
चुनाव तो जीते लेकिन अब चुनौती अपार
कांग्रेस ने जीता गढ़, जनता को राहत का इंतजार, विधायक बोले, सबसे पहले कराएंगे कर्जा माफी
सीकर. कांग्रेस ने अपने पुराने गढ़ में तो वापसी कर ली है, लेकिन अभी चुनौती अपार है। जनता को तत्काल राहत का इंतजार है तो बेरोजगारों को अटकी भर्तियों को पटरी पर लाने का है। सत्ता संभालते ही नेताओं ने अपने १०० दिन का एजेण्डा भी बना लिया है। इसके हिसाब से भी पुराने मुद्दों को पूरा करने की रणनीति बनाएंगे। पत्रिका टीम ने विधायकों से बातचीत की तो मुख्य तौर पर उन्होंने प्राथकिताओं में सीकर मेडिकल कॉलेज, पेयजल प्रोजेक्ट, शेखावाटी विवि को भवन व अटकी भर्तियों को धरातल पर लाने की गिनाई। डोटासरा, मोरदिया व वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि सबसे पहले कर्जा माफी होगी।
ुप्रोजेक्टों को फिलहाल बजट का इंतजार
मिनी सचिवालय, शेखावाटी विवि को भवन व यमुना का पानी सहित अन्य बड़े प्रोजेक्टों के लिए तत्काल बजट की आवश्यकता है। एेसे में विधायकों की रणनीति है कि इन बड़े प्रोजेक्टों को पहले बजट में मंजूरी दिलाकर काम शुरू कराया जाएगा। वहीं जिन प्रोजेक्टों में अभी पैसा बचा हुआ है उनको समय पर पूरा कराया जाए।
स्मृति वन: शहर के ड्रीम प्रोजेक्ट से उम्मीद
स्मृति वन की स्वीकृति से लेकर अब तक कांग्रेस इसे ड्रीम प्रोजेक्ट बताती रही। इस प्रोजेक्ट को लेकर भाजपा और कांग्रेस के नेताओं में खासी कलह भी हुई। यहां भी डीपीआर के अनुसार काम नहीं हुआ है। एेसे में अब जनता को इंतजार है कि कांग्रेस जिस तरह से भाजपा पर डीपीआर बदलने का आरोप लगा रही थी, वह अब ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए क्या करती है।
एमसीआई से मंजूरी का इंतजार
मेडिकल कॉलेज का भवन निर्माण तो तेजी से हो रहा है लेकिन युवाओं को एमसीआई की मंजूरी का इंतजार है। एमसीआई की मंजूरी नहीं मिलने के कारण मेकिडल कॉलेज शुरू नहीं हो सका। जिलेवासियों को उम्मीद है कि कैसे भी सीकर मेडिकल कॉलेज इसी सत्र से शुरू हो। यह प्रोजेक्ट भी पिछली सरकार के समय चर्चा में आया था। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा पांच साल में भवन निर्माण तक ही इस प्रोजेक्ट को लेकर आ सकी।
कागजों में दबा मिनी सचिवालय
सांवली रोड पर बनने वाला मिनी सचिवालय का प्रोजेक्ट वर्षों से कागजों में अटका हुआ है। पिछली कांग्रेस सरकार ने मिनी सचिवालय की घोषणा की थी, लेकिन बजट नहीं देने के कारण काम अटका रहा। बाद में कलेक्ट्रेट की जमीन बेचकर बनाने की योजना बनाई गई, लेकिन डीपीआर से आगे अभी काम नहीं बढ़ा है।
शेखावाटी विवि: भवन ही नहीं मिला
कांग्रेस सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय विवि को जहां छोडक़र गई थी, वहीं आज विवि है। भाजपा
सरकार पांच साल में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विवि को भवन भी नहीं बनवा सकी। हालांकि कटराथल में भवन निर्माण कार्य जारी है। अब युवाओं की उम्मीद है कि विवि का जल्द भवन निर्माण पूरा हो, ताकि सभी विभाग शुरू हो सके।
नंदीशाला: आवारा पशु बड़ी समस्याशहर में आवारा पशु बड़ी समस्या है। भाजपा राज में नंदीशाला की स्वीकृति नहीं मिलने पर पूर्व उद्योग मंत्री राजेन्द्र पारीक ने विभिन्न सामाजिक संगठनों सहयोग लेकर नंदीशाला का निर्माण कराया। एेसे में अब बड़ी चुनौती इसमें सुविधा बढ़ोतरी की है। क्योकि आवारा पशु कई लोगों की जिदंगी का दीपक बुझा चुके है।
तो क्या अब स्वरूप बदलेगा
भाजपा और कांग्रेस की आपसी रार में नगर परिषद का नया भवन उलझा रहा। कांग्रेस पूरे पांच साल एक ही आरोप लगाती रही कि भाजपा ने भवन के स्वरुप को ही बदल दिया है। एेसे में अब चर्चा है कि क्या कांग्रेस सत्ता में वापसी के बाद नए भवन के स्वरूप को बदलेगी।
नवलगढ़ पुलिया
शहर में जाम की समस्या नवलगढ़ पुलिया ही है। भाजपा सरकार महज घोषणा तक ही सीमित रही। कांग्रेस ने चुनावी सभाओं में नवलगढ़ पुलिया की समस्या को खूब गिनाया। एेसे में अब शहरवासियों को नवलगढ़ पुलिया के फोरलेन का इंतजार है। हालांकि इस प्रोजेक्ट के लिए फिलहाल बजट मिलना काफी बड़ी चुनौती है।
Published on:
17 Dec 2018 05:27 pm
