
स्वाइन फ्लू के बाद तेजी से फैल रही इस बीमारी से रहे सतर्क, आपकी जान को है खतरा !
सीकर.
मौसम में आ रहे उतार-चढ़ाव के कारण अब मस्तिष्क ज्वर का खतरा बढ़ रहा है। घातक संक्रामक इस बीमारी की चपेट में आने पर कई बार जान तक गंवानी पड़ती है। चिकित्सा विभाग ने जिले में सभी चिकित्सा अधिकारियों को सचेत रहने के निर्देश दिए हैं। तेज बुखार, गर्दन अकडऩे और शरीर पर लाल रंग के चकते होने जैसे संदिग्ध लक्षणों पर तुरंत जांच करवाई जाएगी। गौरतलब है कि विश्व में मस्तिष्क ज्वर के प्रभाव वाले भारत भी शामिल है। जिला अस्पतालों में मस्तिष्क ज्वर के मरीज आने लगे हैं।
इलाज में कोताही तो होगी कार्रवाई
निदेशालय से आए निर्देशों के अनुसार दिमागी बुखार के लिए मौसम अनुकूल है। सभी चिकित्सा संस्थानों में दिमागी बुखार की दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश है। इसके लिए सभी को पाबंद किया जाएगा। इसके बाद भी इलाज में कोताही होने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घर-घर जाएंगे स्वास्थ्यकर्मी
सीकर. मौसमी बीमारियों (स्वाइन फ्लू, डेंगू, चिकिनगुनिया, जीका एवं स्क्रब टायफस) के नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए स्वास्थ्य आपके द्वार अभियान का आगाज सोमवार से होगा। सीकर शहर, लोसल, खंडेला, श्रीमाधोपुर रींगस, नीमकाथाना, लक्ष्मणगढ़ फतेहपुर एवं रामगढ़ में चलाए जाने वाले अभियान के दौरान विभिन्न विभागों का सहयोग रहेगा। अभियान के दलों का गठन, आईएलआई एवं बुखार के मरीजों की पहचान, शहर में सर्वे किया जाएगा।
इसमें आयुक्त नगर परिषद सीकर अभियान के तहत संबंधित शहरी क्षेत्र में सफाई कार्यकर्ता उपलब्ध करवाया जाएगा। इस दौरान नगर परिषद, नगर पालिका की कचरा एकत्रित करने वाली गाडियो में ऑडियो किल्प उपलब्ध करवा दी। परिषद की ओर से एमएलओ उपलब्ध करवाया जाएगा। इसी तरह अधिशाषी अभियंता, जलदाय विभाग, सीकर पीएचईडी की टंकियों की साफ सफाई एवं क्लोरिनेशन कराएंगे। प्रत्येक शनिवार को प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को मौसमी बीमारियों की जानकारी देकर प्रत्येक रविवार को सूखा दिवस के रूप में मनाया जाएगा। पशुपालन विभाग स्क्रब टायफस हाई रिस्क एरिया में दवा का छिडकाव एवं सर्वें करें।
तेजी से फैलती है बीमारी
वर्ष 1871 में जापान में पहली बार मिली यह बीमारी घनी आबादी वाली गंदी बस्तियों, छात्रावास, बैरक एवं शरणार्थी शिविरों में तेजी से फैलती है। जीवाणु के सम्पर्क में आने पर तीन से चार दिन बाद लक्षण नजर आने लगते हैं। फिजीशियन डॉ. रघुनाथ चौधरी के अनुसार प्रत्यक्ष रूप से स्वस्थ्य नजर आने वाले संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से मस्तिष्क रोग के जीवाणु श्वास के जरिए दूसरे व्यक्ति के शरीर में चले जाते हैं। जल्द उपचार नहीं मिलने पर रोगी का रक्तचाप तेजी से गिर जाता है और रोगी अचेतावस्था में पहुंच जाता है।
Published on:
20 Jan 2019 12:42 pm
