
बेकार हो गए करोड़ों के सिक्के, अब बैंक ने भी लेने से किया मना, सामने आई चौंका देने वाली हकीकत
पूरण सिंह शेखावत, सीकर.
भारतीय मुद्रा का अपमान करना भले ही गैरकानूनी हो लेकिन हकीकत यह है कि शेखावाटी में बैंकर्स की अनदेखी और व्यापारियों की मनमर्जी में शेखावाटी में दस के सिक्के ताले में बंद होकर रह गए हैं। न तो बैंक और न ही दुकानदार इन सिक्कों को ले रहे हैं इससे बाजार में चलने वाली मुद्रा तिजोरियों की शोभा बढ़ा रही है। हैं। ऐसे में आम आदमी के लिए परेशानी हो गई है। लोगों को दूसरे जिले में जाकर सिक्के चलाने पड़ते हैं। रही सही कसर फतेहपुर इलाके में शेखावाटी के तीनों जिलों सीकर, चूरू व झुंझुनूं के बैंक और दुकानदारों की संख्या को देखा जाए तो यह राशि करीब 43 करोड़ रुपए से ज्यादा की है। भारतीय मुद्रा होने के बावजूद दस रुपए के सिक्के नहीं चलने को लेकर प्रशासन ने किसी भी तरह की कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है।
हो सकती है सजा
सिक्काकरण अधिनियम 2011 की धारा छह के अनुसार दस रुपए का सिक्का भुगतान के लिए वैद्य मुद्रा है। इस वैध मुद्रा को लेने से मना करना आइपीसी की धारा 489 ए से 489 इ में अपराध की श्रेणी में आता है। इसके आधार पर पुलिस चालान कर ऐसा करने वाले व्यक्ति को सजा तक दिला सकती है।
ये है कारण
रिजर्व बैंक की ओर से दस रुपए का सिक्का नहीं लेना अपराध है फिर भी दुकानदार दस रुपए के सिक्के नहीं ले रहे हैं। बैंक के अधिकारी दस रुपए के सिक्के गिनने और असली-नकली की पहचान मशीन नहीं होने से कतरा रहे हैं। इसके अलावा बैंक के अधिकारियों का कहना है कि दस रुपए के सिक्के ले भी लें लेकिन उनकी गिनती के बाद उन्हें किस पैकिंग में रखा जाए और इस पैकिंंग की प्रामाणिकता के बारे में कोई दिशा-निर्देश नहीं है।
रिजर्व बैंक की ओर से जारी दस रुपए का सिक्का भारतीय मुद्रा है इसे लेने से मना करना कानूनी अपराध है। आमजन में यह गलतफहमी है कि सिक्के नकली है। जबकि रिजर्व बैंक ने दस रुपए के सिक्के 14 तरीके से डिजाइन किए हैं। इस कारण लोगों में भ्रम है। -मुकेश व्यास, अग्रणी जिला प्रबंधक सीकर
प्रशासन की अनदेखी और मनमर्जी के कारण दुकानदार व बैंकर्स कर रहे परहेज
सीकर जिले में करीब 5000 हजार से अधिक दुकानें है और औसतन हर दुकानदार के पास एक हजार रुपए और जिले की 19 में प्रत्येक चेस्ट ब्रांच में दस लाख रुपए का स्टॉक बिना उपयोग के रखा हुआ है। वहीं जिले की आबादी के हिसाब से औसतन हर घर में दस रुपए के 10 सिक्के हैं। इन सब की राशि को जोड़ा जाए तो क्रमश दुकानदारों के पास 50 लाख, चेस्ट ब्रांच में 19 करोड़ और आम आदमी के कारण करीब 27 करोड़ रुपए ताले में रखे हुए हैं।
Published on:
13 Feb 2019 11:17 am
