4 सितंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सरताज के लिए 68 प्रत्याशियों के बीच शह और मात का खेल

सीकर. नाम वापसी के बाद अब छात्रसंघ चुनावों की तस्वीर साफ हो गई है। शहर के छह महाविद्यालयों के लिए 72 विद्यार्थियों ने अलग-अलग पदों के लिए नामांकन दाखिल किया था।
4 min read
Google source verification
sikar news

सरताज के लिए 68 प्रत्याशियों के बीच शह और मात का खेल

सीकर. नाम वापसी के बाद अब छात्रसंघ चुनावों की तस्वीर साफ हो गई है। शहर के छह महाविद्यालयों के लिए 72 विद्यार्थियों ने अलग-अलग पदों के लिए नामांकन दाखिल किया था। इसमें से अब चार कम होने पर 68 के बीच मुकाबला होगा। कहीं त्रिकोणीय मुकाबला है तो कहीं दो के बीच ही कांटे की टक्कर है। छात्रसंघ चुनावों को लेकर 31 अगस्त को मतदान होगा। नाम वापसी के बाद विद्यार्थियों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है। विद्यार्थी अब कहीं सभा के माध्यम से तो कहीं व्यक्तिगत सम्पर्क कर वोट मांग रहे हैं। पुराने वादों को पूरा कहने की बात कही जा रही है तो कहीं नए रिश्तों की दुहाई दी जा रही है। कहीं संगठन की बात कही जा रही है तो जाति व गोत्र पर भी वोट मांगे जा रहे हैं। विद्यार्थी हितों को भी मुद्दा बनाया जा रहा है। वहीं कॉलेज व प्रशासन भी चुनाव की तैयारियों में जुट गया है। शांति व्यवस्था के लिए मजिस्ट्रेट भी नियुक्त कर दिए गए हैं।
चार नाम कम हुए
नाम वापसी/जांच के बाद सीकर शहर के छह महाविद्यालयों में से चार प्रत्याशी कम हो गए हैं। किसी ने खुद ने नाम वापस ले लिया तो किसी का नामांकन ही रद्द हो गया। विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य हीरालाल जांगिड़ ने बताया कि संयुक्त सचिव पद के प्रत्याशी दिनेश सैनी का नामांकन रद्द हो गया है। अब इस पद पर तमन्ना कुमारी व रितु सैनी के बीच मुकाबला है। वहीं विधि महाविद्यालय के प्राचार्य हेम बारी ने बताया कि उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी मोहित पुंजानी ने नाम वापस ले लिया। अब इस पद के लिए नेहा पारीक, श्रीकांत शर्मा व सुष्मिता के बीच मुकाबला होगा। वहीं वाणिज्य महाविद्यालय में उपाध्यक्ष पद की प्रत्याशी सुनीता जांगिड़ ने नाम वापस ले लिया है। संस्कृत महाविद्यालय में उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी किशोर कुमार लूणिया ने नाम वापस ले लिया है।
परिचय पत्र 30 तक मिलेंगे
विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य एचएल जांगिड़ ने बताया कि बिना परिचय पत्र के किसी को मतदान के दिन प्रवेश नहीं दिया जाएगा। 30 अगस्त को दोपहर तीन बजे तक परिचय पत्र जारी किए जाएंगे।
कला में प्रतिष्ठा का सवाल
कला महाविद्यालय में कुल 5850 मतदाता हैं। यहां अध्यक्ष पद के लिए विद्यार्थी परिषद के नितिश कुमार, एसएफआई के पंकज डोगीवाल, एनएसयूआई के संदीप कुमार ढाका, डीएएसएफआई के विकास दानोदिया और पंकज कुमार के बीच मुकाबला है। यहां पिछले साल एसएफआई के विजेन्द्र ढाका अध्यक्ष बने थे। अब एसएफआई के सामने सीट बरकरार रखने की चुनौती होगी। एसके कॉलेज के टुकड़े होने के बाद यह कॉलेज ही सबसे महत्वपूर्ण है। शहर के सभी महाविद्यालयों में सर्वाधिक मतदाता भी इसी कॉलेज में हैं। यहां उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के पंकज सैनी, एसएफआई के पुनीत दाधीच व डीएएसएफआई की प्रमिला मैदान में है। महासचिव पद के लिए एबीवीपी के देवीलाल जाट, एसएफआई के नरेन्द्र कुमावत व डीएएसएफआई के कृष्ण कुमार मैदान में हैं। संयुक्त संचिव पद के लिए एसएफआई की अनिता वर्मा, एबीवीपी के अजमेरा गुर्जर व डीएएसएफआई के राकेश कुमार बरवड़ मैदान में है। यहां सभी संगठनों की प्रतिष्ठा दांव पर है।
विज्ञान में एबीवीपी पर रहेगी नजर
विज्ञान महाविद्यालय में 2285 मतदाता हैं। यहां अध्यक्ष पद के लिए चार जने मैदान में है। लेकिन मुकाबला दो के बीच होने की संभावना है। यहां एसएफआई के राहुल बाना, एबीवीपी के पंकज कुमार रोलन, एनएसयूआई के विकास थालौड़ व डीएएसएफआई के संजय वर्मा मैदान में है। उपाध्यक्ष पद पर एसएफआई के अजय कुमार जांगिड़, एनएसयूआई के गोविंद प्रसाद मीणा, डीएएसएफआई के महिपाल वर्मा व एबीवीपी के संदीप शर्मा मैदान में हैं। महासचिव पद पर डीएएसएफआई की भारती सैनी, एसएफआई के मुरलीधर व एबीवीपी के विकास टेलर के बीच मुकाबला है। संयुक्त सचिव पद पर डीएएसएफआई के प्रत्याशी दिनेश सैनी का नामांकन रद्द होने के बाद अब एसएफआई की तमन्ना व एबीवीपी की रितु सैनी के बीच मुकाबला है। विज्ञान में अभी अखंड एबीवीपी के रामअवतार चौधरी अध्यक्ष हैं। अखंड व एबीवीपी के विलय के बाद अब यहां अब एबीवीपी के सामने सीट बरकरार रखने की चुनौती होगी।
संस्कृत में आमने-सामने की टक्कर
संस्कृत महाविद्यालय में 516 मतदाता हैं। यहां सभी पदों के लिए दो-दो प्रत्याशी मैदान में हैं। यहां एनएसयूआई व डीएएसएफआई ने अपना उम्मीद्वार नहीं उतारा है। अध्यक्ष पद पर एसएफआई के हेमंत कुमार दानोदिया व एबीवीपी के तेज प्रकाश शर्मा के बीच मुकाबला है। उपाध्यक्ष पद पर पहले तीन ने नामांकन भरा था। किशोर कुमार के पीछे हटने से अब एसएफआई की पूजा यादव व एबीवीपी की एकता कुमारी के बीच मुकाबला होगा। महासचिव पद पर एसएफआई के विद्याधर बलाई व एबीवीपी के मुकेश कुमार वर्मा के बीच टक्कर होगी। संयुक्त सचिव पद पर एसएफआई के सचिन कुमार बडगुर्जर व एबीवीपी के संजू रोहिला मैदान में हैं। यहां अभी एबीवीपी की पूजा शेखावत अध्यक्ष है। यहां एबीवीपी को सीट बरकरार रखने की चुनौती होगी।
विधि में होगा भितरघात
विधि महाविद्यालय में कहने को मात्र 268 ही मतदाता हैं। लेकिन टिकट को लेकर सर्वाधिक विवाद यहीं पर हुआ है। एक प्रत्याशी की ओर से रक्तदान किया जाना चुनावों में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां एक संगठन के कार्यकर्ता अभी भी एकजुट नहीं है। यहां भितरघात होने की पूरी संभावना है। बड़ी बात यह है कि भितरघात रोकने के लिए मन से कोई प्रयास नहीं किया जा रहा। यहां एसएफआई ने जयंत वर्मा को मैदान में उतारा है तो एबीवीपी ने रूपेन्द्र सिंह को प्रत्याशी बनाया है। इसके अलावा सोमवीर भी मैदान में है। यहां मुकाबला त्रिकोणीय होने के साथ ही उलटफेर भी हो सकता है। उपाध्यक्ष पद पर मोहित पुंजानी ने नाम वापस ले लिया। अब एबीवीपी की नेहा पारीक, एसएफआई की सुष्मिता व एनएसयूआई के श्रीकांत शर्मा के बीच मुकाबला है। महासचिव पद पर एबीवीपी के आकाश कुमावत, एसएफआई की दीक्षा आर्य,एनएसयूआई की अंकिता वर्मा व कमल किशोर कुमावत मैदान में हैं। संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी की महिमा चतुर्वेदी, एसएफआई की निधि लाटा व एनएसयूआई की सावित्री मैदान में है।
वाणिज्य में जिधर जाएंगे नाराज, उसी की जीत
वाणिज्य महाविद्यालय में कुल 2177 मतदाता हैं। यहां अध्यक्ष पद पर त्रिकोणीय मुकाबला है। एसएफआई ने प्रयास मिश्रा, एनएसयूआई ने सोनू सैनी व एबीवीपी ने सुशील कुमार सैनी को मैदान में उतारा है। यहां एक दावेदार को टिकट नहीं मिलने से उसके कार्यकर्ता नाराज हैं। अब यहां पर जिस प्रत्याशी के समर्थन में नाराज कार्यकर्ता चले जाएंगे उसी की जीत पक्की हो जाएगी। यहां उपाध्यक्ष पद पर सुनीता जांगिड़ ने नाम वापस ले लिया अब एनएसयूआई के दिनेश जांगिड़, एबीवीपी के मुकुल दाधीच व एसएफआई के शहबाज अली मैदान में हैं। महासचिव पद पर एसएफआई ने इंद्राज सैनी, एनएसयूआई ने कृष्ण सिंह शेखावत व एबीवीपी ने विनय कुमार रोलाणिया को प्रत्याशी बनाया है। संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी की दिव्या सोनी व एसएफआई की सुमन कुमावत के बीच मुकाबला है।
प्रचार ने पकड़ा जोर
एनएसयूआई के सुधीर प्रताप सिंह ओला ने बताया कि संगठन के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने कई जगह प्रचार किया। एसएफआई व एबीवीपी ने भी प्रचार तेज कर दिया है। वहीं डीएएसएफआई के जिलाध्यक्ष अशोक वर्मा ने दावा किया कि सेामवार को एक संगठन से नाराज 21 कार्यकर्ताओं ने डीएएसफआई की सदस्यता ग्रहण कर ली। 21 जनों के एक साथ आने से उनका संगठन अब और मजबूत होगा।