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राजस्थान के 10 लाख बच्चों को नहीं मिलेगी किताबें-वर्कबुक, ये है कड़वा सच !

आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना दूसरे ही साल दम तोड़ती नजर आ रही है।
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10 lakh books not reached at Anganwadi centers in rajasthan

राजस्थान के 10 लाख बच्चों को नहीं मिलेगी किताबें-वर्कबुक, ये है कड़वा सच

सीकर.

आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना दूसरे ही साल दम तोड़ती नजर आ रही है। इस साल आंगनबाड़ी केंद्रों पर 10 लाख बच्चों तक किताबें-वर्कबुक आदि पढ़ाई की सामग्री नहीं पहुंचेंगी। पिछले साल की वर्कबुक-किताबें 4 महीने पहले ही खत्म हो चुकी हैं। नया सत्र 1 मार्च से शुरू होना था मगर अब तक केंद्रों पर किताबें ही नहीं पहुंची हैं। आगामी 3-4 महीने तक पहुंचने की संभावना भी नहीं है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को पढ़ाने व प्री-स्कूल के रूप में सेट-अप करने की योजना पिछले साल ही शुरू हुई थी। समेकित बाल विकास सेवाएं (आइसीडीएस) के तत्कालीन निदेशक समित शर्मा ने आंगनबाड़ी केंद्रों के 10 लाख बच्चों के लिए किताबें छपवाई थी। उनकी उम्र के अनुसार वर्कबुक तैयार करवाई गई थी। इसमें सालभर के लिए दिनांक के अनुसार सिलेबस तय था। पिछले साल किताबें जनवरी-फरवरी में आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंचा दी गई थी। वर्कबुक में 1 मार्च 2017 से 29 जनवरी 2018 तक के लिए सामग्री थी। जनवरी से मई तक केंद्रों पर बच्चों के पढ़ाई न के बराबर हो रही है।


प्री-प्राइमरी स्कूल की तैयारी
राज्य सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को दलिया-खिचड़ी सेंटर के स्थान पर प्री-प्राइमरी स्कूल के रूप में विकसित करने की तैयारी कर रही थी। इसी योजना में केंद्रों को स्कूलों से जोड़ा गया। साथ ही केंद्रों पर बच्चों की पढ़ाई के लिए किताबें दी गई। अब कुर्सी-मेज-अलमारी सहित अन्य सामान भी दिया जाना था लेकिन योजना शुरू होने के दूसरे ही वर्ष खटाई में पड़ती दिख रही है। विभाग में जनवरी से अब तक एसीबी के कई छापे पड़ चुके हैं। कई अफसरों की लिप्तता के कारण विभागीय अधिकारी सहमे हुए हैं। 5 महीने से विभाग में कामकाज ठहर गया है। बच्चों की किताबें, स्टेशनरी छपवाने से लेकर अन्य प्रमुख कार्यों के टेंडर ही अब तक नहीं हुए हैं।


फैक्ट फाइल
60 हजार हैं प्रदेश में कुल आंगनबाड़ी केंद्र
3 से 6 वर्ष के 10 लाख बच्चे हैं प्रदेशभर के केंद्रों में
4 वर्ष के बच्चों के लिए किलकारी, 4-5 वर्ष के बच्चों के लिए उमंग, 5-6 वर्ष के बच्चों के लिए तरंग वर्कबुक दी गई थी पिछले साल
4 घंटे रोजाना दी जानी है केंद्रों पर बाल्यावस्था शिक्षा

टेंडर प्रक्रियाधीन है। कुछ दिन में बिड डॉक्यूमेंट प्रकाशित कर दिया जाएगा। केंद्रों पर बच्चों को जल्द ही वर्कबुक मिल जाएगी। -सुषमा अरोड़ा, निदेशक, समेकित बाल विकास सेवाएं