदेशभर में बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं तो वहीं इसी के साथ 9वीं और 11वीं कक्षा की परीक्षाएं भी चल रही हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे परीक्षा में तमाम मुस्तैदियों के दावों के बीच नकल के मामले रोजाना कहीं न कहीं से सामने आ रहे हैं। नकल का ऐसा ही एक मामला शिवपुरी जिले के बदरवास विकास खंड के अंतर्गत आने वाले बिजरोनी हायर सेकेंडरी स्कूल से सामने आया है, जहां एग्जाम हॉल में संस्कृत का पेपर दे रहे 11वीं के छात्र इतने बेखौफ होकर चीटिंग करते दिखे, जिसे देख आपको यकीन नहीं होगा। दरअसल, ये इतने बेखौफ इसलिए भी हैं क्योंकि ये ढील इन्हें किसी और से नहीं बल्कि खुद स्कूल के जिम्मेदारों से मिली है।
बता दें कि पेपर शुरु होने के बाद से ही बिजरोनी हायर सेकेंडरी स्कूल से खुलेआम नकल कराए जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसकी सच्चाई जानने गुरुवार को पत्रिका की टीम स्कूल पहुंची। जहां देख ये साबित हो गया कि स्कूल में छात्र धड़ल्ले से चीटिंग करके पेपर सॉल्व कर रहे थे। हैरानी की बात ये है कि परीक्षा दे रहे बच्चों पर इसका डर भी नहीं दिखा कि पत्रिका ने अपने कैमरे में वीडियो रिकॉर्ड करना शुरु कर दिया। ये बच्चे एग्जाम हॉल में चीटिंग के लिए न सिर्फ किताबें लेकर आए थे, बल्कि इनके हाथों में मोबाइल फोन भी थे। ये सभी अलग-अलग बैठने के बजाए एक साथ झुंड बनाकर जमीन पर बैठकर पेपर सॉल्व कर रहे थे।
इस तरह की बेखौफ चीटिंग करके पेपर देने का मामला पत्रिका के कैमरे में कैद होने के बाद जब टीम ने इस संदर्भ में परीक्षा प्रभारी और स्कल के प्राचार्य ओमकार लाल जाटव को फोन किया तो उन्होंने भी अपनी अव्यवस्थाओं और लापरवाहियों पर जवाब देने के बजाए परीक्षा दे रहे छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और फैल करने की धमकी दे डाली।
पत्रिका प्रतिनिधि द्वारा की गई बातचीत के दोरान पहले तो बिजरोनी हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य ओमकार लाल जाटव ने कहा कि 'आप खबर मत छापना, हम मामले को बैठकर सुलझा लेंगे।' इसपर जब पत्रिका प्रतिनिधि ने उनसे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का सवाल किया तो तत्काल ही उन्होंने अपने सुर बदलते हुए कहा कि मैं दिखवाता हूं। अगर परीक्षा कक्ष में छात्र चीटिंग कर रहे थे तो उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाएगी।
बता दें कि, इस तरह के मामले आए दिन प्रदेश में कहीं न कहीं सामने आते रहते हैं। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों के जिम्मेदार अपनी कुर्सी बचाने के लिए अकसर परीक्षा में नकल की अनुमति दे देते हैं। ऐसा करने पर जब बच्चे अच्छे नंबरों से पास हो जाते हैं तो विभागीय स्तर पर इनकी उन्नति होती है। लेकिन ऐसा करके ये बच्चे का भविष्य बर्बाद कर देते हैं। क्योंकि नकल करने वाला बच्चा भविष्य में अपनी उस पढ़ाई-लिखाई से कोई लाभ नहीं ले पाता, जिसके परिणाम स्वरूप न तो उसे कोई अच्छी नौकरी मिल पाती है और न ही वो अपनी शिक्षा के बल पर खुद का कोई बेहतर कारोबार शुरु कर पाता है। ऐसे में बिना पढ़े पास होने के नुकसान पर बच्चों को भी गहनता से विचार करना चाहिए।
Published on:
07 Mar 2024 10:47 pm
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