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राजस्थान: हर रोज इतनी महिलाओं से छेड़छाड़ व बलात्कार, सवाल- आखिर कब तक ?

Rape With Woman Case : सीकर में पुलिस रिकॉर्ड ( Crime Record of Rape Case ) के अनुसार बलात्कार के आंकड़ों में तेजी से इजाफा हुआ है। राजस्थान पत्रिका ने पिछले तीन सालों के महिला संबंधित अपराधों के आंकड़ों पर गौर किया तो चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

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सीकर

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Naveen Parmuwal

Dec 05, 2019

सीकर.

rape With Woman Case : किसी भी युवती से दुष्कर्म ( Rape with Girl ) की घटना सामने आने के बाद कैंडल मार्च ( Candle March To Protest Against Rape ) निकाल कर संवेदनाएं प्रकट कर देते हैं। कुछ दिनों के बाद फिर से माहौल शांत हो जाता है और हम भूल जाते हैं। फिर किसी युवती से बलात्कार होता है तो हम सडक़ों पर उतर जाते हैं। प्रदर्शन करते हैं, कैं डल मार्च निकालते हैं। गंभीर विषय है कि क्या हमने कभी राह चलती युवती को संकट में देखकर मदद की है। तब हम सभी अपनी-अपनी मजबूरियों को देखकर चुप चले जाते हैं। क्यों नहीं ये तस्वीर बदलनी चाहिए।


साल दर साल बढ़ रहा अपराध
सीकर में पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार बलात्कार के आंकड़ों में तेजी से इजाफा हुआ है। राजस्थान पत्रिका ने पिछले तीन सालों के महिला संबंधित अपराधों के आंकड़ों पर गौर किया तो चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पिछले तीन सालों में महिलाओं से बलात्कार, छेड़छाड, अपहरण जैसी घटनाओं में दोगुना अंतर देखने को मिला है। पत्रिका ने 2017, 2018 और 2019 में दर्ज आंकड़ों के आधार पर तुलना की है।

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2017 में बलात्कार के 80 मामले दर्ज हुए थे तो अब यह आंकड़ा बढ़ कर 152 पर पहुंच गया है। वहीं छेड़छाड की बात करें तो 2017 में 77 मामले छेड़छाड के दर्ज हुए थे तो अब 2019 में 175 मुकदमे दर्ज हुए हैं। 2017 में महिलाओं के अपहरण के 106 मुकदमे दर्ज हुए थे तो अब 2019 में 170 मुकदमें दर्ज हुए। हर साल महिलाओं के साथ शोषण की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है।


कोर्ट के आदेश पर पुलिस मुख्यालय ने तय की थी गाइडलाइन
निर्भया कांड के बाद महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधिक मामलों के निस्तारण में कई निर्देश जारी हुए। कोर्ट के आदेश पर पुलिस की मुख्यालय की ओर से भी कई गाइडलाइन तय की गई थी। पीडि़ता की ओर से मुकदमा दर्ज होने के 24 घंटों के बाद मेडिकल मुआयना करना जरूरी किया गया।

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यही नहीं इसी तरह से 48 घंटों में कोर्ट में महिला के बयान के लिए अर्जी पेश करना जरूरी किया गया। तय समय के अनुसार जांच पूरी नहीं होने पर जांच अधिकारी को 15 दिनों के इजाजत अलग से लेनी पड़ती है।


लंबित मामले भी बढ़े
महिलाओं से संबंधित अपराधों में लंबित मामले भी मुकदमों के साथ बढ़ रहे हैं। यह काफी चिंताजनक है। रेकॉर्ड के अनुसार 2017 में 646, 2018 में 665 और 2019 में 1105 मुकदमें दर्ज हुए हैं। पुलिस ने 2019 में 413 मामलों में जांच करते हुए चालान पेश किया। जबकि 421 मामलों में पुलिस ने एफआर पेश की है। अक्टूबर 2019 के अंत तक करीब 271 मामले पुलिस के पास पेंडिंग रहे।


घटनाओं की रोकथाम के लिए स्पेरो टीम है ना...
सोसायटी में क्राइम बढ़ रहा है। इसके अनुपात में महिलाओं पर भी अपराध बढ़े है। शहर में छेडछाड की घटनाओं की रोकथाम के स्कूल व कॉलेजों के बाहर स्पेरो टीम काम कर रही है। -डा.गगनदीप सिंगला एसपी, सीकर


अपराध 2017 2018 2019
बलात्कार 80 98 152
छेड़छाड 77 100 75
अपहरण 106 102 170
दहेज हत्या 06 13 08
दहेज प्रताडऩा 355 346 592
एससीएसटी एक्ट
बलात्कार 15 16 19
(वर्ष 2017,2018,2019 के अक्टूबर माह तक की तुलनात्मक स्थिति )


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