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कैसे सुधरे शिक्षा का स्तर जब बदहाल है व्यवस्था, दो शिक्षक के सहारे है यह प्राइमरी स्कूल

बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जिले में सिर्फ कागजों पर ही नित्य नए प्रयोग कर स्वयं अपने हाथ अपनी पीठ थपथपा रहा है।

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How to improve level of education

कैसे सुधरे शिक्षा का स्तर जब बदहाल है व्यवस्था, दो शिक्षक के सहारे है यह प्राइमरी स्कूल

श्रावस्ती. शिक्षा के क्षेत्र में सबसे पिछड़े श्रावस्ती जिले का शैक्षणिक स्तर सुधारने के दावे हवाहवाई साबित हो रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग (Basic Education Departmant) द्वारा जिले में सिर्फ कागजों पर ही नित्य नए प्रयोग कर स्वयं अपने हाथ अपनी पीठ थपथपा रहा है। जबकि इन विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 2 के छात्र हिंदी व अंग्रेजी की वर्णमाला तक नहीं जानते। एक ही परिसर में संचालित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 179 बच्चों को शिक्षा देने के लिए मात्र दो शिक्षकों की ही तैनाती है। इनके सहारे छात्र अनुशासन में रहना सीखे या ककहरा। इस पर सवालिया निशान लग रहा है।

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जानिए क्या है मामला

जिले में संचालित परिषदीय विद्यालयों का हाल बेहाल है। जिम्मेदार अधिकारियों से साजकर एक तरफ जहां नागरीय क्षेत्र व हाइवे किनारे कई शिक्षकों की तैनाती की गई है वहीं दूसरी तरफ दूर दराज व ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों का टोटा बना हुआ है। इतना ही नहीं जंगल पर व सीमा क्षेत्र के कई विद्यालय ऐसे भी हैं जो एकल शिक्षकों के सहारे संचालित हो रहे हैं। कई विद्यालय ऐसे भी हैं जहां तैनात शिक्षक विभागीय मिलीभगत से कई कई दिन विद्यालय नहीं आ रहे।

ऐसा ही कुछ हरिहरपुररानी विकास क्षेत्र के चितड़ पुर गांव में देखने को मिला है। यहां एक ही परिसर में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय का संचालन किया जा रहा है जिसमें 179 छात्र छात्राएं शिक्षणरत हैं जिन्हें शिक्षित करने के लिए मात्र दो शिक्षकों की ही तैनाती है। ऐसे में यहां तैनात शिक्षक बच्चों को अनुशासित बनाये, एमडीएम बनवाएं या विद्यालय का अन्य शासकीय कार्य संचालित करें या फिर बच्चों को शिक्षा दें। यहां शिक्षा व्यवस्था का हाल जानने के लिए जब छात्रों से जानकारी ली गई तो कक्षा 2 में पढ़ने वाले छात्र एबीसीडी तो दूर ककहरा व गिनती भी नहीं सुना सके।

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यही हाल अन्य कक्षाओं में शिक्षणरत छात्रों का भी रहा जो न तो सही से पाठ्य पुस्तक पढ़ सके और न ही गुणा गणित ही बता सके। यह मात्र बानगी है ऐसा हाल जिले के अधिकांश विद्यालयों का है जहां न तो मानक के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती है और न ही बच्चे शिक्षा में दक्ष ही दिख रहे हैं। वहीं इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओमकार राणा ने बताया कि जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है वहां जल्द ही शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।

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