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Chaitra Navratri 2019 : चैत्र नवरात्रि के पहले दिन घर-घर होगी घट स्थापना, वादियों में गूंजेंगे माता के जयकारे

घर-घर घट स्थापना के साथ शनिवार को चैत्र मास के वासंतिक नवरात्र शनिवार से शुरू होंगे। इसके साथ ही अंचल के प्रमुख शक्ति केन्द्र जीणमाता और शाकंभरी का मेला भी भरेगा
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घर-घर घट स्थापना के साथ शनिवार को चैत्र मास के वासंतिक नवरात्र शनिवार से शुरू होंगे। इसके साथ ही अंचल के प्रमुख शक्ति केन्द्र जीणमाता और शाकंभरी का मेला भी भरेगा

Chaitra Navratri 2019 : चैत्र नवरात्रि के पहले दिन घर-घर होगी घट स्थापना, वादियों में गूंजेंगे माता के जयकारे

सीकर.

घर-घर घट स्थापना के साथ शनिवार को चैत्र मास के वासंतिक नवरात्र शनिवार से शुरू होंगे। इसके साथ ही अंचल के प्रमुख शक्ति केन्द्र जीणमाता और शाकंभरी का मेला भी भरेगा। श्रद्धालु शुक्रवार को दिन भर नवारात्र की तैयारी में जुटे रहे। दुर्गा मंदिरों को सजाया गया है। वहीं नवरात्र स्थापना के साथ ही नव संवत्सर का आगाज होगा। नवसंवत्सर की पूर्व संध्या पर शहर में तीन स्थानों पर दीप यज्ञ का आयोजन किया गया। नवसंवत्सर पर 21 हजार वाहनों की भगवा वाहन रैली समेत कई आयोजन होंगे। नवरात्र में घट स्थापना का अभिजित मुहूर्त दोपहर 12.02 बजे से 12.55 के मध्य का है।


बन रहे हैं शुभ संयोग
इस बार नवरात्रा में पांच सर्वार्थ सिद्धि और दो रवि योग का संयोग बनने से इसकी महत्ता बढ़ गई है। शुभ संयोग में मां दुर्गा की आराधना करने से मनोरथ पूर्ण होते हैं। नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाएगी। नवरात्र चैत्र शुक्ल प्रतिपदा छह अप्रैल को रेवती नक्षत्र एवं वैधृति योग में आरंभ होकर 14 अप्रैल को समापन होगा। पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि इससे राजनीति क्षेत्र में उथल-पुथल होगा। माता की विदाई महिष यानि भैंसा पर होगी। नवरात्र में माता को प्रसन्न करने के लिए दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा, बीज मंत्र का जाप, भगवती पुराण आदि का पाठ करना शुभ रहेगा। नवरात्र का आरंभ कलश स्थापना और पूजा अर्चना साथ करना चाहिए।


राशि के अनुसार करें मां की आराधना
मेष - रक्त चंदन, लाल पुष्प और सफेद मिष्ठान अर्पण करें।
वृष - पंचमेवा, सुपारी, सफेद चंदन, पुष्प चढ़ाए।
मिथुन - केला, पुष्प, धूप से पूजा करें।
कर्क - बताशा, चावल, दही का अर्पण करें।
सिंह - तांबे के पात्र में रोली, चंदन, केसर, कर्पूर के साथ आरती करें।
कन्या - फल, पान पत्ता, गंगाजल मां को अर्पित करें।
तुला - दूध, चावल, चुनरी चढ़ाएं और घी के दीपक से आरती करें।
वृश्चिक - लाल फूल, गुड़, चावल और चंदन के साथ पूजा करें।
धनु - हल्दी, केसर, तिल का तेल, पीत पुष्प अर्पित करें।
मकर - सरसों तेल का दीया, पुष्प, चावल, कुमकुम और हलवा मां को अर्पण करें।
कुंभ -पुष्प, कुमकुम, तेल का दीपक और फल अर्पित करें।
मीन - हल्दी, चावल,पीले फूल और केले के साथ पूजन करें।


कन्या पूजन से पूर्ण होगी मनोकामना
चैत्र नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। तीन वर्ष से लेकर नौ वर्ष की कन्याओं का पूजन फलदायी होता है। एक कन्या की पूजा से एश्वर्य, दो कन्या की पूजन से भोग और मोक्ष, तीन कन्याओं के पूजन से धर्म, अर्थ और काम, चार की पूजा से राज्यपद, पांच की पूजा से विद्या, छह की पूजा से सिद्धि, सात की पूजा से राज्य, आठ की पूजा से संपदा और नौ कन्याओं की पूजा से प्रभुत्व की प्राप्ति होती हैं।