
अजय शर्मा
सीकर। भर्ती परीक्षाओं में हाजिरी बढ़ाने के लिए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की जुर्माने की सख्ती को लेकर बेरोजगारों में आक्रोश है। बेरोजगारों का दर्द है कि पहले परीक्षा की फीस चुकाए फिर गैर हाजिरी पर चयन बोर्ड को जुर्माना भी दें, यह कैसा कानून है।
परीक्षा में गैर हाजिरी पर जुर्माना का प्रावधान करने वाला राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड पहली एजेंसी बन गई है, इसको लेकर भी बेरोजगारों की ओर से सवाल उठाए है। गौरतलब है कि चयन बोर्ड की सोमवार को हुई बैठक में एक वित्तीय वर्ष में चार परीक्षाओं में शामिल नहीं होने पर 2250 रुपए का जुर्माना लगाने की बात कही है। इससे प्रदेश के हजारों युवाओं में आक्रोश है।
-आवेदन के समय शैक्षिक योग्यता हासिल होने की उम्मीद की वजह से आवेदन किया, लेकिन भर्ती के परिणाम तक शैक्षिक योग्यता हासिल नहीं होना।
-परीक्षा की बेहतर तैयारी नहीं होने की वजह से परीक्षा से दूरी।
-सेंटर दूर-दराज मिलने पर परीक्षा देने नहीं जाना।
-परीक्षा वाले दिन और कोई परीक्षा का आ जाना।
-पारिवारिक या स्वयं के कोई परेशानी होने की वजह से परीक्षा नहीं देना।
-परीक्षा से पहले किसी अन्य भर्ती के जरिये सफलता मिलना।
-आगामी परीक्षा की बेहतर तैयारी होने की वजह से जान बूझकर परीक्षा मिस करना।
-परीक्षा तिथि से एक महीने पहले बेरोजगारों से परीक्षा में शामिल होने के संबंध में सहमति मांगी जाए। बोर्ड परीक्षा की तैयारी शुरू करेगा तो राजस्व का नुकसान नहीं होगा।
-परीक्षा में शामिल होने की सहमति देने के बाद नहीं आने वालों पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
- परीक्षा में लगातार शामिल नहीं होने वालों से सबूतों के साथ जानकारी मांगी जा सकती है। जिनका कारण सही नहीं हो उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
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कर्मचारी चयन बोर्ड ने बेरोजगारों के साथ मजाक करने का काम किया है। सरकार भले ही कोई भी हो बेरोजगारों की परीक्षाओं को किसी भी सूरत में कमाई का जरिया नहीं बनाना चाहिए। परीक्षा नहीं देने वालों पर जुर्माना लगाने की व्यवस्था पूरे देश में नहीं है।
-बीएल रैवाड़, भर्ती मामलों के विशेषज्ञ
Updated on:
12 Feb 2025 09:58 am
Published on:
12 Feb 2025 09:56 am
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